AIN NEWS 1: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर सीमा पर तनाव चरम पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच सैकड़ों किलोमीटर लंबी दुरंड रेखा (Durand Line) पर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक, तालिबान बलों ने पाकिस्तान सेना पर भीषण हमला करते हुए 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और सीमा के पास 25 सैन्य चौकियों पर कब्जा कर लिया है।

यह झड़प कंधार और खैबर पख्तूनख्वा के बीच स्थित सीमावर्ती इलाकों में हुई, जहाँ लंबे समय से तनाव बना हुआ है। तालिबान सरकार ने दावा किया है कि यह कार्रवाई पाकिस्तानी गोलाबारी और सीमा पार दखल के जवाब में की गई है। वहीं, पाकिस्तान सरकार ने तालिबान के दावे को खारिज करते हुए इसे “अफवाह और प्रचार” बताया है।
सीमा पर हिंसा क्यों बढ़ी?
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच दुरंड रेखा को लेकर विवाद दशकों पुराना है। यह सीमा 1893 में ब्रिटिश शासनकाल में खींची गई थी, जिसे अफगान सरकार कभी भी औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं कर पाई। तालिबान के सत्ता में आने के बाद से यह विवाद और भी गहरा गया है।
पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी (तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के उग्रवादी अफगानिस्तान की धरती से पाकिस्तान पर हमले कर रहे हैं। पाकिस्तान कई बार तालिबान सरकार से इस पर रोक लगाने की मांग कर चुका है, लेकिन उसे कोई ठोस जवाब नहीं मिला।
दूसरी ओर, तालिबान का आरोप है कि पाकिस्तान लगातार सीमा पर अवैध बाड़ लगाकर अफगान इलाके पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। यही वजह है कि दोनों देशों की सीमाओं पर आए दिन गोलीबारी और झड़पें होती रहती हैं।
ताजा हमले की घटनाएं
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, तालिबान लड़ाकों ने स्पिन बोल्डक और तुर्कहम इलाकों में पाकिस्तानी चेकपोस्ट्स को निशाना बनाया। इन हमलों में भारी हथियारों और रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल हुआ। तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने एक बयान जारी कर कहा —
“हमने पाकिस्तान की आक्रामकता का जवाब दिया है। हमारी सेना ने 25 चौकियों पर कब्जा कर लिया है और 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है। यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई।”
वहीं, पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने इस दावे को गलत बताते हुए कहा कि अफगान पक्ष से हुई गोलीबारी में कुछ सैनिक घायल हुए हैं, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर नुकसान की खबरें “बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जा रही हैं।”
अंतरराष्ट्रीय चिंता
अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते संघर्ष ने पड़ोसी देशों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र और कई पश्चिमी देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
भारत ने भी इस स्थिति पर नजर रखी है क्योंकि यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। अगर यह संघर्ष जारी रहा तो दक्षिण एशिया में स्थिरता पर गहरा असर पड़ सकता है।
तालिबान की रणनीति और पाकिस्तान की मुश्किलें
तालिबान सरकार के इस रुख से पाकिस्तान को बड़ी रणनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। एक समय तालिबान को इस्लामाबाद का “करीबी सहयोगी” माना जाता था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं।
पाकिस्तान ने 2021 में तालिबान की सत्ता वापसी का स्वागत किया था, लेकिन अब वही समूह उसके खिलाफ हथियार उठा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि तालिबान अब स्वतंत्र शक्ति के रूप में उभरना चाहता है और पाकिस्तान के “निर्देशों” को मानने से इंकार कर रहा है।
दूसरी ओर, पाकिस्तान को डर है कि अगर अफगान तालिबान ने टीटीपी को खुली छूट दी, तो उसके उत्तरी और पश्चिमी इलाकों में आतंकवाद फिर से सिर उठा सकता है।
सीमा पार संघर्ष का असर आम लोगों पर
सीमा के दोनों ओर रहने वाले नागरिक सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। इन इलाकों में रहने वाले परिवारों को बार-बार विस्थापन झेलना पड़ रहा है। व्यापार, खेती और रोजमर्रा की जिंदगी ठप हो गई है।
कई रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि सैकड़ों लोग सुरक्षित इलाकों की ओर पलायन कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष और तेज़ हो सकता है।
शांति की उम्मीद कब?
वर्तमान हालात में ऐसा लगता है कि दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना बहुत कम है। तालिबान की सरकार किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव में आने को तैयार नहीं है, जबकि पाकिस्तान अब अपनी सुरक्षा नीति को सख्त कर रहा है।
हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर चीन या कतर जैसे देश मध्यस्थता करें, तो दोनों पक्षों के बीच तनाव कम हो सकता है। लेकिन अभी हालात बेहद नाजुक हैं।
Tensions between Afghanistan and Pakistan have reached a critical point as the Taliban claims to have killed 58 Pakistani soldiers and seized 25 border outposts near the Durand Line. This escalating border conflict highlights the deteriorating Afghanistan-Pakistan relations, rooted in disputes over the Durand Line, Taliban’s growing assertiveness, and Pakistan’s security challenges from TTP militants. The situation has drawn global concern as it threatens South Asian regional stability and border security.


















