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हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं बन सकता: विधानसभा में बोले सीएम योगी!

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की विधानसभा में एक महत्वपूर्ण विषय पर मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने अपनी स्पष्ट राय रखी। यह बयान उस विवाद के संदर्भ में आया, जो Swami Avimukteshwaranand से जुड़ा हुआ है।

सीएम योगी ने इस पूरे मामले पर पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखते हुए परंपरा, धार्मिक मर्यादा और कानून व्यवस्था के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सनातन परंपरा में शंकराचार्य पद कोई साधारण पद नहीं है और इसे पाने के लिए कठोर नियमों और स्थापित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।

परंपरा से तय होती है पात्रता

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आदि जगद्गुरु Adi Shankaracharya का उल्लेख करते हुए कहा कि शंकराचार्य पद की स्थापना एक सुव्यवस्थित परंपरा के तहत हुई थी। यह कोई ऐसा पद नहीं है, जिसे कोई भी व्यक्ति स्वयं घोषित कर ले।

उन्होंने समझाया कि जिस पीठ के लिए जिस व्यक्ति को चुना जाना है, उसके ज्ञान, साधना और शास्त्रीय योग्यता की गहन जांच की जाती है। यह प्रक्रिया विद्वानों की परिषद यानी विद्वत परिषद द्वारा पूरी की जाती है।

आज की भाषा में इसे एक तरह से ‘थीसिस’ या शोध कार्य की स्वीकृति जैसा माना जा सकता है। जब तक विद्वान यह सुनिश्चित नहीं कर लेते कि संबंधित व्यक्ति उस पद के योग्य है, तब तक उसे मान्यता नहीं मिलती।

विद्वत परिषद की भूमिका

सीएम योगी ने कहा कि किसी भी पीठ पर आसीन होने से पहले उम्मीदवार के मंत्र, भाष्य और वैदिक अध्ययन को विद्वत परिषद द्वारा अनुमोदित किया जाता है।

यह केवल औपचारिकता नहीं होती, बल्कि एक गहन परीक्षण की प्रक्रिया होती है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि जो व्यक्ति उस पीठ की जिम्मेदारी संभालने जा रहा है, वह शास्त्रों का ज्ञाता हो, परंपरा का सम्मान करता हो और समाज को सही दिशा देने में सक्षम हो।

जब परिषद की स्वीकृति मिल जाती है, तब अभिषेक की विधि पूरी होती है और उसके बाद संबंधित परंपरा द्वारा उसे मान्यता प्रदान की जाती है।

“हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं बन सकता”

मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं बन सकता।

उन्होंने कहा कि यह पद एक आध्यात्मिक उत्तरदायित्व है, कोई राजनीतिक या सामाजिक पद नहीं। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को शंकराचार्य घोषित कर ले या बिना परंपरागत स्वीकृति के किसी पीठ का दावा करे, तो इससे धार्मिक वातावरण प्रभावित हो सकता है।

उनका कहना था कि हर पीठ की अपनी मर्यादा होती है और हर आचार्य की अपनी जिम्मेदारी। कोई भी व्यक्ति यदि उन मर्यादाओं को तोड़कर इधर-उधर जाकर बयानबाजी करता है या माहौल बिगाड़ने की कोशिश करता है, तो यह परंपरा के खिलाफ है।

मर्यादा और कानून व्यवस्था का संतुलन

सीएम योगी ने इस मुद्दे को केवल धार्मिक विवाद तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे कानून व्यवस्था से भी जोड़ा।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का दायित्व है कि वह धार्मिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखे और किसी भी तरह की अव्यवस्था या टकराव की स्थिति को रोके।

उनका संदेश साफ था कि धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान होगा, लेकिन उसके साथ-साथ कानून का पालन भी उतना ही आवश्यक है।

विवाद की पृष्ठभूमि

हाल के दिनों में शंकराचार्य पद को लेकर उठे विवादों ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया था। इसी संदर्भ में विधानसभा में यह विषय उठा और मुख्यमंत्री ने अपना पक्ष रखा।

उन्होंने यह संकेत दिया कि सरकार किसी विशेष व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह परंपरागत व्यवस्था की रक्षा के पक्ष में है।

धार्मिक संस्थाओं की गरिमा पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन धर्म की परंपराएं हजारों वर्षों से चली आ रही हैं। इन परंपराओं का संरक्षण और सम्मान करना हम सबकी जिम्मेदारी है।

उन्होंने यह भी कहा कि जब धार्मिक संस्थाएं अपनी मर्यादा में कार्य करती हैं, तो समाज में संतुलन और सद्भाव बना रहता है। लेकिन जब परंपरा से हटकर काम होता है, तो भ्रम और विवाद पैदा होते हैं।

राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट

हालांकि यह बयान धार्मिक संदर्भ में था, लेकिन इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। सीएम योगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि उत्तर प्रदेश में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या धार्मिक अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उनका संदेश यह भी था कि सरकार परंपरा और व्यवस्था दोनों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

विधानसभा में दिए गए इस बयान के जरिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया कि शंकराचार्य पद की गरिमा और परंपरा से समझौता नहीं किया जा सकता।

उन्होंने दो टूक कहा कि यह पद योग्यता, साधना और विद्वत स्वीकृति से मिलता है — स्वयं घोषणा से नहीं।

इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार धार्मिक संस्थाओं के मामलों में भी मर्यादा और नियमों को सर्वोपरि मानती है।

Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath addressed the Shankaracharya controversy linked to Swami Avimukteshwaranand in the Assembly, emphasizing that the position of Shankaracharya is governed by strict Hindu religious tradition, Vidvat Parishad approval, eligibility criteria, and established Peeth succession rules. He highlighted that not everyone can become a Shankaracharya and that religious discipline, tradition, and law and order must be maintained to preserve the sanctity of Hindu institutions in India.

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