AIN NEWS 1: 2 फरवरी को महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान हादसे ने देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। इस घटना के बाद विमानन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे, जिसके चलते भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA ने तुरंत एक्शन लेते हुए गैर-निर्धारित (नॉन-शेड्यूल्ड) एयर ऑपरेटरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।
इस हादसे के मद्देनज़र DGCA ने चार्टर विमानों और हेलीकॉप्टर सेवाएं संचालित करने वाली कंपनियों के लिए विशेष सुरक्षा ऑडिट (Special Safety Audit) का आदेश जारी किया। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में संचालित हो रही निजी विमानन सेवाएं निर्धारित सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन कर रही हैं या नहीं।
क्या है नॉन-शेड्यूल्ड एयर ऑपरेटर?
नॉन-शेड्यूल्ड एयर ऑपरेटर वे विमानन कंपनियां होती हैं जो नियमित वाणिज्यिक उड़ानों की तरह तय समय-सारणी (Schedule) के अनुसार उड़ानें संचालित नहीं करतीं। ये कंपनियां आमतौर पर चार्टर सेवाएं, कॉर्पोरेट यात्रा, मेडिकल इमरजेंसी फ्लाइट्स और वीआईपी मूवमेंट जैसी विशेष जरूरतों के लिए विमान उपलब्ध कराती हैं।
हाल के वर्षों में चार्टर विमान सेवाओं की मांग में तेजी आई है, जिसके कारण इस क्षेत्र में कई नई कंपनियों का प्रवेश हुआ है। हालांकि, इसके साथ ही सुरक्षा मानकों को लेकर निगरानी की आवश्यकता भी बढ़ गई है।
14 ऑपरेटरों पर चला ऑडिट अभियान
DGCA द्वारा शुरू किए गए इस विशेष अभियान के तहत पहले चरण में कुल 14 नॉन-शेड्यूल्ड एयर ऑपरेटरों का चयन किया गया। इन ऑपरेटरों के विमानों की तकनीकी स्थिति, मेंटेनेंस रिकॉर्ड, पायलट ट्रेनिंग, ऑपरेशनल प्रक्रियाओं और सुरक्षा प्रोटोकॉल की गहन जांच की गई।
इस सूची में चार्टर विमान और हेलीकॉप्टर सेवाएं देने वाली कई प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। जांच का मकसद किसी विशेष कंपनी को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पूरे सेक्टर में सुरक्षा स्तर को मजबूत करना है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
रेडबर्ड एयरवेज का भी हुआ विशेष ऑडिट
इस विशेष ऑडिट प्रक्रिया के तहत Redbird Airways Private Limited का भी विस्तृत निरीक्षण किया गया। DGCA की तीन सदस्यीय टीम ने कंपनी के संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की।
इस टीम में शामिल थे:
विनीथ एस (ADAS)
मनोज पेडिशेट्टी (DDA-W)
कैप्टन सलोनी (FOI-A)
ऑडिट के दौरान विमान संचालन से जुड़े दस्तावेजों, सुरक्षा उपायों, फ्लाइट क्रू की योग्यता, विमान रखरखाव प्रणाली और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र का मूल्यांकन किया गया।
सुरक्षा मानकों पर रहेगा विशेष ध्यान
DGCA के इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चार्टर सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियां भी नियमित एयरलाइंस की तरह सख्त सुरक्षा मानकों का पालन करें। कई बार यह देखा गया है कि नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटरों में प्रक्रियात्मक लापरवाही या दस्तावेजी कमियां दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं।
स्पेशल ऑडिट के माध्यम से यह जांचा जा रहा है कि:
क्या विमानों का समय-समय पर मेंटेनेंस हो रहा है?
क्या पायलट्स की ट्रेनिंग और लाइसेंसिंग अपडेटेड है?
क्या ऑपरेशन टीम सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन कर रही है?
क्या आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं?
भविष्य में हो सकते हैं और ऑडिट
सूत्रों के मुताबिक, यह ऑडिट प्रक्रिया केवल पहले चरण तक सीमित नहीं रहेगी। DGCA आने वाले समय में और भी नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटरों की जांच कर सकता है। यदि किसी कंपनी में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी संभव है, जिसमें लाइसेंस निलंबन या संचालन पर रोक जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है।
विमानन क्षेत्र में बढ़ेगी जवाबदेही
बारामती हादसे के बाद उठाया गया यह कदम देश के निजी विमानन सेक्टर में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निरीक्षण और कड़े ऑडिट से सुरक्षा में सुधार होगा और यात्रियों का भरोसा भी मजबूत होगा।
After the Baramati plane crash on February 2, the Directorate General of Civil Aviation (DGCA) initiated a special safety audit of 14 non-scheduled air operators, including Redbird Airways Private Limited. The audit focuses on charter aircraft and helicopter operators in India to ensure strict compliance with aviation safety standards, pilot training protocols, aircraft maintenance records, and operational procedures, aiming to enhance passenger safety and prevent future aviation incidents.



















