AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाले एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। पुलिस ने ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो बिना परीक्षा दिलाए ही युवाओं को बीटेक, बी.फार्मा और एलएलबी जैसी पेशेवर डिग्रियां उपलब्ध कराने का दावा करता था। इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड भी शामिल है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और देश के कई राज्यों में अपना जाल फैला चुका था। शुरुआती जांच के मुताबिक, इस नेटवर्क की पहुंच 9 राज्यों की करीब 14 यूनिवर्सिटी तक बताई जा रही है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 900 से अधिक संदिग्ध मार्कशीट और डिग्रियां बरामद की हैं, जिन्हें फर्जी तरीके से तैयार किया गया था।
🎓 बिना पढ़ाई मिल रही थी प्रोफेशनल डिग्री
गिरोह का काम करने का तरीका बेहद सुनियोजित और चौंकाने वाला था। यह लोग उन छात्रों और नौकरी के इच्छुक युवाओं को निशाना बनाते थे, जो किसी कारणवश नियमित पढ़ाई या परीक्षा में शामिल नहीं हो पाते थे। ऐसे लोगों को यह भरोसा दिलाया जाता था कि उन्हें बिना कॉलेज गए और बिना परीक्षा दिए ही मान्यता प्राप्त डिग्री दिला दी जाएगी।
इसके बदले में उम्मीदवारों से मोटी रकम वसूली जाती थी। कोर्स और यूनिवर्सिटी के आधार पर यह रकम हजारों से लेकर लाखों रुपये तक पहुंच जाती थी। कई मामलों में अभ्यर्थियों को यह यकीन दिलाया जाता था कि उनकी डिग्री पूरी तरह वैध होगी और ऑनलाइन वेरिफिकेशन में भी सही दिखाई देगी।
🛠️ तीन अलग-अलग तरीकों से होता था खेल
पुलिस के अनुसार, गिरोह मुख्य रूप से तीन तरीकों से इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देता था:
बैकडेट में मार्कशीट तैयार करना
अभ्यर्थियों के नाम से पुराने साल की मार्कशीट और रिजल्ट तैयार कर दिए जाते थे, जिससे यह लगे कि उन्होंने नियमित रूप से कोर्स पूरा किया है।
करंट एडमिशन दिखाकर डिग्री दिलाना
कुछ मामलों में उम्मीदवारों का नाम किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दाखिले के रूप में दर्ज कर दिया जाता था, लेकिन उन्हें न तो कक्षाओं में जाना होता था और न ही परीक्षा देनी होती थी।
सीधे फर्जी सर्टिफिकेट उपलब्ध कराना
जिन लोगों को जल्दी डिग्री चाहिए होती थी, उन्हें सीधे नकली मार्कशीट और डिग्री सर्टिफिकेट दे दिए जाते थे।
🧑💼 यूनिवर्सिटी कर्मचारियों की भूमिका पर भी शक
जांच के दौरान कुछ ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे यह आशंका जताई जा रही है कि इस पूरे रैकेट को चलाने में कुछ विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों की भी भूमिका हो सकती है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं अंदरूनी मिलीभगत के जरिए ही असली फॉर्मेट में फर्जी दस्तावेज तैयार तो नहीं किए जा रहे थे।
हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी भी कर्मचारी की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां संबंधित संस्थानों के रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की पड़ताल कर रही हैं।
🌐 9 राज्यों तक फैला था नेटवर्क
इस गिरोह का नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। पुलिस को ऐसे कई दस्तावेज मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि इस रैकेट का संबंध देश के अलग-अलग राज्यों से था। आरोपी अलग-अलग राज्यों में एजेंट के जरिए छात्रों से संपर्क करते थे और उन्हें डिग्री दिलाने का भरोसा देते थे।
ऑनलाइन माध्यमों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल संभावित ग्राहकों तक पहुंचने के लिए किया जाता था। कई बार उम्मीदवारों को यह विश्वास दिलाने के लिए नकली वेबसाइट और पोर्टल भी तैयार किए जाते थे।
🚔 आगे की जांच जारी
फिलहाल पुलिस इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और फरार अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। बरामद दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने लोगों को अब तक फर्जी डिग्री जारी की गई है।
साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इन डिग्रियों के आधार पर किसी ने सरकारी या निजी नौकरी तो हासिल नहीं की है। अगर ऐसा पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
यह मामला न केवल शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि रोजगार की होड़ में कुछ लोग किस हद तक गलत रास्ता अपनाने को तैयार हो जाते हैं। पुलिस का कहना है कि इस तरह के मामलों पर सख्ती से कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
Kanpur Police has busted a major fake degree racket that was allegedly providing BTech, LLB, and BPharma degrees without exams across 9 states and 14 universities in India. The accused used fraudulent methods including backdated marksheets, fake university admissions, and direct forged certificates to help candidates secure jobs using fake qualifications. Over 900 fake marksheets and degrees were recovered during the raid, and the investigation is now focusing on the possible involvement of university staff and clerks in this large-scale education scam.


















