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मऊ: मंदिर में नाबालिग भाई-बहन से ऑन कैमरा पूछताछ के बाद महिला दारोगा पर गिरी गाज, SP ने थाने से हटाया!

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यशैली, संवेदनशीलता और ‘मिशन शक्ति’ जैसे अभियानों की वास्तविक सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शीतला माता मंदिर परिसर में नाबालिग भाई-बहन से की गई ऑन कैमरा पूछताछ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस विभाग को सख्त कदम उठाना पड़ा। इस पूरे मामले में महिला थाना प्रभारी मंजू सिंह को उनके पद से हटा दिया गया है।

📍 क्या है पूरा मामला?

घटना मऊ जिले के एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल शीतला माता मंदिर की है। यहां कुछ दिन पहले महिला थाना प्रभारी मंजू सिंह ‘मिशन शक्ति’ अभियान के तहत पहुंची थीं। इसी दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में मौजूद एक नाबालिग भाई और बहन से पूछताछ शुरू कर दी। हैरानी की बात यह रही कि यह पूरी पूछताछ कैमरे के सामने की गई और बाद में उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

वीडियो में देखा गया कि बच्चे काफी असहज नजर आ रहे हैं। पूछताछ का तरीका और माहौल ऐसा था, जिससे यह साफ झलक रहा था कि बच्चे मानसिक दबाव में हैं। यही वजह रही कि वीडियो सामने आते ही लोगों में नाराजगी फैल गई।

🎥 वीडियो वायरल होने के बाद मचा हड़कंप

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ, लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। आम जनता, सामाजिक संगठनों और बाल अधिकारों से जुड़े लोगों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि—

नाबालिग बच्चों से सार्वजनिक स्थान पर कैमरे के सामने पूछताछ करना गलत है

बच्चों की पहचान और निजता की सुरक्षा कानूनन जरूरी है

मिशन शक्ति जैसे अभियान का उद्देश्य सुरक्षा है, न कि भय का माहौल बनाना

वीडियो को लेकर यह भी सवाल उठा कि क्या पुलिस ने बाल संरक्षण कानूनों का पालन किया या नहीं।

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🚨 पुलिस प्रशासन ने लिया संज्ञान

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने तुरंत संज्ञान लिया। एएसपी स्तर पर पूरे मामले की जांच की गई। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि पूछताछ की प्रक्रिया में आवश्यक संवेदनशीलता और प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया।

इसके बाद महिला थाना प्रभारी मंजू सिंह को तत्काल उनके पद से हटा दिया गया। उन्हें थाने से हटाकर पुलिस कार्यालय से अटैच कर दिया गया है। यह फैसला पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर लिया गया।

👮‍♀️ पुलिस का क्या कहना है?

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मिशन शक्ति का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को सुरक्षा का भरोसा देना है, न कि उन्हें असहज या भयभीत करना। अधिकारियों के अनुसार—

 “नाबालिगों से पूछताछ के लिए तय मानकों और दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। यदि इसमें कोई चूक होती है, तो कार्रवाई की जाएगी।”

पुलिस प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

⚖️ कानून और नाबालिगों की सुरक्षा

भारत में नाबालिग बच्चों से जुड़े मामलों के लिए सख्त कानूनी प्रावधान हैं। जेजे एक्ट (Juvenile Justice Act) और पोक्सो कानून के तहत बच्चों की पहचान उजागर करना और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि—

बच्चों से पूछताछ हमेशा बंद कमरे में

काउंसलर या अभिभावक की मौजूदगी में

बिना कैमरा और मीडिया हस्तक्षेप के

की जानी चाहिए।

🤔 मिशन शक्ति पर भी उठे सवाल

यह घटना मिशन शक्ति जैसे महत्वाकांक्षी अभियान की छवि को भी नुकसान पहुंचाती नजर आई। मिशन शक्ति का मकसद महिलाओं और बच्चों को सशक्त बनाना है, लेकिन इस तरह की घटनाएं इसके उद्देश्य पर सवाल खड़े कर देती हैं।

कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि पुलिस कर्मियों को बच्चों से व्यवहार और संवेदनशील मामलों की विशेष ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।

📢 जनता की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर लोगों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है। कई यूजर्स ने लिखा कि—

“गलती चाहे किसी से भी हो, कार्रवाई जरूरी है”

“बच्चों के साथ सख्ती नहीं, समझदारी चाहिए”

“पुलिस को कानून का पालन खुद पहले करना चाहिए”

हालांकि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।

📝 आगे क्या?

फिलहाल महिला थाना प्रभारी को थाने से हटाकर पुलिस लाइन से अटैच किया गया है। मामले की विभागीय जांच जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

यह मामला पुलिस विभाग के लिए एक सीख भी है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता और बच्चों के अधिकारों का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है।

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