Powered by : PIDIT KO NYAY ( RNI - UPBIL/25/A1914)

spot_imgspot_img

कूनो नेशनल पार्क में चीता वीरा के शावक की मौत: जंगल में छोड़े जाने के 24 घंटे बाद ही खत्म हुई मासूम जिंदगी!

spot_img

Date:

कूनो नेशनल पार्क में चीता वीरा के शावक की मौत: जंगल में छोड़े जाने के 24 घंटे बाद ही खत्म हुई मासूम जिंदगी

AIN NEWS 1: मध्य प्रदेश के श्योपुर ज़िले में स्थित कूनो नेशनल पार्क एक बार फिर चर्चा में है। अफ्रीकी चीता परियोजना के तहत यहां लाई गई मादा चीता ‘वीरा’ के दो शावकों में से एक की जंगल में मौत हो गई। सबसे हैरानी वाली बात यह है कि वीरा और उसके दोनों शावकों को जंगल में छोड़े जाने के सिर्फ 24 घंटे बाद ही यह दुखद घटना सामने आ गई।

यह घटना न केवल वन विभाग के लिए चिंता का विषय है, बल्कि देश में चल रही चीता पुनर्वास योजना पर भी सवाल खड़े करती है। आइए समझते हैं यह पूरा मामला आखिर क्या है और इस मौत ने विशेषज्ञों में क्यों हलचल मचा दी है।

वीरा और उसके शावकों को जंगल में क्यों छोड़ा गया?

कूनो में मौजूद अफ्रीकी चीतों को भारत के प्राकृतिक माहौल में ढलाने के लिए वन विभाग चरणबद्ध योजना पर काम कर रहा है। मादा चीता वीरा लंबे समय से एन्क्लोजर में रह रही थी। विशेषज्ञों ने उसकी सेहत, व्यवहार और शावकों की उम्र का आकलन करने के बाद उन्हें खुले जंगल में छोड़ने का फैसला लिया।

रिहाई का उद्देश्य था कि वीरा अपने शावकों को प्राकृतिक माहौल में खुद शिकार करना, छिपना और जंगल के नियम सिखा सके।

दुनिया भर में चीता संरक्षण परियोजनाओं में यह एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इसके साथ कुछ जोखिम हमेशा जुड़े रहते हैं।

सेशन जज को घसीटकर थाने ले जाने की धमकी; हाईकोर्ट ने DGP से पूछा- SP पर क्या हुआ एक्शन

सिर्फ 24 घंटे में ही आई बुरी खबर

खुले जंगल में छोड़े जाने के बाद वीरा अपने दोनों शावकों के साथ आगे बढ़ी। शुरुआती रिपोर्ट्स में सब कुछ सामान्य बताया गया था। लेकिन अगले ही दिन अचानक वन विभाग की टीम को एक शावक का शव मिला।

जांच के बाद पुष्टि हुई कि यह शावक प्राकृतिक चुनौतियों के कारण जीवित नहीं बच पाया।

हालांकि मौत का वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही साफ होगा, लेकिन प्रारंभिक अनुमान बताते हैं कि संभवतः कमजोरी, भूख, बारिश या जंगल के किसी अन्य शिकारी से सामना इसका कारण हो सकता है।

क्यों बढ़ जाती है खुले जंगल में शावकों की मुश्किल?

चीता शावकों की जीवित रहने की संभावना स्वाभाविक रूप से कम होती है।

अफ्रीका में भी 100 में से सिर्फ 10-20 शावक ही वयस्क होने तक सुरक्षित पहुँच पाते हैं। कारण कई हैं—

1️⃣ मौसम की कठिनाइयाँ

बारिश, ठंड, तेज धूप—इनसे बचने के लिए शुरुआत में मां को शावकों पर लगातार नजर रखनी पड़ती है।

2️⃣ अन्य शिकारी जानवर

जंगल में लोमड़ी, लकड़बग्घा, जंगली कुत्ते और तेंदुए जैसे जानवर हमेशा खतरा बने रहते हैं।

3️⃣ शावकों की शारीरिक कमजोरी

जन्म के कुछ महीनों तक शावक बेहद नाज़ुक होते हैं।

हल्का संक्रमण भी उनकी जान ले सकता है।

4️⃣ नए माहौल में ढलने की चुनौती

कूनो भारतीय जंगल है, अफ्रीकी नहीं।

इस माहौल की चुनौतियाँ अलग हैं।

क्या वन विभाग की गलती थी?

कुछ विशेषज्ञ कह रहे हैं कि शावकों की उम्र अभी थोड़ी और बढ़ने का इंतज़ार किया जा सकता था।

जबकि दूसरी राय है कि उन्हें जंगल में छोड़ना ज़रूरी था ताकि वे स्वाभाविक जीवन जी सकें और प्रोजेक्ट आगे बढ़ सके।

वन विभाग का कहना है:

वीरा पूरी तरह स्वस्थ थी

शावक ठीक से बढ़ रहे थे

सभी पैरामीटर सामान्य थे

इसलिए उन्हें जंगल में छोड़ना उचित लगा

अब इस घटना के बाद विभाग ने आसपास के इलाकों में गश्त और निगरानी बढ़ा दी है।

क्या कूनो में चीतों के लिए जोखिम ज्यादा है?

