AIN NEWS 1: गाजियाबाद के राज नगर एक्सटेंशन इलाके में रहने वाले लोगों के लिए यह सर्दी सिर्फ ठंड नहीं, बल्कि ज़हरीली हवा का भी खतरा लेकर आई है। ताज़ा एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) रिपोर्ट के मुताबिक, यहां की हवा “Severe” यानी बेहद गंभीर श्रेणी में पहुंच चुकी है। मौजूदा AQI 215 से 301 के बीच दर्ज किया गया है, जो सीधे तौर पर इंसानी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है।
हवा कितनी खराब है? आंकड़ों से समझिए
राज नगर एक्सटेंशन में PM2.5 का स्तर 140 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया है, जबकि PM10 की मात्रा 205 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, PM2.5 सबसे खतरनाक प्रदूषक कण होते हैं क्योंकि ये सीधे फेफड़ों के अंदर जाकर खून में मिल सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के मुताबिक PM2.5 का सुरक्षित स्तर 15 µg/m³ से अधिक नहीं होना चाहिए।
यह स्थिति बताती है कि गाजियाबाद की हवा सुरक्षित सीमा से कई गुना ज़्यादा प्रदूषित हो चुकी है।
सिगरेट पीने जितना खतरनाक है सांस लेना
स्वास्थ्य सलाह में एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, राज नगर एक्सटेंशन में 24 घंटे तक सांस लेना 10 सिगरेट पीने के बराबर माना जा रहा है। इसका मतलब है कि जो लोग धूम्रपान नहीं भी करते, वे भी अनजाने में धुएं जैसा ज़हर अपने शरीर में ले रहे हैं।
रोज़ाना: 10.1 सिगरेट के बराबर
साप्ताहिक: 70 से अधिक सिगरेट
मासिक: 300 से ज्यादा सिगरेट
यह स्थिति बच्चों, बुज़ुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए और भी गंभीर हो जाती है।
मौसम भी बढ़ा रहा है खतरा
गाजियाबाद में तापमान करीब 11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है और नमी का स्तर 94 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इसके साथ ही कोहरा और हवा की धीमी रफ्तार (15 किमी/घंटा) प्रदूषण को जमीन के पास ही रोक रही है। यही वजह है कि स्मॉग की मोटी परत हवा में बनी हुई है और प्रदूषक कण ऊपर नहीं जा पा रहे।
कौन-कौन सी बीमारियां बढ़ रही हैं?
डॉक्टरों के अनुसार, इस तरह की हवा से कई स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं:
अस्थमा और सांस की दिक्कत
सीने में जकड़न और खांसी
आंखों और गले में जलन
हाई ब्लड प्रेशर
हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा
बच्चों में फेफड़ों का विकास प्रभावित
जिला अस्पतालों की ओपीडी में सांस और दिल से जुड़ी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
क्या कहती है रैंकिंग रिपोर्ट?
वैश्विक स्तर पर जारी प्रदूषण रैंकिंग में गाजियाबाद इस समय दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में 97वें स्थान पर है। यह रैंकिंग साफ तौर पर बताती है कि स्थिति सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंताजनक है।
क्या करें, क्या न करें? (Health Advisory)
विशेषज्ञों और स्वास्थ्य एजेंसियों ने लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है:
ज़रूरी कदम
घर के अंदर एयर प्यूरीफायर जरूर चलाएं
बाहर निकलते समय N95 मास्क पहनें
कार में केबिन एयर फिल्टर ऑन रखें
बच्चों और बुज़ुर्गों को बाहर जाने से रोकें
इन बातों से बचें
सुबह-शाम वॉक या एक्सरसाइज बाहर न करें
खुले में बैठना या धूप सेंकना टालें
खिड़कियां लंबे समय तक खुली न रखें
क्या यह सिर्फ सर्दियों की समस्या है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि सर्दियों में प्रदूषण बढ़ना आम है, लेकिन लगातार बढ़ते AQI इस बात का संकेत हैं कि समस्या गहरी होती जा रही है। निर्माण कार्य, वाहनों का धुआं, पराली जलाना और औद्योगिक प्रदूषण मिलकर गाजियाबाद की हवा को हर साल और ज़हरीला बना रहे हैं।
समाधान क्या है?
लंबे समय के समाधान के लिए सिर्फ सरकार नहीं, आम लोगों को भी जिम्मेदारी लेनी होगी। सार्वजनिक परिवहन का उपयोग, गाड़ियों की नियमित जांच, कचरा जलाने से बचाव और हरियाली बढ़ाना ऐसे कदम हैं जो धीरे-धीरे हालात सुधार सकते हैं।
The air quality in Ghaziabad’s Raj Nagar Extension has deteriorated to severe levels, with AQI crossing 300 and PM2.5 concentrations far exceeding WHO safety standards. Rising air pollution, winter smog, and stagnant weather conditions have made breathing equivalent to smoking multiple cigarettes daily. This alarming situation highlights the growing health risks of air pollution in Ghaziabad, especially for children, elderly people, and those with respiratory or heart conditions.



















