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मध्य पूर्व की जंग से बढ़ा ऊर्जा संकट, भारत ने कहा – आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित!

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मध्य पूर्व की जंग से बढ़ा ऊर्जा संकट, भारत ने कहा – आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित

AIN NEWS 1: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर अब दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। कई देशों में गैस और तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर भी दबाव दिखाई दे रहा है। इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार को संसद में भी चर्चा हुई, जहां सरकार ने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि भारत में फिलहाल पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और केरोसिन की कोई कमी नहीं है।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में कहा कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह स्थिर है और सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि एलपीजी के उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

एलपीजी उत्पादन में 28 प्रतिशत की वृद्धि

संसद में जानकारी देते हुए मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि देश में एलपीजी उत्पादन में लगभग 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के हर परिवार को खाना पकाने के लिए गैस की पर्याप्त उपलब्धता हो।

उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में घरेलू गैस की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके तहत गैस उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ वितरण व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।

सरकार की कोशिश है कि ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में भी लोगों को समय पर गैस सिलेंडर मिल सके और उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का केंद्र

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया का ध्यान होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर भी गया है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। यदि यहां किसी प्रकार की बाधा आती है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भले ही भारत इस संघर्ष का हिस्सा नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का असर भारत पर भी पड़ता है। इसलिए सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

भारत ने आयात के स्रोत बढ़ाए

ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए भारत ने कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में भी विविधता लाई है। पहले भारत का एक बड़ा हिस्सा तेल आयात होर्मुज मार्ग से जुड़ा हुआ था, लेकिन अब सरकार ने अन्य देशों से भी आयात बढ़ाया है।

सरकार के अनुसार अब भारत लगभग 40 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है। इससे किसी एक क्षेत्र में संकट होने पर भी देश की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी।

इसके अलावा गैर-होर्मुज मार्गों से होने वाला आयात भी बढ़कर लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो पहले करीब 55 प्रतिशत था।

पूरी क्षमता से काम कर रही हैं रिफाइनरियां

सरकार ने यह भी बताया कि देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। इससे पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल रही है।

मंत्री के अनुसार देश में प्रतिदिन लगभग 50 लाख एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति की जा रही है। यह संख्या यह दिखाती है कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था मजबूत है और फिलहाल किसी तरह की कमी की स्थिति नहीं है।

सरकार के पांच बड़े कदम

ऊर्जा संकट की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं ताकि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता बनी रहे।

1. केरोसिन का आवंटन बढ़ाया गया

जरूरतमंद इलाकों में केरोसिन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने इसका आवंटन बढ़ा दिया है।

2. होटल और रेस्तरां को वैकल्पिक ईंधन की सलाह

व्यावसायिक प्रतिष्ठानों जैसे होटल और रेस्तरां को वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है, ताकि घरेलू गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो।

3. कच्चे तेल का विविध आयात

भारत अब 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो गई है।

4. रिफाइनरियों की क्षमता बढ़ाई गई

देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पाद तैयार कर रही हैं।

5. सिलेंडर बुकिंग पर नियंत्रण

ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में अब एक सिलेंडर के बाद दूसरा सिलेंडर बुक करने के लिए 45 दिन का अंतर रखा गया है, ताकि सभी उपभोक्ताओं तक गैस पहुंच सके।

कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर कहा कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग हालात का फायदा उठाकर कालाबाजारी करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरकार ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं गैस या पेट्रोलियम उत्पादों की कालाबाजारी होती दिखे तो तुरंत प्रशासन को इसकी जानकारी दें।

भारतीय पोतों को सुरक्षित निकालने की कोशिश

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत अपने नागरिकों और पोतों की सुरक्षा को लेकर भी सक्रिय है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस संबंध में ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची से कई बार बातचीत की है।

सूत्रों के अनुसार भारत की कोशिश है कि होर्मुज मार्ग के आसपास फंसे भारतीय जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाला जाए। इसके लिए ईरान से आधिकारिक स्तर पर अनुरोध भी किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का बड़ा फैसला

दुनिया भर में बढ़ती ऊर्जा चिंता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी बड़ा कदम उठाया है।

एजेंसी ने सदस्य देशों के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमति जताई है। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर कुछ हद तक दबाव कम हो सकता है।

मध्य पूर्व में बढ़े हमले

इस बीच मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। विभिन्न देशों के तेल ठिकानों और बंदरगाहों पर हमलों की खबरें भी सामने आई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने यूएई के शेबार तेल क्षेत्र पर ड्रोन हमला किया, जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया।

इसके अलावा कुवैत के तेल ठिकानों और बहरीन के एयरपोर्ट पर भी ड्रोन हमले हुए, जिससे कई जगह आग लगने की खबर है।

दुबई के क्रीक हार्बर इलाके में भी ड्रोन हमलों से नुकसान हुआ।

तेल टैंकर पर हमले में भारतीय की मौत

सबसे दुखद घटना इराक के बसरा बंदरगाह के पास हुई, जहां एक अमेरिकी तेल टैंकर पर हमला किया गया। इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई।

इराक स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार इस हमले में 15 अन्य भारतीय नागरिक घायल भी हुए हैं।

बताया गया कि 11 मार्च को कच्चे तेल से भरे एक अमेरिकी टैंकर सेफसी विष्णु पर हमला हुआ था। इस घटना के बाद इराक ने सुरक्षा कारणों से अपने कई तेल टर्मिनल बंद कर दिए।

मौजूदा संघर्ष में अब तक तीन भारतीय नागरिकों की मौत होने की जानकारी सामने आई है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व का यह संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ सकती है और कई देशों की आर्थिक स्थिति पर दबाव आ सकता है।

हालांकि भारत ने अभी तक अपने आयात स्रोतों और भंडार की मदद से स्थिति को नियंत्रित रखा है।

भारत के सामने चुनौती और तैयारी

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे बड़े देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।

सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाकर और रणनीतिक भंडार बढ़ाकर इस दिशा में मजबूत तैयारी की है।

मौजूदा हालात में भारत की प्राथमिकता यही है कि देश के लोगों को पेट्रोल, डीजल और गैस की नियमित आपूर्ति मिलती रहे और वैश्विक संकट का असर आम जनता पर कम से कम पड़े।

The global energy crisis triggered by the Middle East conflict has raised concerns about oil and gas supply across the world. However, India’s Petroleum Minister Hardeep Singh Puri assured Parliament that there is no shortage of petrol, diesel, LPG, or kerosene in the country. India has increased LPG production and diversified crude oil imports from multiple countries to strengthen energy security. The government is also monitoring the situation around the strategic Strait of Hormuz, through which a large portion of the world’s oil supply passes. Meanwhile, the International Energy Agency has decided to release millions of barrels from strategic reserves to stabilize global oil prices.

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