AIN NEWS 1: सुबह की ताज़ी हवा को आमतौर पर स्वास्थ्य के लिए सबसे बेहतर माना जाता है, लेकिन देश के कई शहरों में 5 जनवरी 2026 की सुबह 6 बजे जो वायु गुणवत्ता दर्ज की गई, वह चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर पेश करती है। प्रदूषण अब सिर्फ बड़े महानगरों की समस्या नहीं रहा, बल्कि छोटे और पहाड़ी शहर भी इसकी चपेट में आते दिख रहे हैं।
ओपनवेदरमैप (OpenWeatherMap) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, भारत के अधिकांश शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘माध्यम’ से ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया। इसका सीधा असर आम लोगों के स्वास्थ्य, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस के रोगियों पर पड़ सकता है।

📊 प्रमुख शहरों का AQI हाल (सुबह 6:00 बजे)
उत्तर भारत की बात करें तो दिल्ली (अलीपुर) में AQI 215 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इसका मतलब है कि यहां की हवा संवेदनशील लोगों के लिए नुकसानदेह हो सकती है। वहीं गुरुग्राम (विकास सदन) में AQI 154 रहा, जो माध्यम स्तर का है, लेकिन लंबे समय तक ऐसी हवा में रहना सेहत के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता।
नोएडा (सेक्टर-125) में AQI 187, लखनऊ (सेंट्रल स्कूल) में 180, और पटना (मुरादपुर) में 155 दर्ज किया गया। ये सभी आंकड़े इस ओर इशारा करते हैं कि उत्तर भारत के शहरी इलाकों में प्रदूषण लगातार बना हुआ है।
🌆 अन्य प्रमुख शहरों की स्थिति
पूर्वी भारत की बात करें तो कोलकाता (जादवपुर) में AQI 167 दर्ज किया गया, जबकि उत्तर-पूर्व का प्रमुख शहर शिलांग (आईएन स्टेडियम) अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहा, जहां AQI 110 रहा। हालांकि यह भी पूरी तरह सुरक्षित श्रेणी में नहीं आता।
पश्चिम भारत में मुंबई (सिद्धार्थ नगर-वर्ली) का AQI 170 रहा, जो यह दिखाता है कि समुद्री हवाओं के बावजूद प्रदूषण की समस्या यहां भी बनी हुई है।
दक्षिण भारत के शहरों में हैदराबाद (बोलारम इंडस्ट्रियल एरिया) में AQI 167, चेन्नई (कोडुंगईयूर) में 151, और बेंगलुरु (BTM) में 148 दर्ज किया गया। ये आंकड़े बताते हैं कि औद्योगिक गतिविधियों और बढ़ते वाहनों का असर दक्षिण भारत के शहरों में भी साफ दिखाई दे रहा है।
🟢 AQI श्रेणियों का कुल आंकड़ा
पूरे देश में AQI की श्रेणियों पर नजर डालें तो तस्वीर कुछ इस तरह है:
अच्छी (0–50): केवल 3 स्थान
संतोषजनक (51–100): 14 स्थान
माध्यम (101–200): 66 स्थान
खराब (201–300): 2 स्थान
बहुत खराब (301–400): 0
गंभीर (401 से ऊपर): 0
यह साफ करता है कि अधिकांश शहर माध्यम श्रेणी में हैं, जो भले ही तुरंत गंभीर खतरा न हों, लेकिन लंबे समय में स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।
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😷 सेहत पर क्या असर पड़ सकता है?
माध्यम और खराब श्रेणी की हवा में लंबे समय तक सांस लेने से आंखों में जलन, गले में खराश, सांस फूलना और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा, एलर्जी और हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
विशेषज्ञों की मानें तो सुबह की सैर करने वाले लोगों को ऐसे दिनों में सतर्क रहना चाहिए। यदि AQI 150 से ऊपर है, तो खुले में व्यायाम करने से बचना बेहतर होता है।
🌱 आगे की राह क्या है?
वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की भी भूमिका अहम है। सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल, अनावश्यक वाहन न चलाना, कचरा न जलाना और पेड़-पौधे लगाना—ये छोटे कदम बड़े बदलाव ला सकते हैं।
साथ ही, समय-समय पर AQI की जानकारी लेना और उसके अनुसार अपनी दिनचर्या तय करना भी जरूरी है।
5 जनवरी 2026 की सुबह का AQI डेटा यह साफ दिखाता है कि भारत के ज्यादातर शहरों में हवा अभी भी पूरी तरह साफ नहीं है। हालांकि स्थिति गंभीर नहीं है, लेकिन अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। साफ हवा केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि हर नागरिक का अधिकार है—और इसे सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी भी।
Air quality across major Indian cities on January 5, 2026 remained mostly in the moderate to poor category, according to OpenWeatherMap AQI data. Cities like Delhi, Gurgaon, Noida, Mumbai, and Hyderabad recorded higher pollution levels, raising concerns about air pollution in India. Monitoring the Air Quality Index, understanding pollution trends, and adopting preventive measures are crucial for protecting public health and reducing long-term environmental impact.


















