AIN NEWS 1: पहलगाम आतंकी हमले को एक साल पूरा हो चुका है, लेकिन इस दर्दनाक घटना की यादें आज भी कई परिवारों के दिलों में ताजा हैं। खासकर कानपुर के रहने वाले शुभम द्विवेदी के परिवार के लिए यह दिन एक गहरे जख्म की तरह है, जो समय के साथ भरने के बजाय और गहरा होता जा रहा है। इस हमले में अपनी शादी के महज दो महीने बाद ही पति को खो चुकीं उनकी पत्नी ऐशान्या द्विवेदी आज भी न्याय और सहारे की उम्मीद में हैं।
दो महीने में उजड़ गई जिंदगी
ऐशान्या द्विवेदी की शादी बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ हुई थी। हर लड़की की तरह उन्होंने भी एक खुशहाल जीवन की कल्पना की थी। लेकिन शादी के सिर्फ दो महीने बाद ही पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने उनकी दुनिया उजाड़ दी। उनके पति शुभम द्विवेदी इस हमले का शिकार हो गए और ऐशान्या की जिंदगी अचानक से एक दर्दनाक मोड़ पर आ गई।
ऐशान्या बताती हैं कि वह दिन आज भी उन्हें हर पल याद आता है। “सब कुछ एक झटके में खत्म हो गया। हमने साथ जीने-मरने के सपने देखे थे, लेकिन किस्मत ने सब कुछ छीन लिया,” उन्होंने भावुक होकर कहा।
बरसी पर फिर ताजा हुआ दर्द
हमले की पहली बरसी पर ऐशान्या का दर्द एक बार फिर सामने आया। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में उन्होंने खुद को संभालने की बहुत कोशिश की, लेकिन हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता है।
बरसी के मौके पर उन्होंने अपने पति को याद करते हुए कहा कि “उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। हर त्योहार, हर खुशी का मौका अब अधूरा लगता है।”
सीएम से मिलने की कोशिश, लेकिन नहीं मिला समय
ऐशान्या ने यह भी बताया कि उन्होंने कई बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की कोशिश की। उनका कहना है कि उन्होंने बार-बार समय मांगा, लेकिन अब तक उन्हें मुलाकात का अवसर नहीं मिल पाया।
“मैं सिर्फ अपनी बात रखना चाहती हूं, अपनी पीड़ा बताना चाहती हूं। मुझे उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री से मिलकर मुझे कुछ सहारा मिलेगा, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो पाया,” उन्होंने कहा।
उनकी इस बात में एक पीड़ित पत्नी की उम्मीद और निराशा दोनों साफ झलकती हैं।
न्याय और सहयोग की उम्मीद
ऐशान्या सिर्फ संवेदना ही नहीं, बल्कि न्याय और सहयोग की भी उम्मीद कर रही हैं। उनका कहना है कि आतंकवाद की ऐसी घटनाओं में प्रभावित परिवारों को सिर्फ मुआवजा ही नहीं, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक सहारा भी मिलना चाहिए।
“सरकार से मेरी यही उम्मीद है कि वह ऐसे परिवारों के लिए कुछ ठोस कदम उठाए, ताकि कोई और मेरी तरह अकेला महसूस न करे,” उन्होंने कहा।
आतंकवाद की मार और आम परिवार
पहलगाम हमला सिर्फ एक घटना नहीं था, बल्कि यह उन सैकड़ों परिवारों के लिए एक बड़ा आघात था, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आतंकवाद का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर ही पड़ता है।
ऐशान्या की कहानी भी उसी दर्द की एक मिसाल है, जहां एक आम परिवार अचानक से इस त्रासदी का हिस्सा बन गया।
समाज से भी उम्मीद
ऐशान्या ने समाज से भी सहयोग की अपील की है। उनका कहना है कि ऐसे समय में सिर्फ सरकारी मदद ही नहीं, बल्कि समाज का साथ भी बहुत जरूरी होता है।
“जब लोग साथ खड़े होते हैं, तो दुख थोड़ा कम लगता है,” उन्होंने कहा।
आगे की राह
आज, एक साल बाद भी ऐशान्या अपने जीवन को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन यह सफर आसान नहीं है। उनके लिए हर दिन एक नई चुनौती है, जहां उन्हें अपने दर्द के साथ जीना सीखना पड़ रहा है।
फिर भी, उनके शब्दों में उम्मीद की एक छोटी सी किरण दिखाई देती है। वह अब भी चाहती हैं कि उनकी आवाज सुनी जाए और उन्हें वह सहारा मिले जिसकी उन्हें जरूरत है।
On the anniversary of the Pahalgam terror attack, Aishanya Dwivedi from Kanpur shared her emotional story of losing her husband Shubham Dwivedi just two months after marriage. She revealed her repeated attempts to seek a meeting with CM Yogi Adityanath, highlighting the struggles faced by terror victims’ families in India. Her story sheds light on the long-term impact of terror attacks and the need for government support, justice, and emotional rehabilitation for affected families.


















