AIN NEWS 1: कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह कोई बयान या लेख नहीं, बल्कि केरल विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी के भीतर उभरती असहज स्थिति है। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी के एक हालिया कार्यक्रम में कथित तौर पर हुए अपमान से शशि थरूर आहत हैं और इसी नाराज़गी के चलते उन्होंने केरल कांग्रेस से जुड़ी एक अहम चुनावी बैठक से दूरी बना ली है।
हाई कमान की बैठक से दूरी, बढ़े सियासी संकेत
कांग्रेस हाई कमान ने केरल विधानसभा चुनावों की रणनीति तय करने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। इस बैठक में पार्टी के कई बड़े नेताओं को शामिल होना था, लेकिन शशि थरूर की गैरमौजूदगी ने सभी का ध्यान खींच लिया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, थरूर ने बैठक में शामिल न होने का फैसला जानबूझकर लिया, ताकि वे अपनी नाराज़गी का संकेत दे सकें।
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राहुल गांधी के कार्यक्रम में क्या हुआ?
सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी के हालिया केरल दौरे के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में शशि थरूर को अपेक्षित सम्मान नहीं मिला। कार्यक्रम की रूपरेखा, मंच व्यवस्था और नेतृत्व को लेकर कुछ ऐसे संकेत मिले, जिनसे थरूर खुद को नजरअंदाज किया हुआ महसूस कर रहे हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर शशि थरूर ने सार्वजनिक रूप से कोई सीधा बयान नहीं दिया है, लेकिन उनके कदम बहुत कुछ बयां कर रहे हैं।
अंदरखाने चल रही असहजता
कांग्रेस के भीतर यह कोई पहला मौका नहीं है जब शशि थरूर और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद की चर्चा सामने आई हो। बीते वर्षों में भी थरूर कई मुद्दों पर अपनी स्वतंत्र राय रखते रहे हैं। पार्टी के भीतर उन्हें एक पढ़े-लिखे, अंतरराष्ट्रीय सोच वाले और अलग पहचान रखने वाले नेता के तौर पर देखा जाता है। यही अलग पहचान कई बार संगठनात्मक राजनीति से टकराव की वजह भी बनती है।
केरल कांग्रेस में गुटबाजी का असर
केरल कांग्रेस पहले से ही गुटबाजी और नेतृत्व संकट से जूझ रही है। ऐसे में शशि थरूर जैसे बड़े चेहरे की नाराज़गी पार्टी के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है। माना जा रहा है कि थरूर की अनुपस्थिति से यह संदेश जा रहा है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा, खासकर तब जब चुनाव नज़दीक हों।
चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है असर
शशि थरूर केरल में कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय चेहरों में गिने जाते हैं। तिरुवनंतपुरम से सांसद होने के साथ-साथ उनकी छवि एक साफ-सुथरे और प्रबुद्ध नेता की रही है। यदि वे चुनावी तैयारियों से खुद को दूर रखते हैं, तो इसका सीधा असर पार्टी की रणनीति और मनोबल पर पड़ सकता है।
कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी
अब तक कांग्रेस की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पार्टी नेतृत्व इस मामले को तूल देने से बचता नजर आ रहा है। हालांकि, राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ऐसे मामलों को नज़रअंदाज़ करना लंबे समय में नुकसानदेह हो सकता है।
क्या मान-मनौव्वल की कोशिश होगी?
पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस हाई कमान शशि थरूर को मनाने की कोशिश कर सकता है। चुनाव से पहले किसी बड़े नेता की नाराज़गी को दूर करना पार्टी की प्राथमिकता हो सकती है। सवाल यही है कि क्या बातचीत से यह दूरी कम हो पाएगी या यह मतभेद और गहराएंगे।
विपक्ष को मिला मौका
कांग्रेस की इस अंदरूनी खींचतान पर विपक्षी दल भी नजर बनाए हुए हैं। बीजेपी और वाम दल पहले ही केरल कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल उठाते रहे हैं। शशि थरूर की गैरहाजिरी ने उन्हें एक नया मुद्दा दे दिया है।
आगे की राह
फिलहाल इतना साफ है कि शशि थरूर का यह कदम सिर्फ एक बैठक से दूरी नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर चल रही बेचैनी का संकेत है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस स्थिति को कैसे संभालती है और क्या शशि थरूर दोबारा सक्रिय भूमिका में नजर आते हैं या नहीं।
The absence of senior Congress leader Shashi Tharoor from a crucial Kerala Congress election meeting has sparked fresh debate about internal differences within the Congress party. Reports suggest that Tharoor felt insulted during a Rahul Gandhi event, leading to his decision to skip the meeting. As Kerala Assembly elections approach, this development highlights challenges for the Congress high command in maintaining unity. The situation underscores the importance of leadership coordination, internal harmony, and strategic planning in Indian politics, especially in politically sensitive states like Kerala.


















