158 करोड़ की लागत से बना नोएडा बस टर्मिनल बदहाल, उद्घाटन के बाद भी जनता को नहीं मिला फायदा
AIN NEWS 1: नोएडा में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया अत्याधुनिक बस टर्मिनल इन दिनों अपनी बदहाली को लेकर चर्चा में है। करीब 158 करोड़ रुपये खर्च कर बनाई गई इस बड़ी परियोजना का उद्देश्य शहर के लोगों को बेहतर और सुविधाजनक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना था। वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बस टर्मिनल का उद्घाटन भी किया था, जिससे उम्मीद जगी थी कि जल्द ही यहां से नियमित बस सेवाएं शुरू होंगी और यात्रियों को राहत मिलेगी।
लेकिन उद्घाटन के कई साल बाद भी स्थिति उम्मीदों के मुताबिक नहीं बदली। जिस टर्मिनल को आधुनिक सुविधाओं से लैस परिवहन केंद्र के रूप में विकसित किया गया था, वहां से नियमित बस संचालन अब तक पूरी तरह शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इतनी बड़ी धनराशि खर्च करने के बाद भी परियोजना अपने मूल उद्देश्य को क्यों नहीं पूरा कर पा रही है।
भव्य इमारत तैयार, लेकिन यात्रियों को इंतजार
बस टर्मिनल को आधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार किया गया था। इसमें यात्रियों के बैठने, बसों के संचालन, पार्किंग, टिकट व्यवस्था और अन्य सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण किया गया। योजना थी कि नोएडा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिलेगी और पुराने बस स्टैंडों पर दबाव कम होगा।
लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह इमारत अपेक्षित उपयोग में नहीं आ पा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यहां से बस सेवाएं नियमित रूप से संचालित नहीं होंगी तो इतनी बड़ी परियोजना का वास्तविक लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पाएगा।
जनता के पैसे के इस्तेमाल पर उठ रहे सवाल
सरकारी परियोजनाओं पर खर्च होने वाला पैसा आम जनता के टैक्स से आता है। ऐसे में जब कोई बड़ा प्रोजेक्ट तैयार होता है तो लोगों को उम्मीद होती है कि उसका लाभ उन्हें जल्द मिलेगा। नोएडा बस टर्मिनल की मौजूदा स्थिति ने इसी मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है।
लोग सवाल कर रहे हैं कि जब बस संचालन की पूरी व्यवस्था समय पर सुनिश्चित नहीं थी तो निर्माण कार्य को इतनी तेजी से पूरा करने की आवश्यकता क्यों महसूस की गई। किसी भी बड़े सार्वजनिक प्रोजेक्ट की सफलता सिर्फ भवन बनाने से नहीं होती, बल्कि उसके सही संचालन और उपयोग से होती है।
योजना और संचालन के बीच तालमेल की कमी?
जानकारों का मानना है कि किसी भी परिवहन परियोजना को शुरू करने से पहले संचालन की पूरी योजना तैयार होना जरूरी है। इसमें बस रूट, परिवहन विभाग की भूमिका, यात्रियों की संख्या, कर्मचारियों की व्यवस्था और अन्य जरूरी पहलुओं पर पहले से ध्यान दिया जाता है।
नोएडा बस टर्मिनल को लेकर भी यही सवाल उठ रहे हैं कि क्या निर्माण से पहले संचालन से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी की गई थीं या नहीं। यदि किसी परियोजना का उपयोग शुरू होने में वर्षों लग जाते हैं तो उसका उद्देश्य और आर्थिक प्रभाव दोनों प्रभावित होते हैं।
नोएडा जैसे शहर में बेहतर परिवहन की जरूरत
नोएडा उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख औद्योगिक और कॉर्पोरेट हब है। यहां रोजाना लाखों लोग काम और अन्य जरूरतों के लिए यात्रा करते हैं। ऐसे में एक व्यवस्थित बस टर्मिनल की जरूरत लंबे समय से महसूस की जाती रही है।
शहर के लोगों को उम्मीद थी कि यह टर्मिनल शुरू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर और अन्य शहरों के लिए बस सेवाएं आसान होंगी। इससे यात्रियों को सुविधा मिलने के साथ-साथ यातायात व्यवस्था में भी सुधार की संभावना थी।
जवाबदेही तय करने की मांग
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 158 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना का पूरा उपयोग कब शुरू होगा। लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग जल्द से जल्द स्पष्ट करे कि बस संचालन में देरी की वजह क्या है और इसे पूरी क्षमता के साथ कब शुरू किया जाएगा।
सार्वजनिक धन से तैयार होने वाली योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी होती है। किसी भी परियोजना की सफलता तभी मानी जाती है जब उसका फायदा सीधे आम नागरिकों तक पहुंचे।
नोएडा बस टर्मिनल का मामला सिर्फ एक इमारत के खाली रहने का नहीं है, बल्कि यह सरकारी योजनाओं की कार्यप्रणाली, भविष्य की योजना और जनता के पैसे के बेहतर इस्तेमाल से जुड़ा बड़ा सवाल है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस परियोजना को कब पूरी तरह सक्रिय करता है और कब यात्रियों को इसका वास्तविक लाभ मिलना शुरू होता है।
Noida Bus Terminal, a Rs 158 crore modern transport infrastructure project in Uttar Pradesh, has raised questions over public money utilization after remaining largely unused despite its inauguration by Chief Minister Yogi Adityanath in 2022. The project was designed to provide better public transport facilities, but the lack of regular bus operations has created concerns among residents. This Noida development project highlights issues related to planning, execution, accountability and effective use of government infrastructure.


















