AIN NEWS 1: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG पेपर लीक मामले में जांच लगातार गहराती जा रही है। हर दिन सामने आ रहे नए खुलासों ने इस पूरे नेटवर्क की जड़ें कई राज्यों तक फैली होने की आशंका को और मजबूत कर दिया है। अब इस मामले में मुख्य आरोपी ने पूछताछ के दौरान अपने कई साथियों के नाम उजागर किए हैं, जिसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच का दायरा तेजी से बढ़ा दिया है।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों के रडार पर अब कई शिक्षक, कोचिंग से जुड़े लोग और डॉक्टर भी आ गए हैं। बताया जा रहा है कि पेपर लीक का यह पूरा खेल महाराष्ट्र के नासिक स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस से शुरू हुआ और फिर हरियाणा, राजस्थान समेत कई राज्यों तक फैल गया।
कैसे हुआ पेपर लीक का खुलासा?
CBI की शुरुआती जांच में सामने आया कि परीक्षा से पहले ही कुछ छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंच चुका था। जांच एजेंसियों को शक तब हुआ जब कई परीक्षार्थियों के उत्तर एक जैसे पाए गए और कुछ केंद्रों पर असामान्य पैटर्न सामने आए। इसके बाद जब संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई तो पूरे रैकेट की परतें खुलने लगीं।
मुख्य आरोपी ने पूछताछ के दौरान बताया कि प्रश्नपत्र को परीक्षा से पहले चुनिंदा लोगों तक पहुंचाने के लिए एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। इस नेटवर्क में प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े कुछ लोग, एजेंट, शिक्षक और मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल थे।
राजस्थान के दो भाइयों ने खरीदा था पेपर
जांच में यह भी सामने आया है कि राजस्थान के दो भाइयों ने गुड़गांव के एक डॉक्टर से करीब 30 लाख रुपये में NEET का पेपर खरीदा था। आरोप है कि इस रकम के बदले उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र और उसके उत्तर उपलब्ध कराए गए।
CBI अब इस बात की जांच कर रही है कि आखिर डॉक्टर तक पेपर कैसे पहुंचा और उसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। एजेंसी को शक है कि इस नेटवर्क में कई राज्यों के लोग शामिल हैं और करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ है।
नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से जुड़ रहे तार
इस पूरे मामले में महाराष्ट्र के नासिक की एक प्रिंटिंग प्रेस का नाम बार-बार सामने आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा के प्रश्नपत्रों की छपाई और पैकेजिंग के दौरान सुरक्षा में बड़ी चूक हुई थी।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि यहीं से पेपर की तस्वीरें या कॉपी बाहर निकाली गईं। इसके बाद व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रश्नपत्र अलग-अलग राज्यों तक पहुंचाया गया।
CBI ने प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े कई कर्मचारियों से पूछताछ की है। कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी जब्त किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच चल रही है।
कई टीचर्स और कोचिंग नेटवर्क जांच के घेरे में
पेपर लीक मामले में अब कुछ शिक्षकों और कोचिंग संस्थानों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। जांच एजेंसियों को जानकारी मिली है कि कुछ छात्रों को परीक्षा से पहले “विशेष तैयारी” के नाम पर प्रश्न और उत्तर याद करवाए गए थे।
CBI अब उन शिक्षकों की कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाल रही है जिनका संपर्क आरोपियों से रहा है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस रैकेट का संबंध किसी बड़े कोचिंग नेटवर्क से भी है।
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ा गुस्सा
NEET परीक्षा को देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में माना जाता है। लाखों छात्र सालों तक मेहनत कर इस परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे में पेपर लीक की खबरों ने छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी नाराजगी पैदा कर दी है।
कई छात्रों का कहना है कि अगर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक हुआ था तो यह ईमानदार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। सोशल मीडिया पर भी परीक्षा दोबारा कराने की मांग तेज हो गई है।
डिजिटल चैट और पैसों के लेनदेन की जांच
CBI अब इस पूरे मामले में डिजिटल सबूत जुटाने में लगी है। जांच एजेंसी ने कई मोबाइल फोन, लैपटॉप और हार्ड डिस्क जब्त की हैं। इनमें मिले चैट रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और ऑनलाइन पेमेंट डिटेल्स की जांच की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ आरोपियों ने छात्रों से लाखों रुपये लेकर उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा किया था। एजेंसी को शक है कि इस नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध लेनदेन हुआ।
CBI और अन्य जांच एजेंसियां राजस्थान, बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली समेत कई राज्यों में लगातार छापेमारी कर रही हैं। अब तक कई संदिग्धों को हिरासत में लिया जा चुका है जबकि कुछ लोगों से पूछताछ जारी है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे पूछताछ आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए नाम सामने आ रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
परीक्षा प्रणाली पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने देश की परीक्षा प्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी परीक्षा में सुरक्षा के कई स्तर होने चाहिए ताकि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके।
अब मांग उठ रही है कि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाए और प्रिंटिंग से लेकर परीक्षा केंद्र तक हर चरण की निगरानी मजबूत की जाए।
सरकार और एजेंसियों की सख्ती
केंद्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है। शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) भी लगातार जांच एजेंसियों के संपर्क में हैं।
CBI अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह शिक्षक हो, डॉक्टर हो या किसी संस्थान से जुड़ा प्रभावशाली व्यक्ति।
NEET पेपर लीक मामला अब केवल परीक्षा में गड़बड़ी का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य दांव पर लगा है।
CBI की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस संगठित नेटवर्क की परतें खुल रही हैं। आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे होने की संभावना है। अब पूरे देश की नजर इस बात पर है कि दोषियों के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई होती है और छात्रों का भरोसा कैसे बहाल किया जाता है।
The NEET paper leak case has triggered a massive nationwide investigation as the CBI probes the involvement of teachers, doctors, coaching networks, and middlemen linked to the NEET UG examination scam. According to investigators, the leaked question paper allegedly spread from a printing press in Nashik to multiple states including Rajasthan and Haryana. The NEET controversy has raised serious concerns about exam security, transparency, and the future of lakhs of medical aspirants across India.


















