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69 हजार शिक्षक भर्ती विवाद: अभ्यर्थियों का लखनऊ में बड़ा प्रदर्शन, आरक्षण को लेकर फिर भड़का आक्रोश!

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69 हजार शिक्षक भर्ती विवाद: अभ्यर्थियों का लखनऊ में बड़ा प्रदर्शन, आरक्षण को लेकर फिर भड़का आक्रोश

AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69 हजार शिक्षक भर्ती एक बार फिर सुर्खियों में है। बुधवार, 22 अप्रैल को राजधानी लखनऊ में सैकड़ों अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर विधानसभा घेराव की कोशिश की। पिछले कई वर्षों से चल रहे इस विवाद ने अब एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले लिया है, जिसमें खास तौर पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं।

प्रदर्शन का अनोखा तरीका बना चर्चा का विषय

इस बार प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने विरोध जताने का अलग ही तरीका अपनाया। कई अभ्यर्थी गले में झाड़ू और मटकी लटकाकर पहुंचे, जो उनके मुताबिक “व्यवस्था की सफाई” और “न्याय की मांग” का प्रतीक था। उनका कहना है कि सरकार उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है, जिससे उन्हें इस तरह के प्रतीकात्मक विरोध का सहारा लेना पड़ रहा है।

विधानसभा घेराव की कोशिश, पुलिस ने लिया एक्शन

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थी विधानसभा की ओर बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया गया और बाद में उन्हें लखनऊ के ईको गार्डन भेज दिया गया। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है, इसलिए एहतियातन कार्रवाई की गई।

क्या है पूरा मामला?

69 हजार शिक्षक भर्ती का विवाद वर्ष 2019 में हुई सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा (ATRE) से जुड़ा है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत 69,000 पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति होनी थी। लेकिन चयन सूची जारी होने के बाद से ही इसमें आरक्षण को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि चयन प्रक्रिया में आरक्षण के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिससे खासकर दलित और पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ। इसी मुद्दे को लेकर कई याचिकाएं अदालत में दायर की गईं।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए जून 2020 और जनवरी 2022 की चयन सूचियों को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह 2019 की परीक्षा के आधार पर नई चयन सूची तीन महीने के भीतर जारी करे।

हालांकि, कोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक नई सूची जारी नहीं हो सकी है, जिससे अभ्यर्थियों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामला

यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार की ओर से इस मामले में सक्रियता नहीं दिखाई जा रही है। उनका आरोप है कि राज्य सरकार की तरफ से अदालत में प्रभावी पैरवी नहीं की जा रही, जिसके कारण सुनवाई में देरी हो रही है।

बताया जा रहा है कि साल 2024 में इस मामले की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई थी, लेकिन उसके बाद भी कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई।

आरक्षण को लेकर गंभीर आरोप

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार दलित और पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों को उनका अधिकार नहीं देना चाहती। उनका आरोप है कि करीब 19 हजार सीटों पर आरक्षण से जुड़ी अनियमितताएं हुई हैं, जिससे हजारों योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है।

अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि वे पिछले 6 वर्षों से लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है।

“हाउस अरेस्ट” के आरोप

प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि विभिन्न जिलों में कई अभ्यर्थियों को पहले से ही हाउस अरेस्ट किया जा रहा है, ताकि वे लखनऊ पहुंचकर प्रदर्शन में हिस्सा न ले सकें।

इन आरोपों ने मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।

अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

आरक्षण नियमों के अनुसार नई चयन सूची जारी की जाए

सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए

भर्ती प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए

लंबे समय से लंबित भर्ती प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाए

सरकार की स्थिति

सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर यह कहा जा रहा है कि मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए अंतिम निर्णय न्यायालय के आदेश के बाद ही लिया जाएगा।

लगातार बढ़ता जा रहा है आंदोलन

69 हजार शिक्षक भर्ती का यह मुद्दा अब केवल एक भर्ती विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक न्याय और आरक्षण के अधिकार से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है। लगातार हो रहे प्रदर्शनों से यह साफ है कि अभ्यर्थियों का आक्रोश कम होने वाला नहीं है।

यदि जल्द ही इस मामले का समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले समय में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

The UP 69000 teacher recruitment controversy has sparked massive protests in Lucknow, with candidates alleging reservation irregularities and government inaction. The issue, linked to the 2019 ATRE exam, remains pending in the Supreme Court, raising concerns over delayed justice, selection list cancellation, and the future of thousands of aspirants. The ongoing agitation highlights the growing tension around reservation policies and recruitment transparency in Uttar Pradesh.

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