मुजफ्फरनगर में मजदूरों पर जुल्म की कहानी: दोना-पत्तल फैक्ट्री से 13 बंधक मजदूर छुड़ाए गए, पुलिस ने शुरू की जांच
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक दोना-पत्तल बनाने वाली फैक्ट्री में मजदूरों को कथित तौर पर बंधक बनाकर काम कराने और उनके साथ मारपीट करने का आरोप लगा है। पुलिस की छापेमारी के बाद 13 मजदूरों को फैक्ट्री से मुक्त कराया गया। मजदूरों ने आरोप लगाया कि उनसे जबरन 24 घंटे तक काम कराया जाता था और विरोध करने पर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की जाती थी।
मजदूरों के मुताबिक, फैक्ट्री में हालात इतने खराब थे कि कई लोगों के शरीर पर चोटों के निशान मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बेल्ट, डंडे और हंटर से पीटा जाता था। कुछ मजदूरों ने गर्म लोहे से दागे जाने जैसी गंभीर यातनाओं के भी आरोप लगाए हैं। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और फैक्ट्री मालिक की तलाश में जुटी है।
पुलिस की कार्रवाई से मिली मजदूरों को राहत
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने सोमवार 22 जून की शाम फैक्ट्री में छापेमारी की। इस कार्रवाई में 13 मजदूरों को वहां से बाहर निकाला गया। मजदूरों ने पुलिस की टीम को अपनी मदद के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि पुलिस उनके लिए भगवान बनकर पहुंची।
मुजफ्फरनगर पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई के लिए एक विशेष टीम बनाई गई थी। टीम में पुलिस अधिकारियों के साथ श्रम विभाग के अधिकारी भी शामिल थे। छापेमारी के दौरान फैक्ट्री मालिक के पिता और सुपरवाइजर को गिरफ्तार किया गया है। वहीं मुख्य आरोपी फैक्ट्री मालिक की तलाश जारी है।
11 महीने तक बंधक रहने का मजदूर ने लगाया आरोप
सीतापुर निवासी मजदूर जगदीश ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उसे करीब 11 महीने से फैक्ट्री में रहने के लिए मजबूर किया गया। उसका कहना है कि जब वह घर जाने की बात करता था या काम छोड़ने की इच्छा जताता था तो उसके साथ मारपीट की जाती थी।
जगदीश के अनुसार, उसकी तय मजदूरी करीब 12 हजार रुपये थी, लेकिन उसे पूरी रकम नहीं दी जाती थी। उसने आरोप लगाया कि दिन-रात काम कराया जाता था और आराम करने का भी मौका नहीं मिलता था। मारपीट के कारण उसके कान पर भी गंभीर असर पड़ा।
जगदीश ने पुलिस प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि कार्रवाई के कारण ही वह और अन्य मजदूर वहां से बाहर निकल पाए।
औरैया के मजदूर ने बताई दर्दनाक कहानी
औरैया निवासी शिवम जाटव ने भी फैक्ट्री में प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। उसने बताया कि वह करीब छह महीने से वहां काम कर रहा था और उसके साथ लगातार मारपीट की जाती थी।
शिवम का आरोप है कि विरोध करने पर उसे बुरी तरह पीटा गया, जिससे उसके हाथ में चोट आई। उसने पुलिस अधिकारियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि अगर पुलिस समय पर नहीं पहुंचती तो मजदूरों की स्थिति और खराब हो सकती थी।
भागने वालों पर कुत्ता छोड़ने का आरोप
मजदूरों ने फैक्ट्री संचालकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जो मजदूर वहां से भागने की कोशिश करते थे, उन्हें डराने के लिए पिटबुल डॉग का इस्तेमाल किया जाता था।
मजदूरों का कहना है कि उन्हें लगातार निगरानी में रखा जाता था ताकि कोई बाहर जाकर मदद न मांग सके। इन आरोपों की पुलिस जांच कर रही है और सभी तथ्यों को जुटाया जा रहा है।
गांव में चल रही थी फैक्ट्री
पुलिस के मुताबिक, यह फैक्ट्री मुजफ्फरनगर के माड़ी गांव में संचालित हो रही थी। यहां प्रमोद बालियान अपने परिवार के साथ रहते हैं। बताया गया कि उनके बेटे अंकित बालियान द्वारा पिछले करीब छह वर्षों से ‘किसान सरकार हाउस’ नाम से दोना-पत्तल बनाने की फैक्ट्री चलाई जा रही थी।
पुलिस को सूचना मिली थी कि फैक्ट्री में मजदूरों को कथित रूप से रोककर रखा जाता है और उनसे जबरन काम कराया जाता है। सूचना के आधार पर टीम ने कार्रवाई की।
पुलिस और श्रम विभाग की संयुक्त कार्रवाई
एसएसपी संजय कुमार वर्मा के निर्देश पर गठित टीम ने फैक्ट्री में पहुंचकर मजदूरों को मुक्त कराया। टीम में एसपी देहात अक्षय संजय महाडिक, सीओ फुगाना विश्वजीत सिंह, सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह, तहसीलदार राधेश्याम गौड़ और तितावी थाना प्रभारी प्रमोद कुमार शामिल थे।
अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। मजदूरों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और आरोपों की पुष्टि के लिए जरूरी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
फैक्ट्री मालिक की तलाश जारी
पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान की तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला सामने आने के बाद एक बार फिर मजदूरों के अधिकारों और कार्यस्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
The Muzaffarnagar bonded labour case has raised serious concerns about labour exploitation in Uttar Pradesh. According to police, 13 workers were rescued from a dona pattal factory where they alleged forced labour, physical assault and illegal confinement. UP Police have arrested two accused persons and are investigating the role of the factory owner. The case highlights the importance of protecting workers’ rights and preventing bonded labour practices in industrial areas.


