कूनो में पहले भी कई चीतों की मौतें हुई हैं—

कुछ बीमारी से, कुछ प्राकृतिक कारणों से और कुछ शावकों के कमजोर होने से।

विशेषज्ञ मानते हैं:

जंगल का क्षेत्र सीमित है

भोजन की पर्याप्त उपलब्धता भी एक चुनौती है

अन्य शिकारी भी मौजूद हैं

अत्यधिक गर्मी और मौसम भी जोखिम बढ़ाते हैं

कुछ वाइल्डलाइफ वैज्ञानिकों का सुझाव है कि भारत को एक से अधिक लोकेशन तैयार करनी चाहिए, ताकि चीतों का घनत्व ज्यादा न हो और जोखिम कम किया जा सके।

वीरा और दूसरा शावक अब कैसे हैं?

वन विभाग की टीम लगातार वीरा और उसके बचे हुए शावक की निगरानी कर रही है।

अभी तक यह जानकारी मिली है कि—

वीरा शांत और स्थिर दिखाई दे रही है

वह अपने दूसरे शावक की सुरक्षा में सतर्क है

मोबाइल टीम दूर से ही निगरानी कर रही है ताकि उन्हें तनाव ना हो

विभाग फिलहाल उन्हें फिर से एन्क्लोजर में ले जाने की योजना नहीं बना रहा है।

अगर कोई खतरा बढ़ता है तभी ऐसा कदम उठाया जाएगा।

देशभर में उठे सवाल

चीता प्रोजेक्ट शुरू होने से ही भारत भर में चर्चा और बहस तेज रही है।

अब इस घटना ने उसमें और आग जोड़ दी है।

लोग पूछ रहे हैं:

क्या कूनो चीतों के लिए सही जगह है?

क्या शावकों को जल्दबाज़ी में छोड़ा गया?

क्या पर्यवेक्षण में कमी रह गई?

क्या सरकार को नए स्थलों पर भी चीता शिफ्ट करने चाहिए?

यह सवाल महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह परियोजना कई वर्षों की प्लानिंग और भारी खर्च से तैयार हुई है।

आगे का रास्ता: क्या बदलाव ज़रूरी?

विशेषज्ञ अब यह कह रहे हैं कि—

शावकों को छोड़ने से पहले और समय दिया जाए

जंगल में शिकारी घनत्व की समीक्षा हो

कूनो के अलावा 2–3 अन्य पार्क भी तैयार किए जाएँ

मौसम और पर्यावरणीय स्टडी को प्राथमिकता दी जाए

सरकार की योजना भी अब चीतों के लिए वैकल्पिक स्थानों की तलाश पर जोर दे रही है।

चीता वीरा के शावक की मौत सिर्फ एक जानवर की मौत नहीं है, बल्कि यह भारत की चीता संरक्षण रणनीति की बड़ी चुनौती भी है।

एक ओर जहां यह कदम प्राकृतिक जीवन की ओर आगे बढ़ने का हिस्सा था, वहीं यह घटना यह याद दिलाती है कि वन्यजीवों की दुनिया बेहद संवेदनशील होती है और हर कदम सोचे-समझे तरीके से उठाना जरूरी है।

उम्मीद है कि बचा हुआ शावक स्वस्थ रहे और यह घटना प्रोजेक्ट से जुड़े विशेषज्ञों को रणनीति सुधारने का मौका देगी।

The recent cheetah cub death in Kuno National Park has raised major concerns about the India cheetah project and its wildlife management strategies. Female cheetah Veera and her cubs were released into the wild, but within 24 hours one cub died, highlighting challenges related to cheetah conservation, habitat management, predator threats, and climate conditions in Madhya Pradesh. This incident has renewed the debate about whether Kuno National Park is suitable for long-term cheetah rehabilitation and underscores the urgent need for improved monitoring, better habitat distribution, and a multi-park strategy to ensure the survival of the species in India.

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
haze
19.1 ° C
19.1 °
19.1 °
52 %
1.5kmh
71 %
Fri
20 °
Sat
27 °
Sun
29 °
Mon
30 °
Tue
30 °
Video thumbnail
Swati Maliwal on Arvind Kejriwal :पंजाब में चार्टड जेट से लेकर आलीशान महल में निवास करता है केजरीवाल
01:37
Video thumbnail
Akhilesh Yadav on Yogi Adityanath : उन्होंने अगर बाटी चोखा खाया तो प्रतिमा की तरह खड़ा होना पड़ेगा
01:02
Video thumbnail
#shorts #shortvideo
00:26
Video thumbnail
AKhilesh Yadav : अभी समय है इलेक्शन में, आप समय क्यों नहीं देना चाहते हैं?
01:32
Video thumbnail
सदन में सवाल पूछ रही थी कांग्रेस की महिला सांसद, हल्ला मचाने लगा पूरा विपक्ष, सभापति ने क्या कहा?
07:58
Video thumbnail
‘बार्डर 2’ देखकर भावुक हुईं अभिनेत्री श्वेता चौहान
02:43
Video thumbnail
Former Uttar Pradesh minister Madan Chauhan escapes assassination attempt in Hapur
06:06
Video thumbnail
मेरठ: धागा कारोबारी से 20 लाख वसूली केस में फंसे 2 दरोगा, 15 लाख
01:50
Video thumbnail
Yogi Adutyanath : क़यामत तक बाबरी मस्जिद नहीं बन पायेगी.बाबरी का सपना कभी पूरा नहीं होने देंगे।
02:42
Video thumbnail
Shadab Jakati FIR News: शादाब जकाती संग रील बनाने वाली चांदनी ने कराई रेप की FIR| Meerut | UP Police
09:58

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related

भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर पर पत्रकार को धमकी देने का आरोप, सुरक्षा और कार्रवाई की मांग!

भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर पर पत्रकार को धमकी देने...