AIN NEWS 1: रामपुर में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR – Special Intensive Revision) प्रक्रिया के दौरान सामने आए एक गंभीर मामले ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यहां एक महिला द्वारा अपने दो बेटों के नाम पर गलत जानकारी भरकर SIR फॉर्म जमा करने का मामला प्रकाश में आया, जिसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर तीन लोगों के खिलाफ प्रदेश का पहला मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला अब चुनावी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जिम्मेदारी को लेकर एक बड़ी मिसाल माना जा रहा है।
कैसे पकड़ा गया मामला?
रामपुर जिले के विधानसभा क्षेत्र–37, रामपुर के भाग संख्या–248 में बीएलओ (BLO) द्वारा नियमित रूप से SIR फॉर्म का डिजिटाइजेशन किया जा रहा था। इसी प्रक्रिया के दौरान फॉर्म में दिए गए विवरणों में कई संदिग्ध बिंदु दिखाई दिए। जांच आगे बढ़ने पर स्पष्ट हुआ कि नूरजहां नाम की महिला ने अपने दो बेटों—आमिर और दानिश—के नाम पर गणना प्रपत्र (SIR फॉर्म) जमा किया था, जबकि दोनों बेटे कई वर्षों से विदेश में रह रहे हैं।
बेटे दुबई और कुवैत में रहते हैं, फिर भी भरा गया फॉर्म
जांच में पता चला कि आमिर वर्तमान में दुबई और दानिश कुवैत में रहते हैं। दोनों की गैर-मौजूदगी के बावजूद उनकी मां नूरजहां ने उनके नाम से फॉर्म भर दिए और उन पर फर्जी हस्ताक्षर भी किए। यह कार्य चुनाव नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
डीएम ने की सख्त कार्रवाई
जब पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया, तो जिलाधिकारी रामपुर अजय कुमार द्विवेदी ने इसे गंभीरता से लेते हुए तीनों के खिलाफ—नूरजहां, आमिर और दानिश—सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए।
सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ने जिलाधिकारी के आदेश पर संबंधित थाने में तहरीर देकर केस दर्ज कराया।
डीएम ने स्पष्ट कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा SIR प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और गंभीरता के साथ संचालित की जा रही है और इसमें किसी भी तरह की गलत जानकारी या तथ्य छिपाने को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
चुनाव आयोग के नियम क्या कहते हैं?
भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश स्पष्ट रूप से बताते हैं कि—
कोई भी मतदाता केवल उसी स्थान पर फॉर्म भरे जहाँ वह वास्तव में निवास करता हो।
किसी अन्य स्थान से फॉर्म भरना या खुद को दो जगह मतदाता के रूप में दर्ज कराना दंडनीय अपराध है।
फर्जी हस्ताक्षर, गलत जानकारी, या तथ्य छिपाना सीधे-सीधे कानून का उल्लंघन है।
जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि दोहरे वोटर की प्रविष्टि या किसी भी प्रकार का गलत विवरण न केवल मतदाता सूची की पवित्रता को प्रभावित करता है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भी कमजोर करता है।
दोहरे नाम होने पर क्या करें? “Roll Back” विकल्प उपलब्ध
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति का नाम गलती से दो स्थानों पर दर्ज हो गया है या कोई गलत प्रविष्टि हो गई है, तो उसके पास इसे सुधारने का विकल्प मौजूद है।
ऐसे सभी व्यक्ति अपने बीएलओ से तुरंत संपर्क कर अपनी प्रविष्टि में संशोधन करा सकते हैं।
लेकिन यदि कोई जानबूझकर गलत जानकारी देता है और यह बात प्रशासन के संज्ञान में आती है, तो फिर कानूनी कार्रवाई अनिवार्य है।
डीएम का संदेश: सच और सटीक जानकारी ही दें
जिलाधिकारी ने जिले के सभी मतदाताओं से अपील की कि वे विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण प्रक्रिया में अपनी जानकारी पूरी ईमानदारी से दें।
उन्होंने कहा—
किसी भी तरह की गलत प्रविष्टि न करें।
तथ्य छिपाने से बचें।
फर्जी हस्ताक्षर या गलत पता देने जैसी गतिविधियों को गंभीर अपराध माना जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची की शुचिता ही चुनाव प्रक्रिया की ईमानदारी की बुनियाद है। इसलिए सभी नागरिकों को जिम्मेदारी और पारदर्शिता का परिचय देना चाहिए।
रामपुर में पहले भी चर्चा में रहे मामले
रामपुर शहर अक्सर चर्चा में रहता है, खासकर राजनीतिक मामलों और कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर। आज़म खान से जुड़े मामलों के कारण यह शहर पहले भी सुर्खियों में रहा है। अब SIR फॉर्म में गलत जानकारी देने वाले इस मामले के कारण यह जिला फिर एक बार केंद्र में है।
यह घटना पूरे प्रदेश में एक चेतावनी की तरह देखी जा रही है—कि चुनाव से जुड़े दस्तावेजों में किसी भी तरह की लापरवाही या जालसाजी स्वीकार्य नहीं होगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह FIR?
यह प्रदेश में इस तरह का पहला मामला है जिसमें SIR प्रक्रिया के दौरान गलत जानकारी देने पर मुकदमा दर्ज किया गया है। इससे प्रशासन का यह संदेश स्पष्ट होता है कि—
चुनावी प्रक्रियाओं से छेड़छाड़ अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी,
निगरानी तकनीक और डिजिटाइजेशन से फर्जीवाड़े आसानी से पकड़े जा सकते हैं,
और किसी भी तरह की धोखाधड़ी करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला उन लोगों के लिए भी सीख है जो सोचते हैं कि गलत जानकारी देकर मतदाता सूची में अपनी प्रविष्टि को गलत तरीके से बनाए रखा जा सकता है।
The FIR for fake information in the SIR form in Rampur highlights Uttar Pradesh’s first legal action under the Special Intensive Revision guidelines. The case involves forged signatures, false voter details, and violations detected during BLO verification. This incident strengthens the importance of transparency in voter registration, digital verification, and strict action against fraudulent entries in the electoral system.






