AIN NEWS 1: गाजियाबाद की राजनीति में रविवार का दिन कई लोगों के लिए यादगार बन गया। अक्सर राजनीति में कुछ पल ऐसे होते हैं जिन्हें लोग सालों तक याद रखते हैं और जिन्हें नेता अपने व्यक्तिगत सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिनते हैं। ऐसा ही एक दुर्लभ पल तब सामने आया जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद के भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल को अपने साथ कार में बैठाया और पूरा काफिला हिंडन एयरपोर्ट की ओर रवाना हुआ।
यह दृश्य न केवल वहां मौजूद कार्यकर्ताओं के लिए खास था, बल्कि पूरे संगठन के लिए भी एक मजबूत संदेश का प्रतीक बन गया। भाजपा के संगठनात्मक इतिहास में यह वाकया बेहद कम देखा गया है कि किसी मुख्यमंत्री ने किसी महानगर अध्यक्ष को अपने साथ कार में बैठाकर कार्यक्रम स्थल तक ले जाने का सम्मान दिया हो।
🔶 कार्यक्रम में आया भावुक और रोचक क्षण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष सतेंद्र सिसौदिया के पुत्र के विवाह समारोह में शामिल होने गाजियाबाद पहुँचे थे। जब वे पुलिस लाइन पहुँचे तो भाजपा के विभिन्न जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। मयंक गोयल ने भी मुख्यमंत्री का अभिवादन किया और सभी नेता विवाह स्थल की ओर रवाना हुए।
विवाह समारोह के बाद जब मुख्यमंत्री वापस लखनऊ के लिए निकलने वाले थे, तभी सबसे अनोखा पल आया। योगी आदित्यनाथ ने भीड़ के बीच से मयंक गोयल को अपने पास बुलाया और उन्हें अपनी ही कार में साथ बैठने का संकेत दिया। यह पल न केवल अप्रत्याशित था, बल्कि पूरे माहौल में उत्साह पैदा करने वाला था।
🔶 हिंडन एयरपोर्ट तक मुख्यमंत्री की कार में साथ रहे मयंक गोयल
मुख्यमंत्री का काफिला पुलिस लाइन से निकलता हुआ यूपी गेट पहुँचा। वहाँ से पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बीच काफिला एलिवेटेड रोड से होकर हिंडन एयरपोर्ट की ओर बढ़ता गया। इस पूरे सफर में मयंक गोयल मुख्यमंत्री की कार में उनके साथ बैठे रहे।
यह यात्रा भले ही कुछ किलोमीटर की हो, लेकिन संगठन के लिहाज से इसका महत्व बेहद बड़ा माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह सम्मान अपने आप में एक बड़ा संदेश है—कि भाजपा में संगठन सर्वोपरि है और मुख्यमंत्री ने इसे अपने व्यवहार से साबित भी किया।
🔶 संगठन को सर्वोच्च बताने वाला संकेत
योगी आदित्यनाथ अक्सर यह संदेश देते रहे हैं कि सरकार और संगठन दोनों एक-दूसरे से जुड़े हैं, लेकिन संगठन हमेशा प्राथमिकता में होता है। मयंक गोयल को अपने साथ ले जाना इसी सिद्धांत की पुष्टि जैसा दिखा। मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि संगठन में मेहनत करने वाले और जमीनी स्तर से जुड़े कार्यकर्ताओं को हमेशा सम्मान मिलता है।
मयंक गोयल लंबे समय से भाजपा और संघ की विचारधारा से जुड़े रहे हैं। उनका परिवार भी वर्षों से संघ की पृष्ठभूमि से आता है। उनका रहन-सहन, विचार और कार्यशैली हमेशा से संगठन के अनुरूप रही है। यही कारण है कि जब मुख्यमंत्री ने उन्हें अपने साथ कार में बैठाया, तो पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह और गर्व का माहौल देखा गया।
🔶 आने वाले संगठनात्मक चुनावों से पहले बड़ा संदेश
कुछ ही दिनों में भाजपा संगठन के विभिन्न स्तरों पर नई नियुक्तियाँ और चुनाव होने हैं। ऐसे समय में मुख्यमंत्री का यह कदम अपने आप में राजनीतिक महत्व रखता है। इससे यह संदेश गया है कि मयंक गोयल की संगठन में भूमिका मजबूत और भरोसेमंद है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक कई चेहरे बदलने वाले हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के साथ मयंक गोयल की यह उपस्थिति एक तरह से सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे उनके राजनीतिक कद और प्रभाव को और मजबूती मिलती है।
🔶 कार्यकर्ताओं में दिखा भारी उत्साह
जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार में मयंक गोयल को बैठे देखा गया, तो कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर दौड़ गई। कई लोग इसे एक ऐतिहासिक पल बताते रहे। यह सम्मान न केवल मयंक गोयल की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उन सभी कार्यकर्ताओं की मेहनत का प्रतिफल भी है जो संगठन के लिए समर्पित रहते हैं।
कुल मिलाकर, रविवार का यह क्षण गाजियाबाद के राजनीतिक इतिहास में यादगार बन गया। मयंक गोयल के लिए यह बड़ी उपलब्धि है, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर अपने व्यवहार से संगठन की शक्ति और कार्यकर्ताओं के सम्मान को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है।
यह पल आने वाले समय में भाजपा संगठन और कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath created a remarkable moment in Ghaziabad politics when he invited BJP Metropolitan President Mayank Goyal to travel with him in his car to Hindon Airport. This rare gesture is being viewed as a major political achievement and a strong message about the importance of BJP organization, discipline, leadership bonding, and grassroots commitment in Uttar Pradesh politics.


















