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यूपी में मानसून की एंट्री का इंतजार खत्म! 1-2 जुलाई से झमाझम बारिश के आसार, जानिए जून की गर्मी और जुलाई-अगस्त के मौसम का पूरा अपडेट!

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यूपी में मानसून का इंतजार खत्म होने वाला, 1-2 जुलाई से बारिश के आसार; जानिए मौसम का पूरा हाल

AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद अब मानसून की दस्तक की उम्मीद बढ़ गई है। पिछले करीब 19 दिनों से बिहार की सीमा के आसपास ठहरा मानसून अब आगे बढ़ने की तैयारी में है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 1 से 2 जुलाई के बीच मानसून पूर्वांचल और मध्य यूपी के कई हिस्सों में पहुंच सकता है, जिसके बाद प्रदेश में बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है।

इस बार मानसून की रफ्तार कमजोर रहने के कारण यूपी में जून का महीना बेहद गर्म और सूखा रहा। सामान्य समय के अनुसार मानसून को 20 से 25 जून के बीच प्रदेश में सक्रिय होना था, लेकिन बंगाल की खाड़ी से आगे बढ़ी मानसूनी हवाएं बिहार बॉर्डर के पास आकर धीमी पड़ गईं।

अब मौसम विभाग का अनुमान है कि हवा के पैटर्न में बदलाव के कारण अगले 24 से 48 घंटों में मानसून को आगे बढ़ने के लिए जरूरी परिस्थितियां मिल सकती हैं।

यूपी में मानसून क्यों अटक गया था?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की बारिश के लिए वातावरण में कई प्रक्रियाएं एक साथ काम करती हैं। जब किसी इलाके में तेज गर्मी पड़ती है तो जमीन और हवा गर्म होकर ऊपर उठती है। इससे नीचे कम दबाव का क्षेत्र यानी लो प्रेशर एरिया बनता है।

यही कम दबाव वाला क्षेत्र समुद्र से नमी वाली हवाओं को अपनी ओर खींचता है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाएं जब जमीन से मिलती हैं तो बादल बनते हैं और बारिश होती है।

लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश के ऊपर मजबूत लो प्रेशर सिस्टम नहीं बन पाया। इसके कारण मानसूनी हवाओं को आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त ताकत नहीं मिली और वे बिहार सीमा के आसपास कमजोर पड़ गईं।

बिहार और झारखंड में भी नहीं हुई अच्छी बारिश

मानसून जहां रुका हुआ था, वहां भी बारिश की स्थिति बहुत अच्छी नहीं रही। बिहार के पूर्वी चंपारण के मोतिहारी और झारखंड-बिहार सीमा के आसपास मानसून की रफ्तार धीमी रही।

मौसम विभाग के अनुसार 29 जून के बाद हवाओं के पैटर्न में बदलाव देखने को मिला है। बिहार और झारखंड के कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना बनी है। यही सिस्टम अब मानसून को उत्तर प्रदेश की ओर आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।

जून में यूपी में बारिश की भारी कमी

इस साल जून महीने में उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश सामान्य से काफी कम रही। प्रदेश के कई जिलों में बारिश की कमी दर्ज की गई।

पूर्वी यूपी में सामान्य जून बारिश करीब 101.2 मिलीमीटर होती है, लेकिन इस बार यहां केवल लगभग 36.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यानी करीब 64 प्रतिशत तक कमी रही।

वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामान्य बारिश करीब 72.3 मिलीमीटर होती है, जबकि इस बार लगभग 36.3 मिलीमीटर बारिश हुई। यहां बारिश में करीब 50 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

जिन जिलों में जून में सबसे कम बारिश हुई, उनमें कौशांबी, भदोही, चंदौली, फतेहपुर और कानपुर देहात शामिल हैं।

जुलाई और अगस्त में कैसा रहेगा मानसून?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई के शुरुआती 15 दिनों में यूपी के पूर्वांचल, मध्य यूपी और पश्चिमी यूपी में अच्छी बारिश होने की संभावना है। इससे किसानों को राहत मिल सकती है और रुकी हुई खेती के काम तेजी से शुरू हो सकते हैं।

हालांकि जुलाई के आखिरी हिस्से में मानसून की सक्रियता कुछ कम हो सकती है। अनुमान है कि जुलाई में प्रदेश में सामान्य से करीब 5 प्रतिशत कम बारिश हो सकती है।

अगस्त महीने में मानसून कमजोर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इस दौरान सामान्य से लगभग 8 प्रतिशत तक कम बारिश होने का अनुमान है। अगस्त का महीना धान समेत खरीफ फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, इसलिए किसानों को सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार रखनी होगी।

जून में गर्मी ने तोड़े कई रिकॉर्ड

मानसून की देरी का असर प्रदेश के तापमान पर भी साफ दिखाई दिया। आमतौर पर यूपी में जून के दौरान 2 से 3 दिन हीटवेव की स्थिति रहती है, लेकिन इस साल कई जिलों में 10 से 14 दिनों तक लगातार भीषण गर्मी रही।

कई इलाकों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। रात का तापमान भी सामान्य से काफी ज्यादा दर्ज किया गया।

प्रयागराज में 11-12 जून की रात न्यूनतम तापमान 34.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने पिछले 127 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया।

इससे पहले साल 1898 में प्रयागराज में सबसे गर्म रात का तापमान 33.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था।

यूपी के कई जिले दुनिया के सबसे गर्म इलाकों में शामिल

जून के दौरान यूपी के कई शहरों में रिकॉर्ड गर्मी देखने को मिली। वैश्विक तापमान सूची में भी प्रदेश के कुछ जिले सबसे गर्म स्थानों में शामिल रहे।

बांदा, प्रयागराज, वाराणसी, मिर्जापुर और फतेहपुर जैसे जिलों में भीषण गर्मी का असर देखने को मिला। कानपुर में भी कई बार तापमान 47 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया।

किसानों के लिए राहत की खबर

मानसून आने के बाद किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि जुलाई के पहले पखवाड़े में धान की रोपाई का काम तेजी से पूरा किया जा सकता है।

हालांकि अगस्त में बारिश कम रहने की संभावना को देखते हुए किसानों को सिंचाई के वैकल्पिक साधनों जैसे ट्यूबवेल, नहर और बोरिंग की व्यवस्था पर ध्यान देना होगा।

मौसम की बड़ी तस्वीर

इस साल मानसून की देरी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। केरल में भी मानसून सामान्य समय से कुछ दिन देर से पहुंचा। इसके बाद उत्तर भारत में मजबूत मौसम सिस्टम नहीं बनने के कारण यूपी में प्री-मानसून बारिश कमजोर रही।

फिलहाल राहत की बात यह है कि मानसून अब सक्रिय होने की ओर बढ़ रहा है। अगले कुछ दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश शुरू होने की उम्मीद है, जिससे गर्मी से राहत मिलने के साथ-साथ खेती के कामों में भी तेजी आएगी।

Uttar Pradesh Monsoon 2026 is expected to bring relief as the southwest monsoon may enter the state between July 1 and July 2 after remaining stagnant near the Bihar border for nearly 19 days. The delayed monsoon caused severe heatwave conditions and rainfall deficiency across UP during June. Weather experts predict better rainfall during the first half of July, while farmers are advised to complete paddy plantation activities. The UP weather forecast, monsoon arrival update, July-August rainfall prediction, and impact on agriculture remain key concerns for residents and farmers across Uttar Pradesh.

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