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मेरठ में दूसरे दिन भी चला बुलडोजर, सेंट्रल मार्केट का अवैध कॉम्प्लेक्स मलबे में तब्दील!

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AIN NEWS 1: मेरठ में शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट पर रविवार को भी प्रशासन की कार्रवाई जारी रही। शनिवार को जहां कॉम्प्लेक्स के पिछले हिस्से को पूरी तरह गिरा दिया गया था, वहीं रविवार को अधूरे बचे हिस्सों पर बुलडोजर चला। सुबह 10 बजे से आवास एवं विकास परिषद और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई।

मौके पर मलबे और अधूरी दीवारों पर पहले पानी का छिड़काव किया गया ताकि धूल उड़ने से आसपास का इलाका प्रभावित न हो। उसके बाद परिषद अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और फिर इमारत को पूरी तरह ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी। पूरे परिसर को चारों ओर से सील कर दिया गया और किसी भी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।

तीसरे दशक तक पहुंचा अवैध निर्माण का विवाद

इस मार्केट का निर्माण करीब 35 साल पहले, वर्ष 1990 में शुरू हुआ था। शास्त्रीनगर सेक्टर-6 का यह सेंट्रल मार्केट उस समय मेरठ के मशहूर आबूलेन मार्केट को टक्कर देने के लिए बनाया गया था। हालांकि शुरुआत में उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद (UP Awas Vikas Parishad) ने यहां केवल 48 भूखंडों को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए स्वीकृत किया था।

लेकिन धीरे-धीरे लोगों ने नियमों को दरकिनार कर आवासीय प्लॉटों में भी दुकानें और कॉम्प्लेक्स खड़े कर दिए। वर्ष 2000 के बाद स्थिति यह हो गई कि लगभग 99 आवासीय भवन पूरी तरह से व्यावसायिक उपयोग में बदल गए। अब यहां बड़ी संख्या में दुकानों, शो-रूमों और छोटे होटलों का संचालन किया जा रहा था।

परिषद के मुताबिक सेक्टर-6 में कुल 754 आवासीय संपत्तियां हैं, जिनमें से केवल 607 संपत्तियां ही वैध भू-उपयोग में पाई गईं। बाकी में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थीं, जो योजना के नियमों का उल्लंघन था.

आवास योजनाओं की आड़ में हुआ था नियमों का उल्लंघन

शास्त्रीनगर की यह योजना उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की दो प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत आती है — गृहस्थानम योजना नंबर 3 (1978) और स्कीम नंबर 7 (1983-84)। इन योजनाओं में सेक्टर 1 से 13 तक का क्षेत्र शामिल था। परिषद ने इसमें नागरिकों की सुविधा के लिए सीमित संख्या में दुकानों और मार्केट स्पेस की अनुमति दी थी।

लेकिन समय के साथ व्यावसायिक लालच बढ़ता गया। कई लोगों ने अपने घरों का भू-उपयोग बदलकर उनमें अवैध रूप से दुकानें, गोडाउन और शोरूम खोल लिए। इसी कारण सेंट्रल मार्केट धीरे-धीरे एक अवैध व्यावसायिक हब बन गया, जिसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई लंबे समय से टलती रही।

आंसुओं और सन्नाटे के बीच गूंजता बुलडोजर

शनिवार और रविवार को हुए इस बुलडोजर एक्शन के दौरान सेंट्रल मार्केट का माहौल बेहद भावुक रहा। कई दुकानदार और कर्मचारी अपनी दुकानों के सामने खड़े होकर रोते दिखाई दिए। कुछ व्यापारी वहीं जमीन पर बैठकर मलबे में तब्दील होते अपने जीवन की कमाई को देखते रहे।

व्यापारी मनोज और रमेश, जो पिछले 15 सालों से एक दुकान में काम करते थे, ने बताया कि उनकी रोजी-रोटी पूरी तरह खत्म हो गई। उन्होंने कहा — “हमारा सब कुछ यहीं से चलता था, अब न दुकान रही, न नौकरी। आगे कैसे जियेंगे, यह सोचकर ही डर लग रहा है।”

करीब 30 साल से इस मार्केट में व्यापार कर रहे कई दुकानदारों ने कहा कि यह सिर्फ इमारत नहीं थी, बल्कि उनकी पूरी जिंदगी की मेहनत थी। एक अन्य व्यापारी ने कहा — “हमने यहां अपनी पूरी पूंजी लगा दी थी। अब यह सब कुछ खत्म हो गया। बूढ़े हो चुके हैं, अब नई शुरुआत कैसे करेंगे?”

कानूनी लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट का आदेश

इस पूरे विवाद का मामला कई सालों से अदालत में चल रहा था। व्यापारियों ने उच्च न्यायालय और बाद में सुप्रीम कोर्ट तक जाकर ध्वस्तीकरण रोकने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि अवैध निर्माण को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही मेरठ प्रशासन और आवास परिषद ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए इस मार्केट को गिराने का निर्णय लिया। परिषद के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई और किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

बचा खुचा कॉम्प्लेक्स भी ध्वस्त

शनिवार को जहां कॉम्प्लेक्स का पिछला हिस्सा पूरी तरह गिरा दिया गया था, वहीं रविवार को बचा हुआ ढांचा भी जमींदोज कर दिया गया। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए आसपास के रास्तों को सील कर दिया था और भीड़ को दूर रखने के लिए पुलिसकर्मी तैनात रहे।

टीम ने बुलडोजर चलाने से पहले क्षेत्र में पानी का छिड़काव किया और मलबा हटाने का काम तेजी से शुरू कराया। अधिकारियों ने बताया कि कुछ दिनों के भीतर मलबा साफ कर दिया जाएगा और इस क्षेत्र को पुनः नियमानुसार विकसित किया जाएगा।

आगे की कार्रवाई

आवास एवं विकास परिषद ने संकेत दिया है कि शास्त्रीनगर समेत अन्य योजनाओं में भी अवैध निर्माणों की जांच की जाएगी। जिन भवनों में भू-उपयोग परिवर्तन नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां भी इसी तरह की कार्रवाई की जा सकती है।

अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में किसी भी अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और शहर को नियोजित रूप से विकसित करने की दिशा में सख्त कदम उठाए जाएंगे।

Meerut bulldozer action continues for the second consecutive day in Shastri Nagar’s Central Market. The UP Awas Vikas Parishad and local administration demolished the remaining illegal complex amid heavy police deployment. The demolition, carried out under Supreme Court orders, marks the end of a 35-year-old illegal commercial hub. Traders and workers expressed deep grief over losing their livelihood, as the Meerut illegal complex demolition drives continue under strict legal supervision.

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