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यूपी में वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा: सप्ताह में 2 दिन घर से काम की तैयारी, CM योगी ने दिए बड़े निर्देश!

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में बदलते वैश्विक हालात, ऊर्जा संकट और संसाधनों के बेहतर उपयोग को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार अब बड़े औद्योगिक संस्थानों, स्टार्टअप्स और अधिक कर्मचारियों वाली निजी कंपनियों में सप्ताह में दो दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इसके लिए संबंधित विभागों को एडवाइजरी जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से न केवल बिजली और ईंधन की बचत होगी, बल्कि ट्रैफिक दबाव कम होगा और कर्मचारियों को भी बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा। इसके साथ ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट, कार पूलिंग और वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा देने की रणनीति भी तैयार की जा रही है।

उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया फैसला

लखनऊ में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ ऊर्जा संरक्षण, संसाधनों के संतुलित उपयोग और भविष्य की कार्यप्रणाली को लेकर विस्तार से चर्चा की। बैठक में यह महसूस किया गया कि आधुनिक तकनीक के दौर में कई कार्य डिजिटल माध्यम से आसानी से किए जा सकते हैं, जिससे अनावश्यक यात्रा और कार्यालयों में अतिरिक्त बिजली खपत को कम किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रदेश के बड़े उद्योग समूहों, आईटी कंपनियों, स्टार्टअप्स और निजी संस्थानों को सप्ताह में कम से कम दो दिन कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा देने के लिए प्रेरित किया जाए। इसके लिए जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

किन कंपनियों पर होगा सबसे पहले असर?

सरकार की योजना के अनुसार सबसे पहले उन संस्थानों पर ध्यान दिया जाएगा जहां कर्मचारियों की संख्या अधिक है और जहां ऑनलाइन या डिजिटल माध्यम से कार्य संभव है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हो सकते हैं:

आईटी और सॉफ्टवेयर कंपनियां

बीपीओ और कॉल सेंटर

स्टार्टअप कंपनियां

निजी कॉर्पोरेट कार्यालय

डिजिटल सर्विस सेक्टर

कंसल्टिंग और फाइनेंस कंपनियां

सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में वर्क फ्रॉम होम आसानी से लागू किया जा सकता है और इससे उत्पादकता पर भी ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

बिजली बचत पर विशेष फोकस

प्रदेश सरकार इस फैसले को केवल कर्मचारियों की सुविधा तक सीमित नहीं रखना चाहती। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य ऊर्जा संरक्षण बताया जा रहा है। बढ़ती बिजली मांग और गर्मी के मौसम में अतिरिक्त दबाव को देखते हुए सरकार अब कार्यालयों में बिजली उपयोग कम करने की दिशा में काम कर रही है।

यदि सप्ताह में दो दिन कर्मचारी घर से काम करेंगे तो:

दफ्तरों में एसी और बिजली का उपयोग घटेगा

सरकारी और निजी भवनों में ऊर्जा खपत कम होगी

ट्रैफिक कम होने से ईंधन की बचत होगी

प्रदूषण में कमी आएगी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम लंबे समय में पर्यावरण संरक्षण के लिए भी लाभदायक साबित हो सकता है।

कार पूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा

बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोगों को निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाए। साथ ही कार पूलिंग मॉडल को भी बढ़ावा देने की बात कही गई।

सरकार चाहती है कि बड़े शहरों में रोजाना होने वाली भारी ट्रैफिक समस्या को कम किया जाए। इसके लिए मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार यदि बड़ी कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए कार पूलिंग या बस सेवा जैसी व्यवस्था शुरू करती हैं तो इससे सड़क पर वाहनों की संख्या काफी कम हो सकती है।

वर्चुअल मीटिंग्स को मिलेगा बढ़ावा

सरकार अब अनावश्यक फिजिकल मीटिंग्स को कम कर डिजिटल बैठकों को बढ़ावा देने की तैयारी में है। कोविड महामारी के दौरान वर्चुअल मीटिंग्स का मॉडल काफी सफल रहा था और अब उसी अनुभव का उपयोग दोबारा किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां संभव हो वहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ऑनलाइन मीटिंग्स को प्राथमिकता दी जाए। इससे समय की बचत होगी और यात्रा खर्च भी कम होगा।

कर्मचारियों को मिल सकती है बड़ी राहत

वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू होने से कर्मचारियों को भी कई फायदे मिल सकते हैं। खासकर बड़े शहरों में रहने वाले लोग रोजाना ट्रैफिक जाम और लंबी यात्रा से परेशान रहते हैं।

यदि सप्ताह में दो दिन घर से काम की सुविधा मिलती है तो:

यात्रा का समय बचेगा

मानसिक तनाव कम होगा

परिवार के साथ समय बढ़ेगा

पेट्रोल और डीजल खर्च में कमी आएगी

कार्य और निजी जीवन में संतुलन बेहतर होगा

कई निजी कंपनियां पहले से ही हाइब्रिड मॉडल पर काम कर रही हैं। ऐसे में सरकार की नई पहल को उद्योग जगत से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल सकती है।

उद्योग जगत की क्या है राय?

कुछ उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य की कार्य संस्कृति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। कोरोना महामारी के बाद दुनिया भर में हाइब्रिड वर्क मॉडल तेजी से लोकप्रिय हुआ है।

हालांकि कुछ सेक्टर ऐसे भी हैं जहां पूरी तरह वर्क फ्रॉम होम संभव नहीं है। मैन्युफैक्चरिंग, उत्पादन इकाइयों और फील्ड जॉब्स में कर्मचारियों की फिजिकल मौजूदगी जरूरी रहती है। इसलिए सरकार फिलहाल उन्हीं सेक्टरों पर फोकस कर रही है जहां डिजिटल तरीके से काम हो सकता है।

क्या यह आदेश अनिवार्य होगा?

फिलहाल सरकार ने एडवाइजरी जारी करने की बात कही है। यानी कंपनियों को इस मॉडल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। आने वाले समय में कंपनियों से बातचीत के बाद विस्तृत गाइडलाइन जारी हो सकती है।

सरकार का उद्देश्य दबाव बनाना नहीं बल्कि ऊर्जा बचत, ट्रैफिक नियंत्रण और बेहतर कार्य व्यवस्था को बढ़ावा देना है।

आने वाले समय में बदल सकती है कार्य संस्कृति

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्तर प्रदेश में यह मॉडल सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में राज्य की कार्य संस्कृति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। डिजिटल इंडिया और स्मार्ट वर्किंग मॉडल की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इसके अलावा यह फैसला पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा प्रबंधन और कर्मचारियों की सुविधा जैसे कई क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath has directed major companies, startups and industrial institutions to consider a two-day work from home policy every week. The UP government aims to promote energy saving, reduce traffic congestion, encourage public transport and support hybrid work culture across the state. The advisory may impact IT companies, BPOs, startups and corporate offices where digital operations are possible. The decision is being seen as a major step toward sustainable development and modern workplace transformation in Uttar Pradesh.

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