AIN NEWS 1: देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शामिल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के एक साल लंबे अध्ययन ने युवाओं की सेहत को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। इस अध्ययन के अनुसार, अचानक होने वाली मौतें अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि 18 से 45 वर्ष की उम्र के युवा सबसे ज्यादा इसकी चपेट में आ रहे हैं।
चौंकाने वाला आंकड़ा: 57.2 प्रतिशत मौतें युवा वर्ग में
AIIMS के अध्ययन में सामने आया है कि कुल अचानक मौतों में से 57.2 प्रतिशत मामले 18 से 45 वर्ष के युवाओं के हैं। यह आंकड़ा उस पुरानी सोच को पूरी तरह खारिज करता है, जिसमें माना जाता था कि अचानक मौतें केवल बढ़ती उम्र या बुजुर्गों में ही होती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, आज का युवा दिखने में भले ही फिट लगे, लेकिन अंदरूनी तौर पर वह कई गंभीर बीमारियों को नजरअंदाज कर रहा है।
दिल की बीमारियां सबसे बड़ा कारण
अध्ययन के मुताबिक, 42.6 प्रतिशत युवा मौतों का सीधा संबंध हृदय रोगों से है। इनमें सबसे प्रमुख बीमारी है कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD)। इस स्थिति में हृदय की धमनियां धीरे-धीरे ब्लॉक हो जाती हैं, जिससे दिल को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और अचानक हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट हो सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि CAD पहले 50–60 साल की उम्र में देखने को मिलती थी, लेकिन अब यह समस्या 30–40 साल के युवाओं में आम होती जा रही है।
श्वसन रोग भी बड़ी वजह
अध्ययन में यह भी सामने आया कि करीब 20 प्रतिशत अचानक मौतें श्वसन संबंधी समस्याओं के कारण हुईं। इनमें फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां, सांस रुकना, गंभीर संक्रमण और एयरवे ब्लॉकेज जैसी स्थितियां शामिल हैं।
खराब वायु गुणवत्ता, धूम्रपान और लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहना इसके पीछे प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
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20 प्रतिशत से अधिक मौतों का कारण रहस्य बना
AIIMS की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 20 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में मौत का स्पष्ट कारण पता नहीं चल पाया। इसे मेडिकल भाषा में “अनएक्सप्लेंड डेथ” कहा जाता है। ऐसे मामलों में पोस्टमॉर्टम और जांच के बाद भी मौत की ठोस वजह सामने नहीं आ पाती।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इनमें जेनेटिक कारण, अचानक हार्ट रिदम बिगड़ना या छिपी हुई बीमारियां शामिल हो सकती हैं।
जीवनशैली बन रही है सबसे बड़ा दुश्मन
अध्ययन में यह साफ तौर पर कहा गया है कि युवाओं की खराब जीवनशैली इन मौतों की सबसे बड़ी वजह बन रही है। इनमें शामिल हैं:
लगातार धूम्रपान और शराब का सेवन
अत्यधिक तनाव और नींद की कमी
जंक फूड और असंतुलित आहार
शारीरिक गतिविधि की कमी
घंटों स्क्रीन के सामने बैठना
डॉक्टरों के मुताबिक, युवा करियर और जिम्मेदारियों के दबाव में अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर घातक साबित होता है।
COVID-19 वैक्सीन से कोई संबंध नहीं
AIIMS के इस अध्ययन ने एक अहम बात साफ की है कि COVID-19 वैक्सीनेशन और अचानक मौतों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया। हाल के वर्षों में सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को यह रिपोर्ट खारिज करती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना वैज्ञानिक प्रमाण के फैलने वाली बातें लोगों में डर पैदा करती हैं, जबकि असली खतरा गलत जीवनशैली और अनदेखी बीमारियां हैं।
क्या किया जाए? विशेषज्ञों की सलाह
AIIMS के डॉक्टरों ने युवाओं को समय रहते सतर्क होने की सलाह दी है। उनकी प्रमुख सिफारिशें हैं:
साल में कम से कम एक बार हार्ट और हेल्थ चेक-अप
ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच
रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम
तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान
धूम्रपान और शराब से दूरी
संतुलित और घर का बना भोजन
समय रहते संभलना जरूरी
यह अध्ययन एक चेतावनी है कि अगर युवाओं ने अब भी अपनी जीवनशैली नहीं बदली, तो आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं। अचानक मौत केवल एक मेडिकल घटना नहीं, बल्कि यह समाज और परिवार के लिए एक गहरा आघात होती है।
स्वस्थ आदतें अपनाकर और शरीर के संकेतों को समझकर इन दुखद घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
The AIIMS study highlights a serious health concern in India, revealing that sudden deaths among youth aged 18 to 45 now account for over 57 percent of total cases. The research identifies heart diseases, particularly coronary artery disease, as the leading cause, followed by respiratory disorders. Experts emphasize that lifestyle factors such as smoking, stress, unhealthy diet, and lack of exercise are major contributors, while no link has been found between COVID-19 vaccination and sudden deaths. Regular health check-ups and a balanced lifestyle are crucial to prevent sudden cardiac deaths in young adults.


















