AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर प्रशासनिक मामला सियासी तूफान में बदल गया है। ASP अनुज चौधरी से जुड़ा विवाद अब सिर्फ एक अधिकारी के फैसलों या कार्यशैली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मामला सत्ता, राजनीति और पुलिस-प्रशासन के रिश्तों पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और योगी आदित्यनाथ सरकार पर जोरदार हमला बोला है।
अखिलेश यादव के ताजा बयान ने प्रदेश की सियासत का तापमान और बढ़ा दिया है। उन्होंने न सिर्फ ASP अनुज चौधरी को लेकर टिप्पणी की, बल्कि भाजपा की कार्यशैली और सत्ता की राजनीति को भी कठघरे में खड़ा किया।
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अखिलेश यादव का तीखा बयान
अखिलेश यादव ने कहा कि जिस अधिकारी को कभी सत्ता का संरक्षण प्राप्त था, अब वही अधिकारी अकेला पड़ चुका है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब कोई भी ASP अनुज चौधरी को बचाने आगे नहीं आएगा और वह अपने फैसलों और कामों को “खाली बैठकर याद करेंगे”।
सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि सत्ता के साथ चलने वाले लोग जब राजनीतिक जरूरत पूरी कर देते हैं, तो उन्हें किनारे कर दिया जाता है। उनका इशारा साफ तौर पर भाजपा और योगी सरकार की ओर था।
“पहले इस्तेमाल करो, फिर बर्बाद करो” – भाजपा पर बड़ा आरोप
अखिलेश यादव ने भाजपा की राजनीति को समझाने के लिए दो कड़वे लेकिन तीखे ‘फार्मूले’ बताए। उन्होंने कहा:
पहले इस्तेमाल करो
फिर बर्बाद करो
उनका आरोप है कि भाजपा अपने राजनीतिक फायदे के लिए अधिकारियों, नेताओं और सहयोगियों का इस्तेमाल करती है और जैसे ही काम निकल जाता है, उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता है। अखिलेश ने कहा कि भाजपा में न तो स्थायी दोस्ती होती है और न ही किसी के प्रति भरोसे का रिश्ता।
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“भाजपा में कोई किसी का सगा नहीं”
अखिलेश यादव ने बेहद साफ शब्दों में कहा कि भाजपा में रिश्ते केवल सत्ता तक सीमित होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के लिए व्यक्ति नहीं, बल्कि सत्ता और लाभ मायने रखते हैं। यही कारण है कि कई अधिकारी और नेता, जो कभी सरकार के करीबी माने जाते थे, आज खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
ASP अनुज चौधरी के मामले को उदाहरण बनाते हुए अखिलेश ने कहा कि ऐसे अधिकारियों को राजनीतिक लाभ के लिए आगे किया जाता है, लेकिन जब विवाद खड़ा होता है, तो वही लोग अकेले छोड़ दिए जाते हैं।
प्रशासनिक विवाद से सियासी मुद्दा कैसे बना मामला
ASP अनुज चौधरी का मामला शुरुआत में एक प्रशासनिक निर्णय और कार्रवाई से जुड़ा हुआ था। लेकिन समय के साथ यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। विपक्ष का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन को सत्ता के दबाव में काम करने के लिए मजबूर किया गया।
अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पुलिस और प्रशासन का राजनीतिक इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार ने प्रशासनिक संस्थाओं को अपने राजनीतिक एजेंडे के अनुसार ढाल लिया है।
वोट शेयर और सत्ता की राजनीति पर सवाल
अखिलेश यादव ने इस मौके पर भाजपा के वोट शेयर और उसकी चुनावी रणनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने प्रदेश में डर, दबाव और प्रशासनिक ताकत के जरिए सत्ता कायम रखी है।
उनका कहना था कि पुलिस और प्रशासन से जुड़े मामलों को राजनीतिक रंग देकर भाजपा जनता का ध्यान असली मुद्दों—जैसे बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य—से हटाने की कोशिश करती है।
आने वाले चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है मामला
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ASP अनुज चौधरी का मामला आने वाले चुनावों में बड़ा सियासी हथियार बन सकता है। समाजवादी पार्टी इसे कानून-व्यवस्था, प्रशासन की निष्पक्षता और सत्ता के दुरुपयोग से जोड़कर जनता के बीच ले जा सकती है।
अखिलेश यादव के बयानों से साफ है कि सपा इस मुद्दे को केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे भाजपा की पूरी कार्यशैली के उदाहरण के रूप में पेश कर रही है।
भाजपा और सरकार की चुप्पी
अब तक इस पूरे मामले पर भाजपा और योगी सरकार की ओर से कोई ठोस राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सरकार समर्थक नेता इसे विपक्ष का राजनीतिक बयान बता रहे हैं। लेकिन सपा का दावा है कि यह मामला सत्ता के असली चेहरे को उजागर करता है।
ASP अनुज चौधरी का मामला अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक अहम मोड़ ले चुका है। यह सिर्फ एक अधिकारी या प्रशासनिक विवाद नहीं रह गया, बल्कि यह सत्ता, पुलिस और राजनीति के रिश्तों पर बहस का विषय बन गया है।
अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को भाजपा के खिलाफ सियासी हमले के रूप में इस्तेमाल करते हुए यह संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा केवल सत्ता के लिए लोगों का इस्तेमाल करती है। आने वाले समय में यह मामला न केवल कानूनी प्रक्रिया से गुजरेगा, बल्कि राजनीतिक मंचों और चुनावी भाषणों में भी गूंजता नजर आ सकता है।
The ASP Anuj Chaudhary case has escalated political tensions in Uttar Pradesh as Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav launched a strong attack on the BJP and the Yogi Adityanath government. Calling BJP a party that uses people for political advantage and later abandons them, Akhilesh questioned the politicization of police and administration in UP. The controversy highlights key issues of governance, political power, and law enforcement, making it a significant topic in UP politics and upcoming elections.



















