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संभल हिंसा मामला: मंदिर–मस्जिद विवाद के सर्वे में दिव्यांग युवक को लगी गोली, एक साल से इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा परिवार!

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के संभल जिले से जुड़ा मंदिर–मस्जिद विवाद एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह है उस हिंसा से जुड़ा एक दर्दनाक मामला, जिसमें एक दिव्यांग युवक को गोली लग गई थी। यह घटना 24 नवंबर 2023 की है, जब संभल की सीनियर डिवीजन सिविल कोर्ट, चंदौसी के आदेश पर श्री हरिहर मंदिर बनाम शाही जामा मस्जिद विवादित स्थल पर दूसरे चरण का सर्वे किया जा रहा था।

📌 सर्वे के दौरान भड़की थी हिंसा

कोर्ट के आदेश पर जब सर्वे टीम मौके पर पहुंची, तो इलाके में पहले से ही तनाव का माहौल था। धीरे-धीरे स्थिति बिगड़ती चली गई और देखते ही देखते हिंसा भड़क उठी। इसी अफरातफरी के बीच खग्गू सराय अंजुमन मोहल्ले के रहने वाले एक दिव्यांग युवक आलम को गोली लग गई।

आलम, जो थाना नखासा क्षेत्र के निवासी हैं, उस समय किसी प्रदर्शन या विवाद का हिस्सा नहीं थे। परिवार के अनुसार, वे रोज़ की तरह अपनी आजीविका के लिए घर से निकले थे।

🧍‍♂️ कौन हैं आलम?

आलम की उम्र करीब 21 से 22 साल बताई जाती है। वे अपने परिवार के 10 भाई-बहनों में पांचवें नंबर पर हैं। बचपन में पोलियो की वजह से उनकी एक टांग पूरी तरह से खराब हो चुकी है, जिससे उन्हें चलने-फिरने में काफी दिक्कत होती है।

इसके बावजूद आलम परिवार की मदद के लिए रोज़ सुबह घर से निकलते थे और गलियों में बिस्किट व पापड़ बेचकर अपनी रोज़ी-रोटी चलाते थे। परिवार का कहना है कि घटना वाले दिन भी वे इसी उद्देश्य से घर से निकले थे और उन्हें वहां चल रहे किसी विवाद या सर्वे की कोई जानकारी नहीं थी।

🔫 “मेरे भाई को तीन गोलियां मारी गईं” – बहन रजिया

आलम की बहन रजिया ने घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि उनके भाई को तीन गोलियां लगी थीं और यह फायरिंग पुलिसकर्मियों द्वारा की गई।

रजिया के अनुसार,

“हमें खुद मौके पर मौजूद किसी पुलिसकर्मी ने कुछ नहीं बताया। बाहर के लोगों से खबर मिली कि मेरे भाई को गोली मार दी गई है।”

परिवार का दावा है कि जिस तरह से गोली लगी और जिस जगह आलम मौजूद थे, उससे साफ होता है कि वे किसी हिंसा में शामिल नहीं थे।

⚖️ न्याय के लिए एक साल की जंग

घटना के बाद आलम के पिता ने लगभग एक साल पहले अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की।

हालांकि, परिवार का आरोप है कि इस दौरान उन्हें लगातार दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ा। रजिया बताती हैं कि पुलिस की ओर से डराने की कोशिशें की गईं, लेकिन परिवार ने हार नहीं मानी।

“हमें धमकाया गया, लेकिन हमें सरकार और न्याय व्यवस्था पर भरोसा था। कई बार हमारी याचिकाएं खारिज हुईं, लेकिन हमने लड़ाई नहीं छोड़ी।”

👮‍♂️ 12 लोगों पर आरोप, मुख्य नाम – अनुज चौधरी

परिवार की ओर से कोर्ट में दी गई याचिका में कुल 12 लोगों के नाम शामिल हैं। इनमें अनुज चौधरी को मुख्य आरोपी बताया गया है।

रजिया के अनुसार,

“मुझे सिर्फ अनुज चौधरी का नाम पता है। बाकी नाम मेरे पिता को मालूम हैं, क्योंकि वही पूरा मामला देख रहे हैं।”

परिवार का स्पष्ट आरोप है कि गोली पुलिस की ओर से चलाई गई और अब उसी को दबाने की कोशिश की जा रही है।

📄 9 जनवरी को आया कोर्ट का आदेश

परिवार द्वारा एक साल पहले दायर की गई याचिका पर आखिरकार 9 जनवरी 2025 को अदालत का आदेश आया। हालांकि, इसके बावजूद अब तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

यह देरी परिवार की चिंता को और बढ़ा रही है। उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो शायद उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।

🏥 आलम का इलाज अब भी जारी

गोली लगने के बाद से आलम का इलाज लगातार चल रहा है। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी, और अब इलाज का खर्च उठाना उनके लिए और मुश्किल हो गया है।

दिव्यांग होने के कारण आलम पहले ही सामान्य जीवन से जूझ रहे थे। अब गोली लगने के बाद उनकी हालत और गंभीर हो गई है। परिवार को डर है कि कहीं उनका जीवन हमेशा के लिए और सीमित न हो जाए।

🕊️ “हम अकेले नहीं हैं” – रजिया

रजिया का कहना है कि आलम अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जिनके साथ इस हिंसा में गलत हुआ। उनके मुताबिक, उस दिन कई निर्दोष लोग हिंसा की चपेट में आए और कुछ ने तो अपनी जान तक गंवा दी।

“हम सिर्फ अपने भाई के लिए नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए इंसाफ चाहते हैं जिनके साथ उस दिन अन्याय हुआ।”

🔚 इंसाफ की उम्मीद अब भी ज़िंदा

एक साल बीत जाने के बावजूद आलम का परिवार आज भी इंसाफ की राह देख रहा है। उन्हें उम्मीद है कि अदालत और प्रशासन जल्द ही इस मामले में ठोस कदम उठाएंगे, दोषियों पर कार्रवाई होगी और उनके भाई को न्याय मिलेगा।

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की गोली लगने का नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था, पुलिस की जवाबदेही और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल खड़ा करता है।

This article highlights the Sambhal violence case linked to the Shri Harihar Mandir and Shahi Jama Masjid dispute, where a disabled youth was allegedly shot during a court-ordered survey. The family has accused police personnel of firing and has been seeking justice for over a year. The case raises serious concerns about police accountability, communal tensions in Sambhal, and the safety of innocent civilians during sensitive religious disputes in Uttar Pradesh.

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