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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ नाबालिगों के शोषण के आरोप में FIR दर्ज करने का आदेश, प्रयागराज पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला!

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ नाबालिगों के शोषण के आरोप में FIR दर्ज करने का आदेश, प्रयागराज पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला

AIN NEWS 1: प्रयागराज से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां नाबालिग बच्चों के कथित यौन शोषण के आरोपों को लेकर पॉक्सो कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह निर्देश तब जारी किया गया जब अदालत ने इस मामले में नाबालिग बच्चों के बयान दर्ज किए।

🔹 बंद कमरे में दर्ज हुए बच्चों के बयान

बताया जा रहा है कि 13 फरवरी को प्रयागराज की विशेष पॉक्सो अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए कोर्ट रूम को खाली करवा दिया था। केवल दोनों पक्षों के वकीलों की मौजूदगी में नाबालिग बच्चों को पेश किया गया।

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विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया के समक्ष बच्चों ने अपने साथ हुए कथित उत्पीड़न की पूरी आपबीती सुनाई। अदालत ने इन बयानों को गोपनीय रखते हुए बंद कमरे में दर्ज किया और पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई।

🔹 शिकायतकर्ता ने खुद रखी अपनी पैरवी

इस मामले में शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज हैं, जो जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य बताए जाते हैं। उन्होंने अदालत में खुद ही अपनी पैरवी करते हुए दावा किया कि दो नाबालिग शिष्यों ने उनके पास आकर अपने साथ हुए यौन शोषण की जानकारी दी थी।

उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए शंकराचार्य के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।

🔹 धमकियों का भी लगाया आरोप

सुनवाई के दौरान आशुतोष महाराज ने अदालत को यह भी बताया कि शिकायत दर्ज कराने के बाद से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी कार को बम से उड़ाने तक की चेतावनी दी गई है और उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है।

उन्होंने अदालत से पीड़ित बच्चों के बयान दर्ज करने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने नाबालिगों को पेश करने का निर्देश दिया।

🔹 गुरुकुल और शिविर पर गंभीर आरोप

आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर और गुरुकुल में बच्चों का शोषण किया जा रहा है। उनका कहना है कि गुरुकुल की आड़ में नाबालिगों से निजी सेवाएं ली जाती हैं और उनसे अन्य कार्य भी कराए जाते हैं।

उन्होंने यह भी मांग की है कि इस मामले में आय से अधिक संपत्ति और अन्य कथित अवैध गतिविधियों की भी जांच कराई जानी चाहिए।

🔹 पहले पुलिस कमिश्नर से भी की गई थी शिकायत

इससे पहले 24 जनवरी को आशुतोष महाराज ने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर को भी दो अलग-अलग शिकायतें सौंपी थीं। इनमें उन्होंने आरोप लगाया था कि शिविर में बच्चों से भीड़ जुटाने और अन्य गतिविधियों में शामिल होने के लिए दबाव बनाया जाता है।

इसके अलावा उन्होंने यौन शोषण, अवैध हथियार रखने और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामलों की जांच की भी मांग की थी।

🔹 सबूत के तौर पर सीडी होने का दावा

सुनवाई के बाद मीडिया से बातचीत में आशुतोष महाराज ने दावा किया कि अदालत के समक्ष इस मामले से जुड़े कुछ डिजिटल साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि एक नहीं बल्कि कई सीडी कोर्ट में जमा कराई गई हैं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

🔹 अभिभावक बनने के आधार पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने आशुतोष महाराज से यह भी पूछा कि वे पीड़ित बच्चों के अभिभावक के रूप में किस आधार पर अदालत में उपस्थित हुए हैं। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि गुरु-शिष्य परंपरा के तहत न्याय दिलाने के उद्देश्य से वे आगे आए हैं।

उनका कहना था कि पीड़ित बच्चों ने स्वयं उनसे संपर्क किया और अपनी पीड़ा साझा की, जिसके बाद उन्होंने यह कानूनी लड़ाई शुरू करने का निर्णय लिया।

फिलहाल अदालत के आदेश के बाद इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब आगे की जांच में ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

A special POCSO Court in Prayagraj has directed the registration of an FIR against Shankaracharya Avimukteshwaranand over serious allegations of sexual abuse involving minor children at a Gurukul. The complaint was filed by Ashutosh Maharaj, a disciple of Jagadguru Rambhadracharya, who claimed that minor victims approached him with disturbing accounts of exploitation. The court recorded the confidential statements of the children on February 13 in a closed courtroom and emphasized the need for an impartial investigation under the POCSO Act to ensure justice and child protection.

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