AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से सामने आई यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल समाज को जोड़ने के बजाय नफरत फैलाने के लिए क्यों किया जा रहा है। पुलिस ने ‘हैदरी दल’ नाम के एक कथित संगठन के सरगना मजहर को गिरफ्तार किया है, जिस पर सोशल मीडिया के जरिए सांप्रदायिक तनाव फैलाने, फर्जी और एडिटेड वीडियो वायरल करने और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं को अपमानित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
कैसे सामने आया ‘हैदरी दल’ का मामला
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, बीते कुछ समय से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ ऐसे वीडियो और पोस्ट वायरल हो रहे थे, जिनसे समाज में तनाव और आपसी वैमनस्य बढ़ रहा था। जांच में पता चला कि ये सभी कंटेंट एक संगठित तरीके से फैलाए जा रहे थे और इनके पीछे ‘हैदरी दल’ नाम का एक समूह सक्रिय था।
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यह समूह खुद को कुछ हिंदू संगठनों की तर्ज पर बना हुआ बताता था और युवाओं को भड़काने का काम कर रहा था। पुलिस की साइबर सेल ने जब इन पोस्ट्स और वीडियो की तकनीकी जांच की, तो पाया गया कि कई वीडियो फर्जी थे, कुछ को एडिट करके गलत संदर्भ में पेश किया गया था।
मजहर की भूमिका और गिरफ्तारी
जांच के दौरान पुलिस की नजर मजहर नाम के युवक पर गई, जो बरेली का रहने वाला है। पुलिस का दावा है कि मजहर ही इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। वह सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़ता, भड़काऊ संदेश भेजता और विवादित वीडियो शेयर करता था।
पुलिस ने मजहर को हिरासत में लेकर जब पूछताछ की, तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। अधिकारियों के अनुसार, मजहर का मकसद केवल लोकप्रियता हासिल करना नहीं था, बल्कि समाज में डर और तनाव का माहौल बनाना भी था।
महिलाओं के साथ अभद्रता के आरोप
इस मामले को और गंभीर बनाता है मजहर पर लगा महिलाओं के अपमान का आरोप। पुलिस का कहना है कि आरोपी सार्वजनिक स्थानों पर युवतियों के साथ अभद्र व्यवहार करता था और उसके वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालता था। ऐसे वीडियो न केवल महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाते थे, बल्कि समाज में गलत संदेश भी फैलाते थे।
महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और मांग की है कि ऐसे मामलों में सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
सोशल मीडिया बना हथियार
पुलिस का मानना है कि मजहर और उसका समूह सोशल मीडिया को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा था। फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर बनाए गए कई फर्जी अकाउंट्स के जरिए नफरत फैलाने वाली सामग्री पोस्ट की जाती थी।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में एक व्यक्ति अकेले नहीं, बल्कि एक छोटा नेटवर्क काम करता है, जो कंटेंट को वायरल करने में मदद करता है। पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है कि मजहर के साथ और कौन-कौन लोग जुड़े थे।
कोर्ट में पेशी और जेल भेजा गया
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने मजहर को कोर्ट में पेश किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द से भी जुड़ा हुआ है।
पुलिस की सख्त चेतावनी
इस पूरे मामले के बाद बरेली पुलिस ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर समाज को तोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध वीडियो या पोस्ट को बिना जांचे साझा न करें और अगर उन्हें ऐसा कोई कंटेंट दिखे, तो तुरंत पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें।
समाज के लिए बड़ा संदेश
यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए एक चेतावनी भी है। डिजिटल युग में जहां सोशल मीडिया ताकत बन चुका है, वहीं उसका गलत इस्तेमाल समाज को नुकसान पहुंचा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं को सोशल मीडिया की जिम्मेदारी समझनी होगी और नफरत के बजाय सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देना होगा। कानून अपना काम करेगा, लेकिन समाज की जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है।
The arrest of Haidari Dal chief Mazhar in Bareilly highlights growing concerns over social media hate, fake video circulation, and cyber crimes in India. Bareilly police took swift action against the accused for spreading communal tension, harassing women in public places, and misusing social media platforms to influence youth. This case underscores the importance of strict monitoring of hate speech, fake content, and online abuse to maintain social harmony.






