सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी, अब कुल 38 जज होंगे तैनात
AIN NEWS 1: देश की न्याय व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब देश की सर्वोच्च अदालत में जजों की संख्या पहले के मुकाबले अधिक हो जाएगी, जिससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
केंद्र सरकार लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में बढ़ते मामलों और न्यायाधीशों पर बढ़ते कार्यभार को देखते हुए जजों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रही थी। अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह फैसला आधिकारिक रूप से लागू हो गया है।
क्या है नया अध्यादेश?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने “सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026” को मंजूरी दी है। इस अध्यादेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या बढ़ा दी गई है।
पहले सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) को छोड़कर 33 जजों के पद स्वीकृत थे। अब इस संख्या को बढ़ाकर 37 कर दिया गया है। यानी अब सुप्रीम कोर्ट में कुल 38 जज होंगे, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश भी शामिल होंगे।
पहले कितने जज थे?
अब तक सुप्रीम कोर्ट में कुल 34 जजों की व्यवस्था थी। इसमें:
1 चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया
33 अन्य न्यायाधीश
नई व्यवस्था लागू होने के बाद:
1 चीफ जस्टिस ऑफ India
37 अन्य न्यायाधीश
यानी कुल संख्या बढ़कर 38 हो जाएगी।
क्यों पड़ी जजों की संख्या बढ़ाने की जरूरत?
पिछले कई वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। देशभर से आने वाले संवैधानिक, आपराधिक, सिविल और जनहित याचिकाओं के कारण अदालत पर काम का दबाव काफी बढ़ गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ाने से:
मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी
लंबित केस कम होंगे
आम लोगों को जल्द न्याय मिल सकेगा
संवैधानिक मामलों का जल्दी निपटारा होगा
इसके अलावा कई अहम मामलों की सुनवाई के लिए संविधान पीठ का गठन करना पड़ता है, जिसमें एक साथ कई जजों की आवश्यकता होती है। ऐसे में जजों की संख्या बढ़ाना जरूरी माना जा रहा था।
न्यायपालिका पर बढ़ रहा था दबाव
सुप्रीम कोर्ट देश की सबसे बड़ी अदालत है और यहां हर साल हजारों नए मामले दर्ज होते हैं। कई बार जजों के पद खाली रहने और मामलों की अधिक संख्या के कारण सुनवाई में देरी होती रही है।
कानूनी आंकड़ों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में हजारों मामले लंबे समय से लंबित हैं। ऐसे में सरकार का मानना है कि अधिक जज होने से अदालत की कार्यक्षमता बढ़ेगी और मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा।
केंद्र सरकार का बड़ा फैसला
केंद्र सरकार इस फैसले को न्यायिक सुधारों की दिशा में बड़ा कदम मान रही है। सरकार का कहना है कि देश में तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की क्षमता बढ़ाना जरूरी हो गया था।
सूत्रों के मुताबिक कानून मंत्रालय और न्यायपालिका के बीच इस विषय पर लंबे समय से चर्चा चल रही थी। इसके बाद जजों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया और राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया।
क्या होगा आम लोगों को फायदा?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा आम नागरिकों को मिलेगा। अदालतों में वर्षों तक लंबित रहने वाले मामलों में तेजी आने की उम्मीद है।
इसके अलावा:
महत्वपूर्ण मामलों की जल्दी सुनवाई हो सकेगी
न्याय प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी
संवैधानिक मामलों में तेजी आएगी
अदालतों पर दबाव कम होगा
न्यायपालिका में सुधार की दिशा में अहम कदम
भारत की न्याय व्यवस्था लंबे समय से लंबित मामलों की समस्या से जूझ रही है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में लाखों मामले पेंडिंग हैं। ऐसे में जजों की संख्या बढ़ाना एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ जजों की संख्या बढ़ाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि अदालतों में आधुनिक तकनीक, डिजिटल सुनवाई और बुनियादी सुविधाओं को भी मजबूत करना होगा।
जल्द हो सकती हैं नई नियुक्तियां
अध्यादेश लागू होने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में अतिरिक्त जजों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में केंद्र सरकार और कॉलेजियम मिलकर नए न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।
हालांकि नियुक्तियों की प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है, लेकिन इस फैसले के बाद न्यायपालिका में नई ऊर्जा आने की उम्मीद जताई जा रही है।
विपक्ष और कानूनी विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
इस फैसले को लेकर कानूनी विशेषज्ञों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि बढ़ते मामलों को देखते हुए यह फैसला जरूरी था।
वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ संख्या बढ़ाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। अदालतों में बुनियादी सुधार और न्यायिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना भी जरूरी है।
देश की न्याय व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाना देश की न्यायिक व्यवस्था के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे अदालत की कार्यक्षमता बढ़ेगी और आम लोगों को समय पर न्याय मिलने की संभावना मजबूत होगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी के बाद अब यह फैसला लागू हो चुका है और आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट पहले से अधिक क्षमता के साथ काम करता दिखाई दे सकता है।
President Droupadi Murmu has approved the Supreme Court (Number of Judges) Amendment Ordinance 2026, increasing the sanctioned strength of judges in the Supreme Court of India from 34 to 38 including the Chief Justice of India. The decision aims to reduce the burden of pending cases, improve judicial efficiency, and speed up hearings in the country’s apex court. The move is being seen as a major reform in India’s judicial system and is expected to strengthen the functioning of the Supreme Court amid rising case backlogs.


















