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संसद का शीतकालीन सत्र शुरू: पीएम मोदी बोले—“संसद में ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए”!

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AIN NEWS 1: भारत की संसद का शीतकालीन सत्र आज से औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। यह सत्र 19 नवंबर तक चलेगा और इस दौरान लोकसभा तथा राज्यसभा, दोनों सदनों की 15-15 बैठकें प्रस्तावित की गई हैं। हर बार की तरह इस बार भी सत्र से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज़ रहीं, लेकिन सबसे अधिक चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान रहा, जिसमें उन्होंने सत्र के एजेंडे और विपक्ष की भूमिका को लेकर स्पष्ट संदेश दिया।

पीएम मोदी का विपक्ष को संदेश: “ड्रामा नहीं, डिलीवरी जरूरी”

सत्र शुरू होने से कुछ घंटे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए कहा कि संसद जनता की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करती है और यहां “ड्रामा नहीं, डिलीवरी” होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जनता चाहती है कि संसद में ठोस बहस हो, रचनात्मक सुझाव आएं और देशहित में महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएं। इसलिए विपक्ष को चाहिए कि वह सरकार को घेरने की राजनीति से आगे बढ़कर सकारात्मक भूमिका निभाए।

पीएम मोदी ने अपील की—

“संसद में हर आवाज़ का महत्व है। विरोध भी हो, सुझाव भी आएं, लेकिन देश की प्रगति के रास्ते में रुकावटें नहीं होनी चाहिए।”

सत्र का महत्व: कई अहम बिलों पर नज़र

शीतकालीन सत्र आम तौर पर छोटा होता है, लेकिन इस बार इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार कई ऐसे विधेयकों को पेश करने की तैयारी में है, जिनका सीधे जनता के जीवन से संबंध है।

इनमें आर्थिक सुधार, प्रशासनिक सुगमता, डिजिटल नीति, कृषि, और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े बिल शामिल हो सकते हैं।

इसके अलावा कुछ ऐसे विधेयक भी लंबित हैं जिन पर विपक्ष सरकार को घेरना चाहता है।

ऐसे में यह सत्र टकराव और सहयोग—दोनों की संभावनाएं लेकर चल रहा है।

पीएम मोदी की प्राथमिकताएं क्या हैं?

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता जनता से जुड़े मुद्दों पर तेज़ डिलीवरी है।

उन्होंने कहा कि संसद सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी का मंच नहीं है, बल्कि यह नीतियां बनाने और देश के विकास की दिशा तय करने का केंद्र है।

पीएम मोदी चाहते हैं कि—

बहस तथ्य आधारित और सभ्य हो

विपक्ष मुद्दों पर चर्चा लेकर आए

संसद की कार्यवाही बाधित न हो

देशहित के फैसले समय पर लिए जाएं

युवा पीढ़ी संसद से सकारात्मक संदेश पाए

उनका कहना था कि संसद में जितनी अधिक उत्पादकता होगी, उतना ही जनता का भरोसा लोकतंत्र पर बढ़ेगा।

विपक्ष से क्या उम्मीदें हैं?

प्रधानमंत्री मोदी की अपील खास इसलिए मानी जा रही है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में कई सत्रों में विपक्ष ने विरोध के रूप में कार्यवाही बाधित की है।

कभी नारेबाज़ी, कभी वॉकआउट, तो कभी हंगामा—इन वजहों से सत्र के कई घंटे बेकार जाते रहे हैं।

पीएम मोदी ने विपक्ष को याद दिलाया कि:

“देश हमारे सभ्य संसदीय व्यवहार से सीखता है। लोकतंत्र साझेदारी से चलता है, टकराव से नहीं।”

उनका संकेत साफ था कि विपक्ष आलोचना करे, सवाल पूछे, सरकार को जवाबदेह बनाए—लेकिन संसद के कामकाज को ठप न करे।

जनता की उम्मीदें और संसद की भूमिका

संसद केवल विधायकों और सांसदों का भवन नहीं है, यह देश की आकांक्षाओं का प्रतीक है।

पीएम मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि देश की जनता हर सत्र से उम्मीद रखती है कि यहां उनके मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा होगी।

चाहे महंगाई हो, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दे, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था या शिक्षा—सभी विषय संसद में व्यापक विचार की मांग करते हैं।

प्रधानमंत्री का यह भी कहना था कि जनता चाहती है कि संसद में “शोर” कम पड़े और “काम” ज्यादा हो।

संसद सत्र की संभावनाएं

इस बार यह उम्मीद की जा रही है कि—

कुछ महत्वपूर्ण कानून पारित होंगे

सरकार कई नीतियों पर विस्तृत चर्चा करेगी

विपक्ष सरकारी नीतियों पर कठिन सवाल उठाएगा

कुछ मुद्दों पर दोनों पक्ष आम सहमति से आगे बढ़ सकते हैं

हालांकि, राजनीति के मौजूदा माहौल को देखते हुए यह कहना आसान नहीं कि सत्र पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा।

लेकिन पीएम मोदी के संदेश ने सत्र के शुरुआती माहौल को जरूर प्रभावित किया है।

अंत में: क्यों महत्वपूर्ण है पीएम मोदी का संदेश?

प्रधानमंत्री का बयान केवल विपक्ष पर तंज नहीं था, बल्कि एक लोकतांत्रिक आग्रह भी था।

उन्होंने यह स्पष्ट किया कि संसद में बहस होनी चाहिए, लेकिन मर्यादा और समझदारी के साथ।

देश की बड़ी चुनौतियाँ सिर्फ राजनीति से नहीं, सामूहिक प्रयास से हल हो सकती हैं।

यदि सरकार और विपक्ष दोनों मिलकर काम करें तो यह सत्र देश के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है।

The Winter Session of Parliament has begun, and Prime Minister Narendra Modi has urged the Opposition to adopt a constructive role instead of creating disruptions. Modi emphasized that “there should be delivery, not drama,” highlighting the need for meaningful debates, policy discussions, and productive parliamentary sessions. With important bills and national issues on the agenda, the Winter Session is crucial for governance, accountability, and India’s democratic functioning. Keywords: PM Modi, Winter Session Parliament, Opposition role, Indian politics, constructive debate, Parliament session.

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