AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश बीजेपी में इस हफ्ते बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। पार्टी ने राज्य में अपने नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। हाल ही में बीजेपी ने प्रदेश परिषद के सदस्यों के नामों की घोषणा कर दी, जिससे यह साफ संकेत मिल गया है कि अब नया प्रदेश अध्यक्ष चुनने की औपचारिकता जल्द पूरी हो सकती है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार BJP ऐसी रणनीति पर काम कर रही है, जिसके तहत किसी गैर-यादव ओबीसी चेहरा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। यह फैसला 2027 विधानसभा चुनाव और 2029 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी की नई सामाजिक इंजीनियरिंग का हिस्सा माना जा रहा है।
गैर-यादव ओबीसी कार्ड क्यों?
यूपी की राजनीति में लंबे समय से यादव समुदाय को समाजवादी पार्टी का मुख्य आधार माना जाता है। ऐसे में बीजेपी लगातार उन ओबीसी जातियों पर फोकस कर रही है जिनका झुकाव गैर-यादव समाज की ओर है और जिनका पिछले कई चुनावों में पार्टी को बड़ा लाभ मिला है।
गैर-यादव ओबीसी नेता को अध्यक्ष बनाने के पीछे कई कारण हैं:
ओबीसी वोटर्स में मजबूत पकड़ बनाना
सपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाना
ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक पैठ गहरी करना
स्थानीय नेतृत्व को ताकत देकर संगठन मजबूत करना
बीजेपी का मानना है कि ऐसा नेता संगठन को गांव-गांव तक जोड़ सकता है और सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में मजबूत कर सकता है।
प्रदेश परिषद के नामों की घोषणा – संकेत कि फैसला करीब है
बीजेपी ने प्रदेश परिषद के सदस्यों की लिस्ट जारी कर दी है। यह कदम संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण स्टेप माना जाता है।
इस सूची के जारी होने के बाद पार्टी के अंदर यह चर्चा तेज हो गई है कि अब सिर्फ नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा बाकी है। आमतौर पर परिषद सदस्यों की घोषणा के बाद ही अध्यक्ष पर अंतिम मुहर लगती है।
पार्टी की अंदरूनी प्रक्रिया के अनुसार नए अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए दिल्ली से संकेत मिलते ही प्रदेश में औपचारिक घोषणा कर दी जाती है।
संगठनात्मक चुनावों का महत्व
यूपी बीजेपी देश के सबसे बड़े राज्य में अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहती है। इसके लिए एक ऐसा अध्यक्ष जरूरी माना जा रहा है जो:
विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच स्वीकार्य हो
विपक्ष के मुकाबले तेज जवाबदेही दिखा सके
कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का अनुभव रखता हो
विधानसभा चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सके
यही कारण है कि पार्टी इस पद को लेकर काफी सोच-समझकर निर्णय ले रही है।
किन-किन नामों पर चर्चा?
हालांकि आधिकारिक स्तर पर कोई नाम सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी गलियारों में कई नामों की चर्चा है। इनमें से ज्यादातर नेता गैर-यादव ओबीसी वर्ग से आते हैं।
संभावित नामों में शामिल हैं:
पार्टी के पुराने संगठनात्मक पदाधिकारी
विधानसभा या लोकसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले नेता
ऐसे नेता जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं
यह माना जा रहा है कि हाईकमान ऐसे व्यक्ति पर भरोसा करेगा जो शांत स्वभाव, संगठनात्मक मजबूती और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ सहज संवाद स्थापित करने की क्षमता रखता हो।
अखिलेश यादव और सपा की रणनीति पर नजर
चूंकि गैर-यादव ओबीसी समुदाय को साधना समाजवादी पार्टी की बड़ी चुनौती रहा है, इसलिए बीजेपी का यह कदम सपा के लिए भी एक राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
सपा लगातार यादव और मुस्लिम वोट बैंक पर निर्भर रही है, लेकिन बीजेपी गैर-यादव ओबीसी को लंबे समय से अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है।
बीजेपी का आकलन है कि गैर-यादव ओबीसी वर्ग सपा की राजनीति में स्वयं को sidelined महसूस करता है, और ऐसे में उनके बीच से अध्यक्ष चुनना सपा के लिए सीधी चुनौती बन सकता है।
योगी सरकार और संगठन – तालमेल पर भी फोकस
प्रदेश अध्यक्ष का चयन करते समय यह भी ध्यान रखा जा रहा है कि नया चेहरा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संगठन के बीच तालमेल को और मजबूत कर सके।
पार्टी चाहती है कि आने वाले वर्षों में संगठन और सरकार के बीच समन्वय बेहद सुचारू रहे, जिससे नीतियों और कार्यक्रमों का फायदा जमीनी स्तर तक पहुंचे।
बीजेपी का बड़ा लक्ष्य – 2027 और 2029
अगले दो बड़े चुनाव –
2027 का विधानसभा चुनाव
2029 का लोकसभा चुनाव
इन दोनों को ध्यान में रखकर ही संगठन को नए सिरे से खड़ा किया जा रहा है।
बीजेपी एक ऐसा चेहरा चाहती है जो ओबीसी समाज के साथ-साथ युवा, ग्रामीण और शहरी सभी वर्गों में आसानी से स्वीकार किया जाए।
घोषणा इस हफ्ते में कभी भी संभव
पार्टी के शीर्ष स्रोतों का कहना है कि नया अध्यक्ष इसी हफ्ते में कभी भी घोषित किया जा सकता है।
दिल्ली से हरी झंडी मिलते ही प्रदेश नेतृत्व आधिकारिक घोषणा करेगा।
पार्टी कार्यकर्ताओं में भी उत्सुकता है कि आखिर बीजेपी किन सामाजिक कारकों और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए नया नेता चुनती है।
यूपी बीजेपी के लिए यह बदलाव सिर्फ एक सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि आने वाली चुनावी लड़ाइयों को देखते हुए पार्टी का एक महत्वपूर्ण दांव है।
अगर बीजेपी वास्तव में गैर-यादव ओबीसी नेता को आगे लाती है, तो यह यूपी की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत होगा।
पार्टी की नजर 2027 और 2029 के बड़े चुनावों पर है, और नया अध्यक्ष इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है।
The upcoming selection of the new UP BJP president is expected to significantly influence political dynamics in Uttar Pradesh. With the party likely to choose a non-Yadav OBC leader, the BJP aims to strengthen its social engineering, expand its OBC outreach, and challenge Akhilesh Yadav’s traditional vote base. This leadership change is strategically aligned with the BJP’s roadmap for the 2027 UP Assembly Elections and the 2029 Lok Sabha Elections, making it a crucial development in UP politics.


















