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यूपी पंचायत चुनाव 2026: मतदाता सूची में देरी से अप्रैल में चुनाव मुश्किल, प्रत्याशियों की बढ़ी चिंता!

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में होने वाले 2026 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर अब स्थिति पहले जैसी साफ नहीं रह गई है। गांवों में चुनावी माहौल बनने से पहले ही राज्य निर्वाचन आयोग के एक फैसले ने संभावित प्रत्याशियों और स्थानीय स्तर पर राजनीति करने वालों की चिंता बढ़ा दी है।

दरअसल, पंचायत चुनाव की तैयारी के तहत अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन एक बेहद अहम प्रक्रिया होती है। लेकिन इस बार यही प्रक्रिया तय समय के भीतर पूरी नहीं हो पा रही है। पहले जहां अंतिम वोटर लिस्ट जारी करने की तारीख मार्च के अंत तक तय की गई थी, वहीं अब इसमें और देरी होने की संभावना जताई जा रही है।

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदाता सूची को अंतिम रूप देने के लिए अभी कई तकनीकी और प्रशासनिक काम अधूरे हैं। इनमें सबसे प्रमुख है मतदाता सूची का कंप्यूटरीकरण, राज्य स्तरीय मतदाता नंबर (SVN) जारी करना और मतदान केंद्रों की मैपिंग का काम। ये सभी प्रक्रियाएं समय लेने वाली हैं और जमीनी स्तर पर इनका सत्यापन भी जरूरी है।

क्यों हो रही है देरी?

आयोग के अधिकारियों का कहना है कि इस बार पंचायत चुनाव से पहले मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए डुप्लीकेट नामों की पहचान और उन्हें हटाने का काम BLO (ब्लॉक लेवल ऑफिसर) के माध्यम से किया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदेश में लाखों ऐसे नाम पाए गए हैं जो एक से अधिक मतदान केंद्रों पर दर्ज हैं। ऐसे मामलों में बिना फिजिकल वेरिफिकेशन के नाम हटाना संभव नहीं है। यही कारण है कि हर नाम की जमीनी जांच की जा रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया लंबी होती जा रही है।

इसके अलावा, बोर्ड परीक्षाओं का समय, सरकारी कर्मचारियों पर अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियां और Special Intensive Revision (SIR) अभियान में देरी भी चुनावी तैयारियों को प्रभावित कर रही है।

प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने वाला

मौजूदा ग्राम पंचायत प्रधानों का पांच साल का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में अगर अंतिम मतदाता सूची अप्रैल के मध्य या उसके बाद जारी होती है, तो चुनाव कराने की पूरी प्रक्रिया — जैसे आरक्षण निर्धारण, नामांकन, प्रचार और मतदान — को एक महीने के भीतर पूरा करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

आरक्षण की प्रक्रिया भी अभी पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी है। खासकर OBC आरक्षण के लिए समर्पित आयोग के गठन और ट्रिपल टेस्ट जैसे कानूनी प्रावधानों को पूरा करने में समय लग सकता है।

क्या चुनाव टल सकते हैं?

इन परिस्थितियों को देखते हुए अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या पंचायत चुनाव समय पर हो पाएंगे? अगर 26 मई तक चुनाव नहीं हो सके, तो ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए जा सकते हैं। नियमों के अनुसार, ऐसे में छह महीने के भीतर चुनाव कराए जा सकते हैं।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि चुनाव जुलाई या उसके बाद तक टल सकते हैं।

प्रत्याशियों की बढ़ी बेचैनी

गांव-गांव में कई संभावित उम्मीदवार चुनाव की तैयारी में जुटे हुए थे। लेकिन मतदाता सूची के प्रकाशन में देरी ने उनकी रणनीतियों पर असर डाला है। अब उम्मीदवारों को यह समझ नहीं आ रहा कि उन्हें प्रचार अभियान कब से तेज करना चाहिए।

हालांकि, पंचायती राज विभाग की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि चुनाव समय पर कराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन जमीनी हालात को देखते हुए अप्रैल-मई में चुनाव होना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है।

अब सभी की निगाहें राज्य निर्वाचन आयोग के अगले फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि पंचायत चुनाव की नई तारीख क्या होगी और चुनावी प्रक्रिया कब तक पूरी की जा सकेगी।

The UP Panchayat Election 2026 is likely to be delayed as the Uttar Pradesh State Election Commission has extended the timeline for the final voter list publication. With Gram Panchayat tenure ending on May 26, 2026, concerns are rising among candidates and political observers about the feasibility of conducting elections on time. Administrative delays in voter list verification, OBC reservation procedures, and booth-level mapping have created uncertainty around the UP Panchayat polls schedule, making April elections increasingly unlikely.

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