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हर की पौड़ी पर कार्तिक पूर्णिमा स्नान: आस्था, श्रद्धा और गंगा तट का अद्भुत दृश्य!

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AIN NEWS 1: हरिद्वार के पवित्र घाटों पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह की पहली किरण के साथ ही हर की पौड़ी और आसपास के घाटों पर आस्था की डुबकी लगाने वालों की लंबी कतारें दिखाई दीं। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते देश के कोने-कोने से श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं।

गंगा तट पर चारों ओर भक्ति का अद्भुत माहौल नजर आ रहा था। कोई मंत्रोच्चारण में लीन था, तो कोई दीपदान कर पुण्य अर्जित कर रहा था। महिलाओं ने रंगीन चुनरियां ओढ़े, हाथों में थाल सजाकर गंगा मैया की आराधना की। घाटों पर गूंजते “हर-हर गंगे” और “जय मां गंगे” के नारे वातावरण को पवित्र बना रहे थे।

हर की पौड़ी के विहंगम दृश्य को देखने के लिए पर्यटक और फोटोग्राफर भी बड़ी संख्या में पहुंचे। गंगा आरती के समय दीपों की लौ से चमकती लहरें मानो आकाश के तारों को पृथ्वी पर उतार लाई हों। श्रद्धालुओं के चेहरे पर श्रद्धा और विश्वास की अद्भुत झलक दिखाई दी।

कार्तिक पूर्णिमा का यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष का सबसे पवित्र स्नान पर्व माना जाता है। इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती जैसे पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार धारण किया था। इसलिए यह दिन विष्णु भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।

हरिद्वार प्रशासन ने इस पर्व को देखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की थीं। घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए, एनडीआरएफ की टीम तैनात रही और श्रद्धालुओं को सुगमता से स्नान की सुविधा मिल सके इसके लिए अतिरिक्त बैरिकेडिंग और प्रकाश व्यवस्था की गई। सफाईकर्मी लगातार घाटों की सफाई में जुटे रहे ताकि गंगा का सौंदर्य और स्वच्छता बनी रहे।

पर्व के दौरान श्रद्धालुओं ने न केवल स्नान किया, बल्कि गंगा तट पर गरीबों को अन्नदान और वस्त्रदान भी किया। कई संस्थाओं ने भंडारे लगाए और प्रसाद वितरण किया। हर की पौड़ी के आस-पास के बाजार भी दीपों, फूलों और पूजा सामग्री से सजे हुए थे।

शाम होते-होते जब सूर्य अस्त हुआ, तो घाटों पर दीपदान का अद्भुत नजारा देखने लायक था। गंगा में तैरते हजारों दीप जल की लहरों के साथ झिलमिला रहे थे। यह दृश्य हर श्रद्धालु के मन को शांति और सुकून देने वाला था।

हरिद्वार में कार्तिक पूर्णिमा के इस अवसर पर श्रद्धा, संस्कृति और अध्यात्म का ऐसा संगम देखने को मिला, जो हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। गंगा तट पर डुबकी लगाने वाले हर श्रद्धालु के चेहरे पर आत्मिक संतोष की झलक थी — मानो उन्होंने अपने भीतर की नकारात्मकता को गंगा की पवित्र धाराओं में बहा दिया हो।

सच कहा जाए तो कार्तिक पूर्णिमा का पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई में बसी आस्था का प्रतीक है — जहां विश्वास, भक्ति और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

On the occasion of Kartik Purnima, thousands of devotees gathered at Har Ki Pauri in Haridwar to take a holy dip in the River Ganga. The sight of countless lamps floating on the river, chants of “Har Har Gange”, and the devotion-filled atmosphere created a divine experience. The festival holds great significance in Hindu tradition, symbolizing purification, faith, and spirituality. Haridwar Kartik Purnima Snan is one of the most sacred bathing events, attracting pilgrims from across India.

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