AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में कथित ‘हाफ एनकाउंटर’ को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मामला उस समय और गंभीर हो गया जब इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के एक सप्ताह के भीतर देवबंद कोर्ट के एसीजीएम परविंदर सिंह खुद देवबंद जेल पहुंच गए।
जेल में पहुंचकर उन्होंने उन कैदियों से सीधे सवाल-जवाब किए, जो पुलिस मुठभेड़ में घायल बताए जा रहे हैं। इस निरीक्षण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर पुलिस विभाग की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद बढ़ी संवेदनशीलता
दरअसल, हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक एनकाउंटर मामले की सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी की थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने कहा था कि उत्तर प्रदेश को ‘पुलिस राज्य’ बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया था कि कुछ मामलों में पुलिस अधिकारी समय से पहले प्रमोशन और प्रशंसा पाने की मंशा से आरोपियों के पैरों में गोली मारते हैं। यह टिप्पणी राज्य के पुलिस तंत्र के लिए एक बड़ा संदेश मानी गई थी। उस दौरान राज्य के डीजीपी राजीव कृष्ण और अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद भी मौजूद थे।
इसी पृष्ठभूमि में देवबंद जेल में एसीजीएम का निरीक्षण बेहद अहम माना जा रहा है।
जज खुद पहुंचे जेल, लाइन में खड़े कर पूछताछ
देवबंद कोर्ट के एसीजीएम परविंदर सिंह अचानक जेल पहुंचे और कथित ‘हाफ एनकाउंटर’ में घायल कैदियों को लाइन में खड़ा कर उनसे पूछताछ की।
सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने हर कैदी से अलग-अलग सवाल किए और घटना का पूरा विवरण जानने की कोशिश की। निरीक्षण के दौरान एक ऐसा कैदी सामने आया, जिसने कथित फर्जी एनकाउंटर के खिलाफ अदालत में याचिका भी दाखिल कर रखी है।
जज ने उससे विस्तार से बातचीत की और पूरी घटना को क्रमवार समझने की कोशिश की।
कैदी का आरोप: “शामली पार्क से उठाया गया”
कैदी ने दावा किया कि जिस दिन घटना हुई, उस दिन उसकी सहारनपुर में तारीख थी और वह बागपत से आ रहा था। उसका कहना है कि उसे शामली पार्क से उठाया गया, जबकि वह किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं था।
उसने यह भी कहा कि उसकी मोबाइल लोकेशन इस बात की पुष्टि कर सकती है कि वह पुलिस के बताए स्थान पर मौजूद नहीं था।
कैदी का आरोप है कि उसे चौकी ले जाकर करंट लगाया गया, बुरी तरह पीटा गया और उस पर अपराध कबूल करने का दबाव बनाया गया।
“जंगल में ले जाकर मारी गई गोली”
कैदी के अनुसार, शाम के समय उसे एक सुनसान जंगल में ले जाया गया। वहां थाने से बाइक मंगाई गई। उसने आरोप लगाया कि उसके पैर पर कपड़ा रखकर करीब आठ इंच की दूरी से गोली मारी गई।
उसका कहना है कि बाद में पुलिस ने खुद कट्टे से फायरिंग कर इसे मुठभेड़ का रूप दे दिया।
जब जज ने उससे पूछा कि गोली कैसे मारी गई, तो उसने जमीन पर बैठकर पूरा घटनाक्रम दोहराया। इस दौरान मौजूद अन्य कैदियों से भी पूछताछ की गई, जो ‘हाफ एनकाउंटर’ में घायल बताए जा रहे हैं।
‘हाफ एनकाउंटर’ शब्द क्यों चर्चा में?
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में अपराध नियंत्रण के लिए एनकाउंटर नीति को लेकर लगातार बहस होती रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की नीति अपनाई है।
हालांकि, कई मामलों में यह आरोप भी लगे हैं कि कुछ एनकाउंटर ‘हाफ एनकाउंटर’ होते हैं — यानी आरोपी को जान से नहीं मारा जाता, बल्कि पैर में गोली मारकर घायल कर दिया जाता है।
इस तरह की घटनाओं पर मानवाधिकार संगठनों और अदालतों ने समय-समय पर सवाल उठाए हैं।
पुलिस की चुप्पी और बढ़ते सवाल
इस पूरे प्रकरण पर पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न ही आरोपों का खंडन किया गया है और न ही विस्तृत स्पष्टीकरण दिया गया है।
वायरल वीडियो के बाद से यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि आरोपों में सच्चाई पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई संभव है।
दूसरी ओर, पुलिस सूत्रों का कहना है कि एनकाउंटर पूरी प्रक्रिया के तहत किए जाते हैं और हर मामले की न्यायिक जांच भी होती है।
न्यायिक निगरानी का संकेत?
देवबंद जेल में एसीजीएम का अचानक निरीक्षण यह संकेत देता है कि अदालतें अब ऐसे मामलों में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाने के मूड में हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणी के बाद यह कदम न्यायिक निगरानी को और मजबूत करने की दिशा में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि न्यायपालिका सख्त रुख अपनाती है, तो भविष्य में कथित ‘हाफ एनकाउंटर’ जैसे मामलों पर अंकुश लग सकता है।
आगे क्या?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कोर्ट इस मामले में आगे क्या रुख अपनाता है। क्या इन आरोपों की स्वतंत्र जांच होगी? क्या संबंधित पुलिसकर्मियों से जवाब-तलब किया जाएगा?
फिलहाल इतना तय है कि सहारनपुर का यह मामला प्रदेश की कानून-व्यवस्था और एनकाउंटर नीति पर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ चुका है।
A major controversy has erupted in Saharanpur over an alleged fake half encounter involving the UP Police. Following strong remarks by the Allahabad High Court on encounter practices in Uttar Pradesh, a Deoband court judge inspected jail inmates and questioned injured prisoners. The case has raised serious questions about police encounter methods, human rights concerns, and judicial oversight under the Yogi Adityanath government, with DGP Rajiv Krishna and senior officials previously present during court observations.


















