AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में कोडीन आधारित कफ सिरप की अवैध तस्करी से जुड़े मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 28 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के पिता के नाम पर दर्ज संपत्तियों के खिलाफ की गई है। जांच एजेंसियों का दावा है कि ये संपत्तियां फर्जी ई-वे बिल और गैरकानूनी बिक्री से अर्जित धन से खरीदी गई थीं।
क्या है पूरा मामला?
वाराणसी में पिछले कुछ समय से कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध सप्लाई को लेकर पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की नजर बनी हुई थी। जांच के दौरान सामने आया कि मेडिकल उपयोग के लिए बनने वाला यह कफ सिरप बड़ी मात्रा में गैरकानूनी तरीके से बेचा जा रहा था। कोडीन एक नियंत्रित दवा है, जिसका दुरुपयोग नशे के रूप में भी किया जाता है।
जांच एजेंसियों को शक हुआ कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे संगठित गिरोह काम कर रहा है, जो फर्जी कागजातों के सहारे दवाओं की सप्लाई दिखाकर असल में उन्हें अवैध बाजार में बेच रहा था।
फर्जी ई-वे बिल का खेल
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी गिरोह ने दवाओं की ढुलाई और बिक्री को वैध दिखाने के लिए फर्जी ई-वे बिल तैयार किए। इन दस्तावेजों के आधार पर माल को एक राज्य से दूसरे राज्य तक भेजा जाता था। कागजों में इसे कानूनी व्यापार बताया जाता था, लेकिन वास्तविकता में कफ सिरप की खेप अवैध रूप से सप्लाई की जा रही थी।
जांच में यह भी सामने आया कि कई बार एक ही बिल पर अलग-अलग खेप भेजी गईं। इससे सरकार को टैक्स का नुकसान हुआ और अवैध कारोबारियों को मोटा मुनाफा मिला।
28 करोड़ की संपत्ति कुर्क
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस ने आरोपी और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति का आकलन करना शुरू किया। इसी क्रम में पता चला कि मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के पिता के नाम पर शहर के अलग-अलग इलाकों में महंगी जमीनें, मकान और व्यावसायिक संपत्तियां दर्ज हैं।
जांच एजेंसियों ने वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की और पाया कि संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल की गई रकम का स्रोत संदिग्ध है। पुलिस का दावा है कि यह धन अवैध कफ सिरप बिक्री से अर्जित किया गया था।
इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत करीब 28 करोड़ रुपये की संपत्तियों को चिन्हित कर कुर्क कर लिया गया। कुर्की की कार्रवाई वाराणसी के कई प्रमुख इलाकों में एक साथ की गई, जिससे पूरे शहर में हलचल मच गई।
मुख्य आरोपी अब भी फरार
इस मामले का मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई हैं। संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और उसके संपर्कों की जांच की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी के मोबाइल फोन और डिजिटल ट्रांजेक्शन की भी जांच की जा रही है, ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके।
पुलिस का सख्त संदेश
उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस कार्रवाई के जरिए साफ संदेश दिया है कि अवैध नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों को भी जब्त किया जाएगा, ताकि अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ी जा सके।
पुलिस का मानना है कि जब तक अवैध कमाई पर चोट नहीं की जाएगी, तब तक इस तरह के संगठित अपराध पर पूरी तरह लगाम लगाना मुश्किल है।
युवाओं पर पड़ता है असर
कोडीन आधारित कफ सिरप का दुरुपयोग खासतौर पर युवाओं के बीच तेजी से बढ़ा है। सस्ती कीमत और आसानी से उपलब्धता के कारण यह नशे का एक खतरनाक विकल्प बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक कोडीन का दुरुपयोग स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। इससे मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में पुलिस की यह कार्रवाई न केवल कानून व्यवस्था के लिहाज से, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आगे क्या?
अब जांच एजेंसियां इस नेटवर्क की पूरी परतें खोलने में जुटी हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि इस तस्करी में और कौन-कौन शामिल था। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस अवैध कारोबार के तार अन्य जिलों या राज्यों से जुड़े हैं।
संभावना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़ी गिरफ्तारियां और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई सामने आ सकती है।
In a major crackdown in the Varanasi cough syrup case, Uttar Pradesh Police attached properties worth ₹28 crore linked to the father of the main accused in a codeine trafficking racket. The investigation revealed the use of fake e-way bills and illegal drug sales to distribute codeine-based cough syrup across multiple regions. Authorities believe the assets were acquired through proceeds of illegal narcotics trade, while the prime accused remains absconding and search operations continue.


















