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भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर पर पत्रकार को धमकी देने का आरोप, सुरक्षा और कार्रवाई की मांग!

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भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर पर पत्रकार को धमकी देने का आरोप, सुरक्षा और कार्रवाई की मांग

AIN NEWS 1: गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन (ट्रस्ट) ने पुलिस आयुक्त को एक औपचारिक शिकायत देकर आरोप लगाया है कि लोनी विधानसभा क्षेत्र से विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने वरिष्ठ पत्रकार आकाश गौड़ को फोन पर जान से मारने की धमकी दी है।

यह मामला 10 फरवरी 2026 का बताया जा रहा है, जब सुबह करीब 8:43 बजे विधायक की ओर से व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से पत्रकार आकाश गौड़ से संपर्क किया गया। शिकायत के अनुसार, यह बातचीत एक प्रकाशित खबर को लेकर हुई, जिससे विधायक नाराज थे।

15 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता

आकाश गौड़ पिछले लगभग 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वह गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र में रहते हैं और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। स्थानीय प्रशासनिक मामलों, सामाजिक समस्याओं और जनता की शिकायतों पर उनकी रिपोर्टिंग को गंभीरता से लिया जाता रहा है।

एसोसिएशन का कहना है कि आकाश गौड़ ने हमेशा तथ्यात्मक और निष्पक्ष रिपोर्टिंग की है। लेकिन हाल ही में प्रकाशित एक खबर के बाद उन्हें जिस तरह की धमकी मिली, उसने उनके और उनके परिवार के लिए भय का माहौल बना दिया है।

धमकी का आरोप क्या है?

शिकायत में कहा गया है कि विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने फोन पर बेहद आक्रामक भाषा का प्रयोग किया और कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दी। आरोप है कि उन्होंने कहा कि “जब मैं वापस आऊंगा तो देख लूंगा, अपनी जान बचानी है तो संभल जाओ।”

एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि इस तरह की भाषा न सिर्फ एक पत्रकार के लिए बल्कि पूरे लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरनाक संकेत है। यदि जनप्रतिनिधि ही आलोचना या सवाल उठाए जाने पर इस तरह की प्रतिक्रिया देंगे, तो स्वतंत्र पत्रकारिता कैसे सुरक्षित रह पाएगी?

परिवार भी महसूस कर रहा असुरक्षा

आकाश गौड़ ने एसोसिएशन को बताया कि धमकी के बाद से वह और उनका परिवार मानसिक तनाव में है। घर से बाहर निकलने में भी उन्हें असुरक्षा का अनुभव हो रहा है। उनके परिजनों ने भी प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है।

पत्रकार संगठनों का कहना है कि धमकी केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसका असर पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। इससे बाकी पत्रकारों के बीच भी डर का माहौल बन सकता है।

पहले भी विवादों में रहे विधायक

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि विधायक नंदकिशोर गुर्जर पहले भी कई बार विवादों में रहे हैं। उन पर पूर्व में पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अधिकारियों के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार और दबाव बनाने के आरोप लग चुके हैं। हालांकि इन मामलों में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही तय होते हैं।

एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन की मांगें

एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन (ट्रस्ट), जिसका पंजीकरण 888/2023 के तहत हुआ है, ने पुलिस आयुक्त से तीन प्रमुख मांगें की हैं—

विधायक नंदकिशोर गुर्जर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

पत्रकार आकाश गौड़ और उनके परिवार को तत्काल पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए।

पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए।

एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यदि सात दिनों के भीतर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है, तो वे शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे।

https://x.com/i/status/2022235694534738338

प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल

यह मामला केवल एक व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं है। यह प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़ा व्यापक मुद्दा है। लोकतंत्र में मीडिया को चौथा स्तंभ माना जाता है। यदि पत्रकारों को खबर प्रकाशित करने के कारण धमकियां मिलती हैं, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आलोचना और सवाल लोकतंत्र की आत्मा हैं। जनप्रतिनिधियों को आलोचना को सकारात्मक रूप में लेना चाहिए और तथ्यों के साथ जवाब देना चाहिए, न कि डर या दबाव का माहौल बनाना चाहिए।

प्रशासन की भूमिका अहम

अब सभी की नजर पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर है। यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच होती है और तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाता है, तो इससे पत्रकारों का भरोसा मजबूत होगा। वहीं, यदि कार्रवाई में देरी होती है, तो यह संदेश जाएगा कि सत्ता के प्रभाव के आगे कानून कमजोर है।

लोकतंत्र में संवाद जरूरी

पत्रकार और जनप्रतिनिधि दोनों ही लोकतंत्र के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। पत्रकार जनता की आवाज को उठाते हैं, जबकि जनप्रतिनिधि जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में टकराव की स्थिति पैदा होने के बजाय संवाद और पारदर्शिता का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।

गाजियाबाद के इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पत्रकार सुरक्षित हैं? एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने सदस्य के साथ खड़ी है और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखेगी। अब देखना होगा कि प्रशासन कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है।

In a major controversy from Ghaziabad, BJP MLA Nandkishor Gurjar has been accused of threatening journalist Akash Gautam over a published news report. The Active Journalist Association has filed a formal police complaint demanding FIR registration, legal action, and police protection for the journalist and his family. The case has raised serious concerns about press freedom in India, journalist safety, and political pressure on media professionals in Uttar Pradesh.

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