स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बयान: क्या योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनने के बाद 40 से ज्यादा मुकदमे हटवा लिए? फैक्ट चेक

AIN NEWS 1: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने हाल ही में एक बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा—
“नजीर है आदित्यनाथ नाम का व्यक्ति, जिसके ऊपर 40 से ज्यादा मुकदमे थे। जब मुख्यमंत्री बने तो सब मुकदमे अपने ऊपर से हटा लिए।”
यह बयान सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़ा है। स्वाभाविक है कि ऐसा दावा राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बने। लेकिन सवाल यह है—क्या यह दावा तथ्यों पर आधारित है? आइए बिंदुवार समझते हैं।
दावा क्या है?
बयान के दो मुख्य हिस्से हैं:
योगी आदित्यनाथ के ऊपर 40 से ज्यादा मुकदमे थे।
मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने सभी मुकदमे हटवा लिए।
फैक्ट चेक के लिए इन दोनों बिंदुओं की अलग-अलग जांच जरूरी है।
क्या 40 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे?
योगी आदित्यनाथ 2017 में पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। उससे पहले वे गोरखपुर से कई बार सांसद रह चुके थे। चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार को अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी चुनाव आयोग को हलफनामे में देनी होती है।
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध चुनावी हलफनामों के अनुसार, योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कुछ आपराधिक मामले दर्ज थे। ये मामले मुख्यतः राजनीतिक आंदोलनों, भाषणों या कानून-व्यवस्था से जुड़े विवादों से संबंधित थे।
लेकिन उपलब्ध रिकॉर्ड में “40 से ज्यादा” मामलों की पुष्टि नहीं मिलती। सार्वजनिक दस्तावेजों में दर्ज मामलों की संख्या इससे काफी कम बताई गई है।
इसलिए पहला दावा — कि उनके खिलाफ 40 से अधिक मुकदमे थे — उपलब्ध प्रमाणों से पुष्ट नहीं होता।
क्या मुख्यमंत्री बनने के बाद सभी मुकदमे हटा दिए गए?
अब दूसरे दावे पर आते हैं।
2017 में उत्तर प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद राज्य सरकार ने कुछ पुराने मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की थी। सरकार का कहना था कि कई मामले राजनीतिक प्रदर्शनों या धरनों से जुड़े थे और गंभीर अपराध की श्रेणी में नहीं आते थे।
लेकिन यहां एक अहम बात समझना जरूरी है—
भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 321 के तहत किसी भी मामले को वापस लेने के लिए अदालत की अनुमति अनिवार्य होती है। राज्य सरकार अभियोजन वापस लेने की सिफारिश कर सकती है, लेकिन अंतिम फैसला न्यायालय ही करता है।
इसका अर्थ यह है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई भी व्यक्ति अपने खिलाफ मुकदमे सीधे “खुद से” खत्म नहीं कर सकता। पूरी प्रक्रिया न्यायिक जांच और अदालत की मंजूरी से गुजरती है।
ऐसे में यह कहना कि “मुख्यमंत्री बनते ही सभी मुकदमे हटवा लिए गए”, कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं लगता।
राजनीतिक बयान या तथ्य?
राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप सामान्य बात है। कई बार बयान प्रतीकात्मक या राजनीतिक संदेश देने के लिए दिए जाते हैं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह बयान भी एक राजनीतिक टिप्पणी के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन जब बात किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की हो, तो तथ्यों की पुष्टि जरूरी हो जाती है।
उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर:
40 से अधिक मुकदमों का दावा प्रमाणित नहीं है।
सभी मुकदमे हटवा लेने का दावा भी कानूनी प्रक्रिया से मेल नहीं खाता।
व्यापक संदर्भ
योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक यात्रा काफी लंबी रही है। वे हिंदुत्व की राजनीति और आक्रामक भाषण शैली के लिए जाने जाते रहे हैं। अतीत में उनके कुछ भाषणों को लेकर विवाद भी हुए, जिन पर मुकदमे दर्ज हुए थे।
लेकिन मुकदमे दर्ज होना और अदालत द्वारा दोष सिद्ध होना दो अलग बातें हैं। कई मामलों में अदालतें सबूतों के आधार पर फैसला करती हैं—या तो मामला खारिज होता है या चलता रहता है।
इसलिए किसी भी दावे को तथ्य के रूप में स्वीकार करने से पहले आधिकारिक रिकॉर्ड देखना जरूरी है।
फैक्ट चेक के आधार पर निष्कर्ष इस प्रकार है:
✔ योगी आदित्यनाथ के खिलाफ पहले कुछ आपराधिक मामले दर्ज थे।
❌ लेकिन “40 से ज्यादा” मुकदमों का ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
❌ मुख्यमंत्री बनने के बाद “सभी मुकदमे हटवा लेने” का दावा भी कानूनी प्रक्रिया से मेल नहीं खाता।
इसलिए यह बयान अतिरंजित प्रतीत होता है और उपलब्ध तथ्यों से पूरी तरह पुष्ट नहीं होता।
लोकतंत्र में पारदर्शिता और तथ्यों पर आधारित बहस ही स्वस्थ राजनीति की पहचान है। इसलिए किसी भी दावे को साझा करने से पहले उसकी तथ्यात्मक जांच आवश्यक है।
This fact check analyzes the statement made by Swami Avimukteshwaranand Saraswati regarding Yogi Adityanath and the claim that more than 40 criminal cases were removed after he became Chief Minister of Uttar Pradesh. Based on publicly available election affidavits and legal procedures under the Criminal Procedure Code (CrPC), there is no verified evidence confirming that Yogi Adityanath had over 40 criminal cases or that all such cases were automatically withdrawn after assuming office. The controversy highlights the importance of political accountability, legal process, and verified data in Uttar Pradesh politics.


















