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JNU में कन्हैया कुमार का प्रदर्शन, ‘ब्राह्मणवाद से आज़ादी’ के नारे और DU में पत्रकार से बदसलूकी पर मचा बवाल!

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AIN NEWS 1: देश की राजधानी दिल्ली इन दिनों विश्वविद्यालय राजनीति और अभिव्यक्ति की आज़ादी को लेकर गरमाई हुई है। एक ओर यूजीसी (University Grants Commission) से जुड़े फैसले को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, तो दूसरी ओर Kanhaiya Kumar का एक पुराना अंदाज एक बार फिर सुर्खियों में है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, यानी Jawaharlal Nehru University (JNU) से सामने आए एक वीडियो में कन्हैया कुमार छात्रों के बीच डफली बजाते दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान कुछ छात्रों द्वारा ‘आजादी’ के नारे लगाए जा रहे हैं, जिनमें ‘ब्राह्मणवाद से आजादी’ और ‘मनुवाद से आजादी’ जैसे नारे भी शामिल बताए जा रहे हैं।

https://x.com/ActivistSantosh/status/2022702556489957787?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2022702556489957787%7Ctwgr%5E453e2e34c4dea3f2dc09551dac27e56850a21b4b%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.patrika.com%2Fnew-delhi-news%2Fcongress-leader-kanhaiya-kumars-old-side-seen-in-jnu-20352613

🎓 यूजीसी विवाद क्या है?

बताया जा रहा है कि यूजीसी से जुड़ा मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इस बीच देश के कई विश्वविद्यालयों में समर्थन और विरोध दोनों तरह के प्रदर्शन देखे जा रहे हैं। कुछ छात्र संगठन यूजीसी के फैसले के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं, तो कुछ इसके विरोध में अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

JNU में हुए प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि यह प्रदर्शन यूजीसी के समर्थन में आयोजित कार्यक्रम का हिस्सा था, जबकि कुछ इसे व्यापक छात्र आंदोलन का हिस्सा बता रहे हैं।

🥁 कन्हैया कुमार की भूमिका

वीडियो में कन्हैया कुमार छात्रों के साथ मौजूद हैं और डफली बजाते नजर आ रहे हैं। उनका यह अंदाज नया नहीं है। छात्र राजनीति के दौर में भी वे इसी तरह गीतों और नारों के माध्यम से विरोध दर्ज कराते रहे हैं।

हालांकि, वीडियो को लेकर विवाद इस बात पर ज्यादा है कि प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से ‘ब्राह्मणवाद से आजादी’ जैसे नारे लगाए गए। इस पर सोशल मीडिया में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

कुछ यूजर्स का दावा है कि यह प्रदर्शन JNUSU अध्यक्ष अदिति मिश्रा के नेतृत्व में हुआ, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

🏫 DU में पत्रकार से कथित बदसलूकी

इसी विवाद के समानांतर University of Delhi (DU) में भी यूजीसी के समर्थन में प्रदर्शन हुआ। लेकिन यहां मामला उस समय गंभीर हो गया जब एक महिला पत्रकार ने अपने साथ बदसलूकी और जातिसूचक टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया।

पत्रकार रुचि तिवारी ने दावा किया कि वह प्रदर्शन की रिपोर्टिंग के लिए पहुंची थीं। उनके अनुसार, वहां मौजूद भीड़ में से किसी ने उनका नाम जोर से पुकारा और फिर उनकी जाति के बारे में पूछताछ शुरू कर दी।

उनका आरोप है कि पहचान सामने आते ही कुछ लोगों ने भीड़ को उकसाया, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके साथ गाली-गलौज की गई और गंभीर धमकियां दी गईं।

यह घटना ऐसे समय में हुई जब विश्वविद्यालय परिसर में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल बना हुआ था।

⚖️ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम जिम्मेदारी

दोनों घटनाओं ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—

क्या विश्वविद्यालय परिसर में राजनीतिक नारों की कोई सीमा होनी चाहिए?

क्या विरोध के नाम पर किसी भी विचारधारा या समुदाय के खिलाफ नारे लगाना उचित है?

पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है?

विश्वविद्यालय लंबे समय से विचार-विमर्श और बहस के केंद्र रहे हैं। लेकिन जब बहस की जगह आरोप-प्रत्यारोप और भीड़तंत्र ले लेता है, तो लोकतांत्रिक मूल्यों पर असर पड़ता है।

🧩 सोशल मीडिया पर बढ़ती ध्रुवीकरण

इन घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर भी माहौल बेहद ध्रुवीकृत नजर आया। एक पक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा बता रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे समाज में विभाजन पैदा करने वाला कदम कह रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालयों में बहस और असहमति लोकतंत्र की ताकत हैं, लेकिन संवाद और गरिमा की मर्यादा भी उतनी ही जरूरी है।

📣 आगे क्या?

यूजीसी का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अदालत का फैसला आने तक यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।

दूसरी ओर, DU में पत्रकार से कथित बदसलूकी की घटना ने मीडिया की सुरक्षा और कैंपस कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जरूरत इस बात की है कि विश्वविद्यालयों में असहमति और विरोध शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में हो। किसी भी तरह की हिंसा, जातिसूचक टिप्पणी या धमकी लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करती है।

The controversy surrounding Kanhaiya Kumar at Jawaharlal Nehru University (JNU) has intensified amid the ongoing UGC dispute, with slogans such as “Azadi from Brahmanism” raising political debate. Meanwhile, at Delhi University (DU), a female journalist alleged caste-based harassment during a UGC support protest. The incidents have sparked discussions on freedom of expression, campus politics, caste sensitivity, and journalist safety in Indian universities, as the UGC case remains under review in the Supreme Court of India.

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