AIN NEWS 1: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के दिन एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी। इस घटना के केंद्र में हैं ज्योतिषपीठ बद्रीनाथ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रयागराज पुलिस प्रशासन। विवाद उस वक्त शुरू हुआ, जब शंकराचार्य के शिष्यों और पुलिस अधिकारियों के बीच संगम क्षेत्र में प्रवेश को लेकर बहस हो गई।
मौनी अमावस्या पर क्या हुआ?
मौनी अमावस्या का दिन हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन संगम में स्नान करने के लिए लाखों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचते हैं। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी इसी दिन संगम नोज पर स्नान करने जा रहे थे। लेकिन उनके काफिले को रास्ते में ही पुलिस द्वारा रोक दिया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण का हवाला देते हुए आगे बढ़ने से मना कर दिया। इसी बात को लेकर शंकराचार्य के शिष्यों और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। देखते ही देखते यह विवाद धक्का-मुक्की और मारपीट में बदल गया।
संगम स्नान अधूरा रह गया
घटना से आहत शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने संगम नोज पर स्नान करने का कार्यक्रम रद्द कर दिया। उनकी पालकी को वहीं से मोड़कर शिविर की ओर ले जाया गया। इसके बाद शंकराचार्य अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह केवल उनका व्यक्तिगत अपमान नहीं है, बल्कि सनातन परंपरा और संत समाज का अपमान है। शंकराचार्य ने प्रशासन से सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए कहा कि जब तक दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, वह धरना समाप्त नहीं करेंगे।
किस पर लगाया गया आरोप?
इस पूरे विवाद के लिए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सीधे तौर पर प्रयागराज पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि पुलिस कमिश्नर के निर्देशों के चलते उनके साथ यह व्यवहार किया गया।
इसके बाद से ही सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा कि आखिर कौन हैं जोगिंदर कुमार, जिनके नाम पर इतना बड़ा विवाद खड़ा हो गया है?
👮♂️ कौन हैं प्रयागराज पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार?
जोगिंदर कुमार भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के वरिष्ठ अधिकारी हैं। वे एक अनुशासित, सख्त और प्रशासनिक अनुभव से भरपूर अधिकारी माने जाते हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और संवेदनशील राज्य में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।
शैक्षणिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि
जोगिंदर कुमार ने प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है।
वे सिविल सेवा परीक्षा पास कर IPS बने।
कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और प्रशासनिक सख्ती के लिए जाने जाते हैं।
पहले कहां-कहां रह चुके हैं तैनात?
प्रयागराज से पहले जोगिंदर कुमार कई जिलों और कमिश्नरेट सिस्टम में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
उन्होंने DIG, IG और पुलिस कमिश्नर जैसे पदों पर काम किया है।
बड़े धार्मिक आयोजनों और संवेदनशील परिस्थितियों को संभालने का उन्हें लंबा अनुभव है।
प्रयागराज जैसे शहर में जिम्मेदारी
प्रयागराज एक धार्मिक, ऐतिहासिक और प्रशासनिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण शहर है। यहां माघ मेला, कुंभ और अन्य बड़े आयोजन होते रहते हैं। ऐसे में पुलिस कमिश्नर की भूमिका अत्यंत अहम हो जाती है।
माघ मेले के दौरान सुरक्षा, ट्रैफिक, भीड़ नियंत्रण और वीआईपी मूवमेंट को संतुलित रखना पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होता है।
🧩 प्रशासन बनाम संत समाज की टकराहट
इस घटना के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि धार्मिक गुरुओं और प्रशासन के बीच संवाद की कमी क्यों हो रही है। संत समाज का कहना है कि शंकराचार्य जैसे उच्च पद पर आसीन संत के साथ ऐसा व्यवहार स्वीकार्य नहीं है।
वहीं प्रशासनिक सूत्रों का तर्क है कि मौनी अमावस्या पर अत्यधिक भीड़ होने के कारण कुछ सख्त फैसले लेने पड़े, जिससे स्थिति बिगड़ गई।
क्या सुलझेगा मामला?
फिलहाल शंकराचार्य अपने रुख पर अडिग हैं।
वे दोषी अधिकारियों से सार्वजनिक माफी की मांग कर रहे हैं।
संत समाज का एक बड़ा वर्ग उनके समर्थन में आ गया है।
अब सबकी नजर राज्य सरकार और उच्च प्रशासनिक स्तर पर होने वाले फैसले पर टिकी हुई है।
प्रयागराज माघ मेला विवाद सिर्फ एक दिन की घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक संवेदनशीलता, धार्मिक सम्मान और संवाद की कमी का प्रतीक बन चुका है। पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार एक अनुभवी अधिकारी हैं, लेकिन इस विवाद ने उनके कार्यकाल को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या प्रशासन और संत समाज के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या यह मामला और तूल पकड़ता है।
The controversy at the Prayagraj Magh Mela has brought Police Commissioner Joginder Kumar into the spotlight after Shankaracharya Avimukteshwaranand accused the administration of stopping him from taking a holy dip at the Sangam on Mauni Amavasya. The incident has raised serious questions about crowd management, religious sensitivity, and the role of Uttar Pradesh Police during major spiritual events like the Magh Mela in Prayagraj.


















