AIN NEWS 1: हम जिस हवा में हर पल सांस लेते हैं, वही हवा अगर ज़हरीली हो जाए तो इसका असर सीधे हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। बदलते मौसम, बढ़ते वाहन, औद्योगिक गतिविधियाँ और निर्माण कार्य—ये सभी कारण मिलकर देश के कई शहरों में वायु प्रदूषण को लगातार बढ़ा रहे हैं। 1 फरवरी 2026 को दोपहर 4:00 बजे तक देश के प्रमुख शहरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) यही संकेत देता है कि भारत के अधिकतर शहरी इलाकों में हवा अभी भी “मध्यम” श्रेणी में बनी हुई है।

🔍 वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) क्या बताता है?
AQI एक ऐसा पैमाना है जो यह बताता है कि किसी शहर की हवा इंसानों के लिए कितनी सुरक्षित या खतरनाक है। AQI जितना कम होता है, हवा उतनी ही साफ मानी जाती है। वहीं ज्यादा AQI का मतलब है—अधिक प्रदूषण और अधिक स्वास्थ्य जोखिम।
🏙️ उत्तर भारत के शहरों की स्थिति
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के नरेला इलाके में AQI 176 दर्ज किया गया, जो “मध्यम” श्रेणी में आता है। इसका मतलब है कि सामान्य लोगों के लिए स्थिति संभालने लायक है, लेकिन दमा, हृदय रोग या सांस से जुड़ी बीमारी वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
गुरुग्राम (विकास सदन) में AQI 164 रहा, जबकि नोएडा सेक्टर-125 में यह 151 दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से साफ है कि NCR क्षेत्र में हवा अभी भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (लालबाग, वेस्ट) में AQI 174 रिकॉर्ड किया गया। यह भी मध्यम स्तर का प्रदूषण दर्शाता है, जहां लंबे समय तक बाहर रहने से संवेदनशील लोगों को परेशानी हो सकती है।
🌆 पश्चिम भारत की हवा
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई (चकला – अंधेरी ईस्ट) में AQI 167 दर्ज हुआ। समुद्र के किनारे बसे होने के बावजूद मुंबई की हवा पूरी तरह साफ नहीं कही जा सकती, खासकर ट्रैफिक और औद्योगिक इलाकों में।
🌴 दक्षिण भारत के शहर
दक्षिण भारत के कई शहर अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में दिखे, लेकिन पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त नहीं।
चेन्नई (मनाली): AQI 169
हैदराबाद (बोलारम इंडस्ट्रियल एरिया): AQI 163
बेंगलुरु (BTM लेआउट): AQI 132
बेंगलुरु की हवा अन्य बड़े महानगरों की तुलना में थोड़ी बेहतर रही, लेकिन यहां भी AQI अभी “अच्छी” श्रेणी में नहीं पहुंच पाया है।
🌿 पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत
पूर्वी भारत में कोलकाता (जादवपुर) का AQI 159 रहा, जबकि पटना (डीआरएम ऑफिस, दानापुर) में यह 141 दर्ज किया गया। दोनों शहरों की हवा मध्यम श्रेणी में रही।
वहीं, उत्तर-पूर्व भारत से एक राहत भरी खबर सामने आई। शिलांग (लुम्प्यंगनगाड) में AQI मात्र 30 रहा, जो “अच्छी” श्रेणी में आता है। यह दर्शाता है कि कम औद्योगिकीकरण और ज्यादा हरियाली किस तरह हवा को साफ बनाए रख सकती है।
📊 AQI श्रेणियों का संक्षिप्त हाल
1 फरवरी 2026 को देशभर में AQI का वितरण इस प्रकार रहा:
अच्छी (0–50) : 5 शहर
संतोषजनक (51–100) : 21 शहर
मध्यम (101–200) : 56 शहर
खराब (201–300) : 0
बहुत खराब (301–400) : 0
गंभीर (401 से अधिक) : 1 शहर
यह आंकड़े बताते हैं कि राहत की बात यह है कि “खराब” और “बहुत खराब” श्रेणी में कोई बड़ा शहर नहीं रहा, लेकिन चिंता की बात यह भी है कि अधिकांश शहर अब भी मध्यम प्रदूषण से जूझ रहे हैं।
🩺 स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ सकता है?
मध्यम AQI में लंबे समय तक रहने से आंखों में जलन, गले में खराश, सिरदर्द और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बच्चों, बुज़ुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की ज़रूरत है।
🌱 आगे क्या ज़रूरी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अभी से ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में हालात फिर बिगड़ सकते हैं। सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल, पेड़-पौधों की संख्या बढ़ाना, निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन और औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण—ये सभी उपाय बेहद ज़रूरी हैं।
1 फरवरी 2026 को देश के अधिकतर शहरों की हवा “मध्यम” श्रेणी में रही। हालांकि यह स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। साफ हवा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की साझी जिम्मेदारी है।
The Air Quality Index (AQI) of Indian cities on February 1, 2026 shows that most major urban areas including Delhi, Mumbai, Chennai, Hyderabad, Kolkata, and Gurugram recorded moderate air pollution levels. According to OpenWeatherMap AQI data, while cities like Shillong reported good air quality, several metropolitan regions continue to struggle with rising pollution. Monitoring air quality levels and adopting sustainable practices is essential to protect public health and improve environmental conditions across India.


















