AIN NEWS 1: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में हैं। इस बार उन्होंने एक टीवी डिबेट के दौरान ऐसा बयान दे दिया जिसने पूरे देश में राजनीतिक हलचल मचा दी है। मसूद ने शहीद भगत सिंह की तुलना हमास संगठन से कर दी — जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकी संगठन घोषित किया जा चुका है।
दरअसल, एक टीवी कार्यक्रम में जब पत्रकार सुशांत सिन्हा ने चर्चा के दौरान कहा कि “हमास एक आतंकवादी संगठन है,” तो इमरान मसूद भड़क गए। उन्होंने तुरंत बीच में रोकते हुए कहा, “अरे आप क्या बात कर रहे हैं? क्या भगत सिंह भी आतंकवादी थे?”
इस टिप्पणी ने माहौल को और गरमा दिया। सुशांत सिन्हा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और पूछा कि क्या भगत सिंह जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी की तुलना किसी आतंकी संगठन से की जा सकती है?
लेकिन इमरान मसूद ने अपने बयान को सही ठहराते हुए कहा —
“हां बिल्कुल सही कह रहा हूं। वे (हमास) अपनी जमीन के लिए लड़ रहे हैं, और भगत सिंह भी अपनी जमीन के लिए लड़े थे। भगत सिंह भी अपनी मिट्टी के लिए शहीद हुए थे।”
इमरान मसूद के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। ट्विटर (X) से लेकर फेसबुक और यूट्यूब तक, हर जगह उनके बयान की आलोचना हो रही है।
बयान पर मचा बवाल
इमरान मसूद का यह बयान आते ही सोशल मीडिया पर #ImranMasood और #BhagatSingh जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई यूज़र्स ने मसूद पर देशभक्तों का अपमान करने का आरोप लगाया। कुछ ने कहा कि यह बयान “कांग्रेस की मानसिकता” को दर्शाता है, जबकि कुछ लोगों ने इसे “भ्रमित तुलना” बताया।
भाजपा नेताओं ने भी मसूद को घेरते हुए कहा कि उन्होंने देश के महान शहीद का अपमान किया है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि भगत सिंह ने भारत की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर किए थे, जबकि हमास निर्दोष नागरिकों पर हमले करता है।
वहीं कांग्रेस पार्टी ने इस पर कोई औपचारिक बयान नहीं दिया, लेकिन अंदरखाने यह चर्चा जरूर है कि मसूद के बयान से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है।
भगत सिंह और हमास: तुलना पर सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भगत सिंह और हमास की तुलना करना न केवल गलत है, बल्कि इतिहास की ग़लत व्याख्या भी है।
भगत सिंह ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि एक साम्राज्यवादी शासन के खिलाफ आवाज़ उठाई थी। उनके आदर्श समाजवाद और इंसाफ़ पर आधारित थे।
वहीं हमास एक ऐसा संगठन है जिसे अमेरिका, यूरोपीय संघ, भारत और कई अन्य देशों ने आतंकी संगठन घोषित किया हुआ है। इसके खिलाफ आरोप हैं कि यह नागरिकों पर रॉकेट हमले करता है और निर्दोषों की जान लेता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी तुलना करना न केवल शहीदों का अपमान है, बल्कि इससे आतंकवाद को वैचारिक समर्थन भी मिल सकता है।
इमरान मसूद के पुराने विवादित बयान
यह पहली बार नहीं है जब इमरान मसूद अपने बयानों से विवादों में आए हों। वे इससे पहले भी कई बार हिंदुत्व, मोदी सरकार, और धर्म से जुड़े मुद्दों पर तीखी और विवादित बातें कह चुके हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय मसूद को एक बेबाक नेता माना जाता है, लेकिन उनके कई बयान कांग्रेस के लिए सिरदर्द साबित हुए हैं। पार्टी नेतृत्व को कई बार उनके बयानों पर सफाई देनी पड़ी है।
टीवी डिबेट का माहौल और जनता की प्रतिक्रिया
डिबेट के दौरान मसूद और सुशांत सिन्हा के बीच बहस काफी गर्म हो गई थी। सुशांत सिन्हा बार-बार यह कहते दिखे कि “आप आतंकवादी संगठन की तुलना शहीदों से नहीं कर सकते।”
सोशल मीडिया पर लोगों ने सुशांत सिन्हा के इस रुख की सराहना की और कहा कि मीडिया को ऐसे वक्ताओं को चुनौती देनी चाहिए जो ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं।
वहीं इमरान मसूद के समर्थकों ने यह दलील दी कि मसूद का इरादा तुलना करने का नहीं था, बल्कि वे “संघर्ष की भावना” की बात कर रहे थे।
देशभक्ति बनाम राजनीति की बहस
यह घटना फिर एक बार उस बहस को ज़िंदा कर देती है जिसमें सवाल उठता है — क्या राजनीतिक बयानबाजी में देशभक्तों का नाम जोड़ना सही है?
राजनीतिक विशेषज्ञ कहते हैं कि भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, सुभाष चंद्र बोस जैसे शहीदों के नाम पर राजनीतिक विमर्श करना गलत दिशा में ले जा सकता है।
इतिहासकारों के मुताबिक, भगत सिंह का संघर्ष आज़ादी, समानता और न्याय के लिए था, न कि किसी धार्मिक या क्षेत्रीय संगठन के पक्ष में। उनकी विचारधारा आधुनिक भारत की बुनियाद है, और उसे किसी आतंकवादी गतिविधि से जोड़ना असंवेदनशील है।
इमरान मसूद के बयान ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि राजनीति में शब्दों की अहमियत कितनी बड़ी होती है। एक गलत तुलना या टिप्पणी न केवल विवाद खड़ा कर सकती है बल्कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की गरिमा को भी ठेस पहुंचा सकती है।
जहां एक ओर देश के नागरिक भगत सिंह को एक राष्ट्रीय नायक के रूप में पूजते हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें किसी भी तरह आतंकवाद या हिंसा से जोड़ना देश की आत्मा को आहत करता है।
राजनीति में विचारों की बहस जरूरी है, लेकिन देशभक्ति और आतंकवाद के बीच की रेखा को समझना और उसका सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है।
Congress MP Imran Masood has stirred massive controversy by comparing Hamas with Bhagat Singh during a live TV debate. When journalist Sushant Sinha called Hamas a terrorist organization, Masood reacted angrily and said, “Was Bhagat Singh also a terrorist?” The remark has gone viral, triggering outrage across India. Political leaders and social media users slammed the Congress MP for drawing a Hamas-Bhagat Singh comparison, calling it disrespectful to India’s national hero.


















