दिल्ली में किराएदारों का खतरनाक खेल: महिला के फ्लैट के कागजों से 18 करोड़ रुपये का लोन लेने का खुलासा
AIN NEWS 1: दिल्ली के विवेक विहार इलाके में प्रॉपर्टी से जुड़ी धोखाधड़ी का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां रहने वाली 55 वर्षीय महिला उषा रानी सेठी को उस समय बड़ा झटका लगा, जब उन्हें पता चला कि उनके ही फ्लैट के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये का फर्जी लोन लिया जा चुका है। इस मामले में पुलिस जांच के बाद एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दूसरा आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है।
मामला साल 2012 से शुरू हुआ, जब उषा रानी सेठी ने अपने फ्लैट को किराए पर दिया था। किराएदार के रूप में सचिन और संजय नाम के दो लोग वहां रहने आए। सामान्य प्रक्रिया के तहत दोनों ने फ्लैट से जुड़े कुछ दस्तावेज और जरूरी जानकारी ली। उस समय उषा रानी को अंदाजा भी नहीं था कि यही दस्तावेज आगे चलकर उनके लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकते हैं।

किराएदारों ने हासिल किए प्रॉपर्टी के दस्तावेज
जानकारी के मुताबिक, किराएदार सचिन और संजय ने फ्लैट से जुड़े दस्तावेज अपने पास रख लिए थे। आरोप है कि इसके बाद उन्होंने महिला की पहचान और संपत्ति से संबंधित कागजात का गलत इस्तेमाल किया।
कुछ समय बाद उषा रानी सेठी को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब सुप्रीम कोर्ट के एक अधिवक्ता उनके घर पहुंचे। अधिवक्ता ने उन्हें बताया कि उनके फ्लैट को लेकर पंजाब एंड सिंध बैंक से करीब 70 लाख रुपये का लोन लिया गया था।
अधिवक्ता के अनुसार, यह लोन फ्लैट को गिरवी रखकर लिया गया था, लेकिन उसकी किस्तें और बकाया राशि जमा नहीं की गई थी। बैंक की तरफ से कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने के बाद यह मामला महिला के सामने आया।
महिला ने पुलिस से की शिकायत
अपने नाम पर हुए इस कथित फर्जीवाड़े की जानकारी मिलने के बाद उषा रानी सेठी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उन्होंने न तो कोई लोन लिया और न ही अपनी संपत्ति को किसी बैंक के पास गिरवी रखा।
शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर महिला के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उनका इस्तेमाल अलग-अलग वित्तीय संस्थानों और कंपनियों से लोन लेने के लिए किया।
18 करोड़ रुपये के लोन का खुलासा
पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी केवल एक बैंक तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने अलग-अलग कंपनियों और संस्थानों के माध्यम से करीब 18 करोड़ रुपये तक का लोन हासिल किया।
आरोपियों ने कथित रूप से महिला के फ्लैट को अपनी संपत्ति बताकर दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। फर्जी कागजात के आधार पर इतनी बड़ी रकम का लोन लेने का मामला सामने आने के बाद पुलिस भी हैरान रह गई।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे फर्जीवाड़े में कितने लोग शामिल थे और क्या आरोपियों ने इसी तरह अन्य लोगों की संपत्तियों के साथ भी धोखाधड़ी की है।
एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरा फरार
मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सचिन और संजय के खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस ने इनमें से एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरा आरोपी अभी फरार चल रहा है।
पुलिस फरार आरोपी की तलाश कर रही है और उससे जुड़े संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि लोन लेने के लिए कौन-कौन से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और इस प्रक्रिया में किन लोगों ने मदद की।
प्रॉपर्टी मालिकों के लिए बड़ी सीख
यह मामला उन लोगों के लिए भी एक चेतावनी है, जो अपनी संपत्ति किराए पर देते हैं। कई बार किराएदारों को दिए गए दस्तावेज और निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मकान मालिकों को किराएदारों का पुलिस सत्यापन जरूर करवाना चाहिए। इसके अलावा प्रॉपर्टी के दस्तावेजों की कॉपी देते समय सावधानी बरतनी चाहिए और किसी भी अनजान व्यक्ति को मूल दस्तावेज नहीं सौंपने चाहिए।
बैंक या किसी वित्तीय संस्था से आने वाले किसी भी नोटिस को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते जांच करने पर बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।
पुलिस की जांच जारी
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि 18 करोड़ रुपये के इस कथित लोन फर्जीवाड़े में कितने लोग शामिल थे और रकम का इस्तेमाल कहां किया गया।
उषा रानी सेठी के लिए यह मामला लंबे समय तक चलने वाली कानूनी लड़ाई बन सकता है, लेकिन पुलिस कार्रवाई के बाद उन्हें उम्मीद है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और उनकी संपत्ति को लेकर स्थिति साफ हो सकेगी।
The Delhi Vivek Vihar flat fraud case has highlighted a major property document scam where tenants allegedly misused fake documents of a 55-year-old woman to obtain loans worth around ₹18 crore from multiple companies. The Delhi Police investigation revealed suspected property fraud, fake ownership papers, and loan scams involving tenants who used a residential flat as security. This case serves as a warning for property owners about tenant verification, document security, and preventing real estate fraud in India.


















