AIN NEWS 1: आगरा स्थित विश्व धरोहर ताजमहल में आज से मुगल बादशाह शाहजहां का 371वां उर्स औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। यह मौका न सिर्फ ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि मुगल दौर की परंपराओं और ताजमहल से जुड़े रहस्यों को समझने का भी अवसर देता है। उर्स के पहले दिन ताजमहल के तहखाने में स्थित शाहजहां और उनकी बेगम मुमताज महल की असली कब्रों को खोला गया, जिसे देखने और उसकी निगरानी के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकारी करीब 30 फीट नीचे उतरे।
साल में सिर्फ तीन दिन खुलती हैं असली कब्रें
ताजमहल के मुख्य गुंबद के नीचे जो संगमरमर की सुंदर कब्रें दिखाई देती हैं, वे प्रतीकात्मक हैं। असली कब्रें नीचे तहखाने में स्थित हैं, जहां आम लोगों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहता है। इन असली कब्रों को साल में केवल तीन दिन—शाहजहां के उर्स के दौरान—खोला जाता है। इन दिनों में भी सिर्फ सीमित धार्मिक रस्मों और प्रशासनिक निगरानी की अनुमति होती है।
उर्स की शुरुआत के साथ ही परंपरागत रूप से इन कब्रों की सफाई, अगरबत्ती और चादरपोशी की जाती है। यह पूरी प्रक्रिया बेहद सादगी और अनुशासन के साथ पूरी की जाती है।
30 फीट नीचे उतरे ASI अधिकारी
उर्स के पहले दिन ASI के वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा मानकों के तहत ताजमहल के तहखाने में उतरे। यह तहखाना जमीन से करीब 30 फीट नीचे स्थित है। यहां रोशनी, नमी और संरचना की स्थिति की विशेष जांच की जाती है ताकि ऐतिहासिक धरोहर को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।
ASI अधिकारियों के मुताबिक, तहखाने में मौजूद कब्रों की हालत पूरी तरह सुरक्षित है और किसी प्रकार की क्षति या छेड़छाड़ के संकेत नहीं मिले हैं। हर साल उर्स के दौरान यह जांच इसलिए जरूरी मानी जाती है ताकि भविष्य में संरक्षण से जुड़ी किसी चुनौती का सामना न करना पड़े।
शाहजहां और मुमताज की प्रेम कहानी से जुड़ा ताजमहल
ताजमहल सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि शाहजहां और मुमताज महल के अमर प्रेम का प्रतीक है। मुमताज की मृत्यु 1631 में हुई थी, जिसके बाद शाहजहां ने उनकी याद में इस अद्भुत स्मारक के निर्माण का आदेश दिया। बाद में 1666 में शाहजहां के निधन के बाद उन्हें भी मुमताज के बगल में दफनाया गया।
उर्स के मौके पर सूफी परंपरा के अनुसार कुरानखानी और विशेष दुआएं की जाती हैं। हालांकि ताजमहल में उर्स का आयोजन बेहद सीमित और सादगीपूर्ण होता है, लेकिन इसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व आज भी बना हुआ है।
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था कड़ी
उर्स के दौरान ताजमहल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य दिनों की तुलना में अधिक सख्त रहती है। स्थानीय प्रशासन, ASI और सुरक्षा एजेंसियां मिलकर पूरे आयोजन पर नजर रखती हैं। किसी भी तरह की अव्यवस्था या नियम उल्लंघन की अनुमति नहीं होती।
पर्यटकों के लिए ताजमहल सामान्य रूप से खुला रहता है, लेकिन तहखाने और उर्स से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों में आम लोगों की भागीदारी नहीं होती।
ताजमहल और उर्स का ऐतिहासिक महत्व
इतिहासकारों के अनुसार, मुगल काल में उर्स एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक आयोजन होता था। शाहजहां के उर्स को आज भी उसी परंपरा के तहत मनाया जाता है, हालांकि अब इसका स्वरूप सीमित हो चुका है।
ताजमहल जैसे स्मारक में इस तरह की परंपराओं का जीवित रहना इस बात का प्रमाण है कि भारत में इतिहास सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि आज भी सांस ले रहा है।
लोगों में बनी रहती है जिज्ञासा
हर साल उर्स के समय ताजमहल के तहखाने और असली कब्रों को लेकर लोगों की जिज्ञासा बढ़ जाती है। सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी तस्वीरें और जानकारियां चर्चा का विषय बनती हैं। हालांकि प्रशासन स्पष्ट कर चुका है कि तहखाने की संरचना पूरी तरह सुरक्षित है और किसी भी तरह के भ्रम या अफवाह पर ध्यान न दिया जाए।
शाहजहां का 371वां उर्स एक बार फिर ताजमहल को चर्चा के केंद्र में ले आया है। यह आयोजन न केवल एक ऐतिहासिक परंपरा को जीवित रखता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को मुगल इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का काम भी करता है। सीमित लेकिन गरिमापूर्ण तरीके से मनाया जाने वाला यह उर्स ताजमहल की शांति, सादगी और गौरव को और गहरा करता है।
The 371st Urs of Mughal emperor Shah Jahan has commenced at the Taj Mahal in Agra, drawing attention to the historical underground chamber where the real graves of Shah Jahan and Mumtaz Mahal are located. Opened only three days a year under strict ASI supervision, the Taj Mahal basement graves remain one of the most guarded and fascinating aspects of Mughal history and India’s cultural heritage.








