AIN NEWS 1 | पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार पर राष्ट्रपति के संवैधानिक पद का अपमान करने का आरोप लगाया है। इस मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है।
पीएम मोदी ने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ हुआ व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है और नारी शक्ति इसे कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर राष्ट्रपति के सम्मान और प्रोटोकॉल की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
राष्ट्रपति के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल विवाद कैसे शुरू हुआ
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पश्चिम बंगाल में आयोजित 9वें इंटरनेशनल संथाली कॉन्क्लेव में शामिल होने पहुंची थीं। इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के किसी भी मंत्री की अनुपस्थिति और कार्यक्रम स्थल में बदलाव को लेकर राष्ट्रपति ने नाराजगी जताई।
राष्ट्रपति ने सार्वजनिक मंच से कहा कि आमतौर पर राष्ट्रपति के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री और राज्य के मंत्री मौजूद रहते हैं, लेकिन इस कार्यक्रम में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यक्रम को ऐसी जगह स्थानांतरित किया गया जहां लोगों की पहुंच मुश्किल थी।
कार्यक्रम स्थल बदलने पर राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया
मूल रूप से यह कार्यक्रम बिधाननगर में आयोजित होना था, लेकिन बाद में इसे सिलीगुड़ी के पास बागडोगरा एयरपोर्ट के नजदीक गोशाईपुर में स्थानांतरित कर दिया गया। प्रशासन ने इसके पीछे भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा कारणों का हवाला दिया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फांसीदेवा में आयोजित सभा में कहा कि कार्यक्रम को इतनी दूर स्थानांतरित करने के कारण कई लोग सम्मेलन में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि शायद प्रशासन को लगा होगा कि लोग नहीं पहुंच पाएंगे और कार्यक्रम सीमित रह जाएगा।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वह स्वयं भी आदिवासी समुदाय से आती हैं और संथाल समाज के इस सम्मेलन में अधिक लोगों की भागीदारी की उम्मीद थी।
ममता बनर्जी की अनुपस्थिति पर उठे सवाल
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि वह उन्हें अपनी छोटी बहन मानती हैं और यह जानना चाहती हैं कि क्या मुख्यमंत्री उनसे नाराज हैं।
उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर राष्ट्रपति के कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री और अन्य मंत्री उपस्थित रहते हैं, लेकिन इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति ने उन्हें आश्चर्यचकित किया।
पीएम मोदी और बीजेपी का आरोप
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई बीजेपी नेताओं ने इस घटना को राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान है और इससे संघीय व्यवस्था और संवैधानिक परंपराओं को ठेस पहुंची है।
बीजेपी का आरोप है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रपति के दौरे को आवश्यक सम्मान और प्रशासनिक सहयोग नहीं दिया।
ममता बनर्जी का जवाब
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए बीजेपी पर राजनीतिकरण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी राष्ट्रपति के नाम का इस्तेमाल करके पश्चिम बंगाल सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि कार्यक्रम में उनकी अनुपस्थिति पहले से तय कार्यक्रमों और प्रशासनिक कारणों की वजह से थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दस्तावेज भी साझा किया जिसमें कार्यक्रम स्थल बदलने के पीछे सुरक्षा और लॉजिस्टिक कारणों का उल्लेख किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी राज्य में राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।
पश्चिम बंगाल में बढ़ता राजनीतिक तनाव
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रोटोकॉल को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा बन गया है। केंद्र सरकार और बीजेपी इस मामले को संवैधानिक गरिमा से जोड़कर देख रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे चुनावी राजनीति से प्रेरित बता रही है।
आने वाले महीनों में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में यह मुद्दा राज्य की राजनीतिक बहस का अहम हिस्सा बन सकता है।


















