AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश पुलिस एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। इस बार मामला गाजियाबाद और बुलंदशहर से जुड़ा है, जहां वर्दी की आड़ में कथित तौर पर अपहरण और फिरौती वसूली का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि गाजियाबाद पुलिस लाइंस में तैनात एक हेड कॉन्स्टेबल ने सिकंदराबाद पुलिस के कुछ कर्मियों के साथ मिलकर एक युवक को अगवा किया और उसकी रिहाई के बदले लाखों रुपये की मांग की।
घटना सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। मामला जब मेरठ रेंज के डीआईजी तक पहुंचा तो तत्काल जांच बैठाई गई। शुरुआती जांच में गंभीर लापरवाही और अवैध कार्रवाई की पुष्टि होने के बाद सिकंदराबाद थाने के एसएचओ समेत सात पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया। वहीं मुख्य आरोपी हेड कॉन्स्टेबल फिलहाल फरार बताया जा रहा है।
छुट्टी लेकर बुलंदशहर पहुंचा हेड कॉन्स्टेबल
जानकारी के अनुसार, गाजियाबाद पुलिस लाइंस में तैनात हेड कॉन्स्टेबल विनीत कुमार छुट्टी लेकर बुलंदशहर पहुंचा था। आरोप है कि उसने सिकंदराबाद थाने के कुछ पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया। पुलिस टीम ने 30 अप्रैल को सिकंदराबाद निवासी सलमान पुत्र हनीफ को गुलावठी टोल प्लाजा के पास से उठाया।
बताया जा रहा है कि उस समय पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में थे, जिससे शुरुआत में किसी को उन पर शक नहीं हुआ। सलमान को जबरन वाहन में बैठाकर सिकंदराबाद थाने ले जाया गया, जहां उसे कथित तौर पर अवैध रूप से बंद रखा गया।
परिवार से मांगे गए 20 लाख रुपये
पीड़ित परिवार का आरोप है कि सलमान को छोड़ने के बदले पुलिसवालों ने पहले 20 लाख रुपये की मांग की थी। अचानक हुई इस घटना से परिवार घबरा गया। सलमान की पत्नी लगातार अपने पति को छुड़ाने की कोशिश करती रही। परिवार ने पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने की भी कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
आरोप है कि बाद में पुलिसकर्मियों और परिवार के बीच 6 लाख रुपये में समझौता हुआ। रकम मिलने के बाद सलमान को छोड़ दिया गया। परिवार का कहना है कि अगर पैसे नहीं दिए जाते तो उनके पति को किसी झूठे मामले में फंसाया जा सकता था।
डीआईजी जांच में खुली परतें
मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद मेरठ रेंज के डीआईजी ने जांच के आदेश दिए। जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। पुलिस रिकॉर्ड में सलमान की गिरफ्तारी का कोई वैध आधार नहीं मिला। साथ ही हिरासत की प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठे।
जांच रिपोर्ट में यह सामने आया कि थाने में सलमान को अवैध रूप से रखा गया था। इसके अलावा फिरौती मांगने के आरोपों को भी प्रथम दृष्टया सही पाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सिकंदराबाद थाने के एसएचओ समेत सात पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया।
आरोपी हेड कॉन्स्टेबल फरार
इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी हेड कॉन्स्टेबल विनीत कुमार बताया जा रहा है। कार्रवाई शुरू होने के बाद से वह फरार है। पुलिस उसकी तलाश में दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
वहीं, अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि इस कथित साजिश में और कौन-कौन शामिल था।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर लोग पुलिस से सुरक्षा और न्याय की उम्मीद करते हैं, लेकिन जब खुद पुलिसकर्मी ही कानून तोड़ने के आरोपों में घिर जाएं तो लोगों का भरोसा कमजोर पड़ने लगता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते मामला उजागर नहीं होता, तो पीड़ित परिवार शायद कभी न्याय नहीं पा पाता। सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में है और लोग दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विभाग में अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मेरठ रेंज के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि थाने स्तर पर इस तरह की गतिविधियां कब से चल रही थीं और किन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही।
पीड़ित परिवार में अब भी डर का माहौल
सलमान के परिवार का कहना है कि घटना के बाद से वे डरे हुए हैं। परिवार को आशंका है कि आरोपियों के खिलाफ आवाज उठाने पर उन्हें परेशान किया जा सकता है। हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच और सुरक्षा का भरोसा दिया है।
फिलहाल यह मामला पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि फरार आरोपी कब तक पकड़ा जाता है और विभाग आगे क्या बड़ी कार्रवाई करता है।
A major controversy has erupted in Uttar Pradesh after a Ghaziabad Police head constable allegedly kidnapped a man in Bulandshahr with the help of Sikandrabad police personnel and demanded ransom from his family. According to reports, the victim was illegally detained and released only after Rs 6 lakh was paid. Following the DIG Meerut investigation, several policemen including the SHO were suspended. The incident has raised serious questions about police corruption, abuse of power, illegal detention, and law enforcement accountability in Uttar Pradesh.


















