AIN NEWS 1 भोजपुर (आरा): बिहार के भोजपुर जिले के चर्चित बिलौटी मुठभेड़ मामले में नया मोड़ सामने आया है। पुलिस फायरिंग में मारे गए बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर अब पुलिस अधिकारियों और जवानों के खिलाफ हत्या समेत गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मृतक की मां आशा देवी के आवेदन पर शाहपुर थाने में दर्ज केस में जगदीशपुर के एसडीपीओ राजेश शर्मा और शाहपुर के निलंबित थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर राजेश मालाकार को नामजद आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा कुछ अन्य पुलिसकर्मियों को भी आरोपित किया गया है।
पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और मुठभेड़ की परिस्थितियों को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे। लगातार उठ रहे विवाद के बाद राज्य सरकार ने निष्पक्ष जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग गठित करने का फैसला भी लिया है।
छह दिन बाद दर्ज हुई प्राथमिकी
बिलौटी मुठभेड़ की घटना के छह दिन बाद शाहपुर थाने में कांड संख्या 178/26 दर्ज की गई। यह प्राथमिकी 22 जून 2026 को दर्ज हुई है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1)(5) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि भरत भूषण तिवारी को पुलिसकर्मियों ने योजना के तहत ले जाकर गोली मारी। मृतक की मां आशा देवी ने आरोप लगाया है कि पुलिस टीम जवइनिया के कटाव पीड़ितों की समस्या सुनने के बहाने उनके बेटे को घर से अपने साथ ले गई थी।
मां ने लगाए गंभीर आरोप
आशा देवी ने अपने बयान में कहा है कि 17 जून की सुबह करीब आठ बजे जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश शर्मा और शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार के नेतृत्व में पुलिस टीम उनके घर पहुंची थी। पुलिस अधिकारियों ने भरत भूषण तिवारी को जवइनिया क्षेत्र के बाढ़ और कटाव पीड़ितों की समस्या जानने की बात कहकर साथ चलने को कहा।
आरोप है कि जब पुलिस टीम और भरत भूषण कटाव प्रभावित क्षेत्र के पास पहुंचे, उस समय भरत सोशल मीडिया पर लाइव था और अपनी मांगों को लेकर बात कर रहा था। प्राथमिकी में कहा गया है कि भरत ने बाद में अपना हथियार जमीन पर रख दिया और खुद को पुलिस के हवाले कर दिया।
मृतक की मां का आरोप है कि इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उनके बेटे को धक्का देकर गिराया और अधिकारियों के आदेश पर उसे पांच गोलियां मारी गईं। इसके बाद पुलिसकर्मी उसे वाहन में लेकर चले गए। परिवार को शाम के समय उसकी मौत की सूचना दी गई।
पुलिस का दावा: जवाबी कार्रवाई में हुई मौत
वहीं पुलिस की ओर से इस घटना को लेकर अलग दावा किया गया है। पुलिस के अनुसार 16 जून को भरत भूषण तिवारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो की जांच के लिए शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार के नेतृत्व में पुलिस टीम उसके घर पहुंची थी।
पुलिस का कहना था कि बातचीत के दौरान भरत ने पुलिस पर पिस्टल तान दी थी, जिसके बाद पुलिस वापस लौट गई। अगले दिन यानी 17 जून की सुबह एसटीएफ और शाहपुर पुलिस की टीम उसे पकड़ने के लिए उसके घर पहुंची।
पुलिस के मुताबिक भरत ने पुलिस टीम पर फायरिंग की और वहां से भागकर बधार की ओर चला गया। पुलिस का दावा है कि बधार में भी उसने गोली चलाने की कोशिश की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह घायल हुआ। इलाज के लिए उसे पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) ले जाया गया, जहां उसी दिन उसकी मौत हो गई।
पांच पुलिसकर्मी पहले ही निलंबित
इस मामले में पुलिस विभाग ने कार्रवाई करते हुए शाहपुर थानाध्यक्ष समेत पांच पुलिसकर्मियों को पहले ही निलंबित कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब दर्ज हुई हत्या की प्राथमिकी के बाद पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। मामले के अनुसंधान की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर संजीव कुमार को दी गई है।
न्यायिक जांच आयोग करेगा पूरे मामले की जांच
भोजपुर मुठभेड़ को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बाद बिहार सरकार ने मामले की न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराई जाएगी, ताकि घटना की वास्तविक सच्चाई सामने आ सके।
इस मामले में अब पुलिस के दावे और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि घटना वास्तव में किन परिस्थितियों में हुई और इसमें किसकी भूमिका रही।
फिलहाल बिलौटी मुठभेड़ मामला भोजपुर जिले का सबसे चर्चित विवादों में शामिल हो गया है। एक ओर जहां पुलिस इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बता रही है, वहीं मृतक के परिवार ने इसे कथित हत्या बताते हुए न्याय की मांग की है।
The Bhojpur Bilouti encounter case has become a major Bihar crime news issue after a murder FIR was registered against police officials over the death of Bharat Bhushan Tiwari. The case involves allegations against Jagdishpur SDPO Rajesh Sharma and suspended Shahpur SHO Rajesh Malakar. The investigation, police statement, family allegations and judicial inquiry will determine the facts behind the controversial Bihar police encounter case.


















