100 साल की दादी को पालकी में बैठाकर हरिद्वार ले गया परिवार, गंगा स्नान के बाद 295 किलोमीटर पैदल लौट रहे शिवभक्त
AIN NEWS 1 पटियाला/हरिद्वार/सहारनपुर: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और आस्था का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान देशभर से लाखों शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं और हरिद्वार सहित विभिन्न तीर्थ स्थलों से गंगाजल लाकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। हर वर्ष कांवड़ यात्रा के दौरान कई प्रेरणादायक तस्वीरें सामने आती हैं, लेकिन इस बार पंजाब के एक परिवार ने अपनी अनूठी श्रद्धा और बुजुर्गों के प्रति सम्मान से पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया।
पंजाब के पटियाला जिले का एक शिवभक्त परिवार अपनी 100 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग दादी सुनहरी देवी को पालकी में बैठाकर हरिद्वार लेकर पहुंचा। परिवार ने पहले उन्हें विधि-विधान से गंगा स्नान कराया और इसके बाद उन्हें उसी पालकी में अपने कंधों पर उठाकर लगभग 295 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए वापस अपने घर की ओर रवाना हो गया। यह अनोखी कांवड़ यात्रा जहां-जहां से गुजर रही है, वहां लोग इसे देखने के लिए रुक रहे हैं और परिवार की इस भावना की सराहना कर रहे हैं।

दादी की इच्छा पूरी करने का लिया संकल्प
परिवार के सदस्य बताते हैं कि उनकी दादी सुनहरी देवी लंबे समय से हरिद्वार जाकर गंगा स्नान करने की इच्छा रखती थीं। हालांकि, अधिक उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उनके लिए इतनी लंबी यात्रा करना संभव नहीं था। ऐसे में परिवार ने फैसला किया कि इस बार कांवड़ यात्रा के दौरान दादी को पालकी में बैठाकर हरिद्वार ले जाया जाएगा, ताकि उनकी वर्षों पुरानी इच्छा पूरी हो सके।
परिवार का कहना है कि यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि अपनी दादी के प्रति सम्मान, सेवा और भगवान शिव के प्रति आस्था का प्रतीक है।
हर साल करते हैं कांवड़ यात्रा
दादी के पोते जोगिंदर कुमार ने बताया कि उनका परिवार कई वर्षों से नियमित रूप से कांवड़ यात्रा करता आ रहा है। हर साल पूरा परिवार भगवान शिव की आराधना के लिए हरिद्वार पहुंचता है। इस बार उन्होंने भगवान भोलेनाथ के प्रति आभार व्यक्त करने और अपनी दादी को तीर्थ कराने का संकल्प लिया।
उन्होंने कहा कि परिवार के सभी सदस्यों ने मिलकर यह निर्णय लिया कि दादी को किसी वाहन से नहीं, बल्कि पालकी में अपने कंधों पर बैठाकर यात्रा कराई जाएगी, जिससे सेवा और श्रद्धा दोनों का भाव बना रहे।
पूरा परिवार बना यात्रा का हिस्सा
इस विशेष यात्रा में परिवार के कई सदस्य शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यात्रा में:
7 पोते
6 पड़पोते
5 पोतियां
3 पड़पोतियां
2 बेटियां
1 नाती
शामिल हैं। यात्रा के दौरान सभी सदस्य बारी-बारी से पालकी उठाते हैं, जिससे किसी एक व्यक्ति पर अधिक शारीरिक भार नहीं पड़ता। परिवार के युवा सदस्य, महिलाएं और बुजुर्ग सभी इस धार्मिक यात्रा में अपनी-अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
हरिद्वार में कराया गंगा स्नान
परिवार सबसे पहले हरिद्वार पहुंचा, जहां सुनहरी देवी ने गंगा में स्नान किया। इसके बाद उन्होंने भगवान शिव की पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। धार्मिक अनुष्ठान पूरा होने के बाद परिवार ने पैदल ही वापस पटियाला लौटने की यात्रा शुरू की।
सहारनपुर में लोगों ने किया स्वागत
जब यह अनोखी कांवड़ यात्रा उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से होकर गुजरी तो राह चलते लोगों की नजरें इस पालकी पर टिक गईं। बड़ी संख्या में लोगों ने यात्रा को देखा, परिवार का उत्साह बढ़ाया और कई लोगों ने उनके साथ तस्वीरें और वीडियो भी बनाए।
सोशल मीडिया पर भी इस यात्रा की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। कई लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों के सम्मान और पारिवारिक एकता का शानदार उदाहरण बताया है।
श्रद्धा के साथ सेवा का संदेश
कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सेवा, अनुशासन और समर्पण का भी प्रतीक मानी जाती है। इस परिवार ने अपनी दादी को पालकी में बैठाकर यह संदेश दिया है कि यदि परिवार साथ खड़ा हो तो उम्र और शारीरिक कमजोरी भी किसी की धार्मिक आस्था के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती।
आज के समय में जब संयुक्त परिवारों की संख्या लगातार कम होती जा रही है, ऐसे में यह घटना समाज को यह संदेश देती है कि बुजुर्गों का सम्मान और उनकी इच्छाओं का सम्मान करना हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने की सराहना
जैसे ही इस यात्रा के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, लोगों ने परिवार की जमकर तारीफ की। कई लोगों ने इसे “श्रवण कुमार की परंपरा” से जोड़ते हुए कहा कि आज भी ऐसे परिवार मौजूद हैं जो अपने बुजुर्गों की सेवा को सबसे बड़ा धर्म मानते हैं।
हालांकि कुछ लोगों ने इतनी लंबी पैदल यात्रा को लेकर दादी की सेहत की चिंता भी जताई, लेकिन परिवार का कहना है कि पूरी यात्रा के दौरान उनकी देखभाल की जा रही है और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता भी उपलब्ध है।
मीडिया रिपोर्टों में हुई पुष्टि
इस घटना को कई समाचार माध्यमों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह घटना वास्तविक है और पंजाब के पटियाला निवासी परिवार द्वारा अपनी 100 वर्ष से अधिक आयु की दादी सुनहरी देवी को पालकी में बैठाकर हरिद्वार ले जाने और गंगा स्नान कराने की पुष्टि की गई है। किसी विश्वसनीय फैक्ट-चेक संस्था ने इस दावे को फर्जी नहीं बताया है।
सावन के पावन महीने में पंजाब के इस परिवार ने जिस तरह अपनी 100 वर्ष से अधिक उम्र की दादी सुनहरी देवी को पालकी में बैठाकर हरिद्वार पहुंचाया और गंगा स्नान कराने के बाद लगभग 295 किलोमीटर पैदल वापस अपने घर की ओर यात्रा शुरू की, वह केवल धार्मिक आस्था का उदाहरण नहीं है, बल्कि भारतीय पारिवारिक संस्कार, बुजुर्गों के सम्मान और सेवा-भाव की एक प्रेरणादायक मिसाल भी है। यह यात्रा यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं होती, बल्कि अपने माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा भी ईश्वर की सबसे बड़ी आराधना मानी जाती है।
A heartwarming story from Kanwar Yatra 2026 has captured national attention as a Punjab family carried their 100-year-old grandmother Sunhari Devi in a traditional palanquin to Haridwar for Ganga Snan. After completing the holy ritual, the family is walking nearly 295 kilometers back to Patiala, taking turns carrying her on their shoulders. This inspiring journey highlights Indian family values, devotion to Lord Shiva, Kanwar pilgrimage, Haridwar news, Sawan 2026, and respect for elders, making it one of the most talked-about human-interest stories of the season.



















