AIN NEWS 1 | गाजियाबाद में हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह एक भंडारे के दौरान पहुंचे मुस्लिम युवक के हाथ से प्लेट छीनते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान वह कथित तौर पर कहते सुनाई देते हैं कि “यहां कोई मुल्ला न आए, किसी को अच्छा लगे या बुरा।”
करीब 43 सेकेंड के इस वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस शुरू हो गई है। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे सांप्रदायिक बयानबाजी बता रहे हैं, जबकि कुछ समर्थक इसे उनके निजी कार्यक्रम का मामला बता रहे हैं।
साहिबाबाद के कार्यक्रम का बताया जा रहा वीडियो
जानकारी के अनुसार, वायरल वीडियो गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके में आयोजित एक भंडारे का बताया जा रहा है। पिंकी चौधरी ने खुद स्वीकार किया है कि वीडियो लगभग 20 दिन पुराना है।
वीडियो में देखा जा सकता है कि पिंकी चौधरी अपने समर्थकों के साथ भंडारे में लोगों को खाना बांट रहे हैं। इसी दौरान एक युवक वहां पहुंचता है। पिंकी चौधरी उससे उसका नाम पूछते हैं। युवक अपना नाम “मुल्ला” बताता है।
इसके बाद पिंकी चौधरी उसके हाथ से प्लेट छीन लेते हैं और वहां मौजूद लोगों से कहते हैं कि “इसे यहां से हटाओ। कोई मुल्ला यहां न आए। चाहे किसी को अच्छा लगे या बुरा।”
वीडियो में यह भी दिखाई देता है कि युवक वहां से चुपचाप चला जाता है, जबकि मौके पर मौजूद कुछ समर्थक मुस्कुराते नजर आते हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद
वीडियो सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। कई लोगों ने इस घटना की आलोचना करते हुए इसे धार्मिक आधार पर भेदभाव बताया। वहीं कुछ यूजर्स ने इसे समाज में तनाव बढ़ाने वाला व्यवहार कहा।
हालांकि अब तक इस मामले में पुलिस की तरफ से किसी नई कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद पूरे मामले पर चर्चा तेज हो गई है।
पिंकी चौधरी ने बयान को सही ठहराया
विवाद बढ़ने के बाद पिंकी चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं के कार्यक्रमों में मुसलमानों का आना उचित नहीं है और उन्होंने वही किया जो उन्हें सही लगा।
उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो किसने रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर किसने वायरल किया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। लेकिन उन्होंने अपने बयान से पीछे हटने से इनकार किया।
पिंकी चौधरी के इस बयान के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं सामाजिक और धार्मिक माहौल को प्रभावित कर सकती हैं।
पहले भी विवादों में रह चुके हैं पिंकी चौधरी
यह पहला मौका नहीं है जब हिंदू रक्षा दल प्रमुख पिंकी चौधरी विवादों में आए हों। इससे पहले भी उनके कई बयान और गतिविधियां सुर्खियों में रह चुकी हैं।
दिसंबर 2025 में उनका एक और वीडियो सामने आया था, जिसमें वह अपने समर्थकों के साथ गाजियाबाद के शालीमार गार्डन इलाके में घर-घर जाकर तलवारें बांटते दिखाई दिए थे।
करीब 21 सेकेंड के उस वीडियो में उनके समर्थकों के हाथों में तलवारें और फरसे नजर आए थे। वीडियो में भारत माता के जयकारे लगाए जा रहे थे और लोगों को कथित तौर पर आत्मरक्षा के नाम पर हथियार दिए जा रहे थे।
तलवार बांटने के मामले में हुई थी गिरफ्तारी
तलवार बांटने वाले वीडियो के वायरल होने के बाद गाजियाबाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया था। 6 जनवरी को पुलिस ने पिंकी चौधरी और उनके बेटे को गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस का कहना था कि सार्वजनिक रूप से हथियार बांटना और इस तरह की गतिविधियों को बढ़ावा देना कानून व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है। गिरफ्तारी के बाद दोनों को जेल भेजा गया था।
हालांकि बाद में 15 जनवरी को उन्हें जमानत मिल गई। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने करीब 25 किलोमीटर लंबा जुलूस भी निकाला था, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए थे।
सोशल मीडिया पर बंटी राय
ताजा वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा दिखाई दे रहा है। एक वर्ग इस घटना को धार्मिक भेदभाव और नफरत फैलाने वाला बता रहा है। वहीं दूसरा वर्ग इसे निजी धार्मिक आयोजन का मामला बताते हुए पिंकी चौधरी के समर्थन में पोस्ट कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर इस तरह के वीडियो तेजी से वायरल होने से समाज में तनाव बढ़ सकता है। कई लोग प्रशासन से मामले की जांच और उचित कार्रवाई की मांग भी कर रहे हैं।
गाजियाबाद में पहले भी हो चुके हैं सांप्रदायिक विवाद
गाजियाबाद और आसपास के इलाकों में पहले भी कई बार सांप्रदायिक तनाव से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और बयान अक्सर विवाद का कारण बनते हैं।
प्रशासन ऐसे मामलों में लोगों से अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने की अपील करता रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी विवादित सामग्री की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाती है।
कानून और सामाजिक जिम्मेदारी पर उठे सवाल
इस घटना के बाद एक बार फिर धार्मिक आयोजनों, सार्वजनिक बयानबाजी और सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी व्यक्ति के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव करना संवेदनशील मुद्दा बन सकता है।
वहीं समाजशास्त्रियों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करती हैं और लोगों के बीच दूरी बढ़ा सकती हैं।
फिलहाल वीडियो को लेकर बहस जारी है और लोग प्रशासन की संभावित कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।


















