AIN NEWS 1: हम जिस हवा में हर पल सांस ले रहे हैं, वही अगर धीरे-धीरे ज़हर बन जाए तो इसका असर हमारी सेहत पर सबसे पहले दिखता है। भारत के कई बड़े शहरों में वायु प्रदूषण अब केवल सर्दियों की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह सालभर की चुनौती बन चुका है। 29 जनवरी 2026 को सुबह 9 बजे तक उपलब्ध वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़े यही संकेत देते हैं कि देश के कई शहरों में हवा की हालत चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI, हवा में मौजूद प्रदूषक तत्वों की मात्रा को मापने का पैमाना है। यह सूचकांक जितना अधिक होता है, हवा उतनी ही अधिक प्रदूषित मानी जाती है। AQI का स्तर सीधे तौर पर सांस की बीमारियों, हृदय रोग और आंखों में जलन जैसी समस्याओं से जुड़ा होता है।
🔹 AQI की श्रेणियां क्या कहती हैं?
0–50 (अच्छी): स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित
51–100 (संतोषजनक): हल्का प्रभाव
101–200 (माध्यम): संवेदनशील लोगों को दिक्कत
201–300 (खराब): सभी के लिए नुकसानदेह
301–400 (बहुत खराब): गंभीर स्वास्थ्य खतरा
401 से ऊपर (गंभीर): आपात स्थिति जैसे हालात
🏙️ प्रमुख शहरों की हवा का हाल (29 जनवरी 2026, सुबह 9 बजे)
उत्तर भारत के कई शहरों में हवा “माध्यम” श्रेणी में दर्ज की गई है। दिल्ली की बात करें तो PGDAV कॉलेज, श्रीनिवासपुरी क्षेत्र में AQI 181 रिकॉर्ड किया गया, जो साफ बताता है कि यहां की हवा अब आम लोगों के लिए भी नुकसानदेह हो रही है। नोएडा के सेक्टर-116 में AQI 178 रहा, जबकि गुरुग्राम के विकास सदन इलाके में यह 164 दर्ज हुआ।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ भी इससे अछूती नहीं रही। तालकटोरा क्षेत्र में AQI 148 रहा, जो लंबे समय तक रहने पर स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। पटना के सरकारी हाई स्कूल, शिकरपुर इलाके में AQI 126 रिकॉर्ड किया गया।
पूर्वी भारत में कोलकाता की स्थिति और ज्यादा चिंताजनक रही। जादवपुर इलाके में AQI 198 तक पहुंच गया, जो “माध्यम” श्रेणी की ऊपरी सीमा पर है। अगर यही स्थिति बनी रही, तो यह जल्द ही “खराब” श्रेणी में जा सकता है।
🌿 राहत की सांस लेने वाले शहर
पूर्वोत्तर भारत का शिलांग इस सूची में एक सकारात्मक उदाहरण बनकर उभरा है। लम्पींगनगाड क्षेत्र में AQI केवल 55 रहा, जो संतोषजनक श्रेणी में आता है। चंडीगढ़ के सेक्टर-25 में AQI 78 दर्ज किया गया, जो अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति को दर्शाता है।
दक्षिण भारत की बात करें तो बेंगलुरु के पीण्या औद्योगिक क्षेत्र में AQI 79 रहा, जबकि हैदराबाद के बोलारम इंडस्ट्रियल एरिया में यह 166 तक पहुंच गया। चेन्नई के मनाली क्षेत्र में AQI 197 दर्ज किया गया, जो चिंता बढ़ाने वाला है।
मुंबई का देवनार इलाका, जो पहले से ही औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है, वहां AQI 155 रहा। यह स्तर खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए जोखिम भरा माना जाता है।
📊 कुल मिलाकर देश की तस्वीर
देशभर के आंकड़ों पर नजर डालें तो केवल 2 स्थानों पर हवा “अच्छी” श्रेणी में रही। 16 जगहों पर स्थिति “संतोषजनक” रही, जबकि 64 इलाकों में हवा “माध्यम” श्रेणी में दर्ज की गई। राहत की बात यह रही कि “खराब” और “बहुत खराब” श्रेणी में कोई स्थान दर्ज नहीं हुआ, लेकिन एक जगह पर AQI “गंभीर” श्रेणी में पहुंच गया, जो चेतावनी का साफ संकेत है।
⚠️ प्रदूषित हवा का असर
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक मध्यम से खराब AQI में सांस लेने से अस्थमा, एलर्जी, फेफड़ों की बीमारी और दिल से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
🛡️ खुद को कैसे बचाएं?
सुबह-शाम बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल करें
प्रदूषण ज्यादा होने पर खुली हवा में व्यायाम से बचें
घर के अंदर पौधे और एयर प्यूरीफायर मददगार हो सकते हैं
प्रशासन को प्रदूषण नियंत्रण नियमों का सख्ती से पालन कराना होगा
29 जनवरी 2026 की यह वायु गुणवत्ता रिपोर्ट साफ इशारा करती है कि देश के बड़े शहरों में हवा अब धीरे-धीरे स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। साफ हवा केवल सुविधा नहीं, बल्कि हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है।
(डेटा स्रोत: ओपनवेदरमैप, सुबह 9:00 बजे तक)
On 29 January 2026, the Air Quality Index (AQI) across major Indian cities showed moderate to unhealthy air pollution levels. Cities like Delhi, Mumbai, Kolkata, Chennai, Noida, and Gurugram recorded AQI values in the medium category, raising health concerns for residents. According to OpenWeatherMap data, air quality in India continues to fluctuate, highlighting the urgent need for pollution control and public awareness.


















