AIN NEWS 1 | देशभर में चर्चा का विषय बने केतन अग्रवाल मौत मामले में हर दिन नए तथ्य सामने आ रहे हैं। जांच के बीच अब यह जानकारी भी सामने आई है कि केतन अग्रवाल और सिया गोयल का रिश्ता पारंपरिक रीति-रिवाजों और कुंडली मिलान के बाद तय किया गया था। दोनों परिवारों ने विवाह से पहले ज्योतिषीय परामर्श लिया था, जिसमें दोनों की कुंडलियों के 36 में से 27 गुण मिलने की बात कही गई थी।
परिवार के ज्योतिषी ने उस समय इस रिश्ते को अनुकूल और सफल विवाह के लिए उपयुक्त बताया था। लेकिन कुछ ही महीनों बाद यही रिश्ता एक चर्चित हत्या मामले में बदल गया, जिसकी जांच अब पुलिस कई पहलुओं से कर रही है।
जनवरी 2026 में हुआ था कुंडली मिलान
परिवार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जनवरी 2026 में केतन अग्रवाल और सिया गोयल के रिश्ते को आगे बढ़ाने से पहले दोनों परिवारों ने पारंपरिक तरीके से कुंडली मिलवाई थी।
बताया गया कि दोनों की जन्म कुंडलियों में कुल 36 में से 27 गुण मिले थे। हिंदू विवाह परंपरा में 18 या उससे अधिक गुण मिलने को सामान्यतः विवाह के लिए उपयुक्त माना जाता है, जबकि 27 गुण को अच्छा मेल माना जाता है।
परिवार के ज्योतिषी ने ज्योतिषीय गणना के आधार पर बताया था कि केतन का ‘देव गण’ और सिया का ‘मनुष्य गण’ है। उनके अनुसार यह संबंध अनुकूल था और विवाह सफल रहने की संभावना थी। इसी सलाह के बाद दोनों परिवारों ने रिश्ते को अंतिम रूप दिया।
परिवारों ने माना था ‘परफेक्ट मैच’
सूत्रों के मुताबिक, गोयल और अग्रवाल परिवार पहले से एक-दूसरे को जानते थे। कुंडली मिलान के सकारात्मक परिणाम आने के बाद दोनों परिवारों ने इस रिश्ते को लगभग ‘परफेक्ट मैच’ माना।
इसके बाद दोनों पक्षों की सहमति से सगाई की तैयारियां शुरू हुईं और पूरे पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ रिश्ते को आगे बढ़ाया गया।
उस समय किसी ने भी कल्पना नहीं की थी कि कुछ महीनों बाद यही रिश्ता एक गंभीर आपराधिक मामले का हिस्सा बन जाएगा।
फरवरी में हुई थी सगाई
पुलिस जांच के अनुसार, फरवरी 2026 में पुणे के एक होटल में केतन अग्रवाल और सिया गोयल की सगाई संपन्न हुई थी।
सगाई के बाद दोनों परिवार नवंबर 2026 में प्रस्तावित विवाह की तैयारियों में जुट गए थे। शुरुआती दौर में दोनों के बीच संबंध सामान्य बताए जा रहे थे और शादी की तैयारियां भी तेज़ी से चल रही थीं।
सगाई के बाद बदले हालात
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सगाई के बाद शुरुआती करीब दो महीने तक सिया ने नए रिश्ते को अपनाने की कोशिश की।
हालांकि जांच एजेंसी का दावा है कि बाद में चेतन चौधरी दोबारा उसकी जिंदगी में आया, जिसके बाद परिस्थितियां बदलने लगीं। पुलिस का आरोप है कि इसी दौरान कथित तौर पर हत्या की साजिश तैयार की गई।
हालांकि यह पुलिस का जांच संबंधी दावा है और इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
सिया के भाई ने पुलिस को क्या बताया?
जांच के दौरान सिया गोयल के भाई साहिल गोयल ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि उसे इस बात की जानकारी थी कि सिया और चेतन चौधरी पहले से एक-दूसरे को जानते थे और दोस्त थे।
हालांकि उसके अनुसार, सगाई के बाद सिया लगातार यही कहती थी कि अब उसका चेतन से कोई संपर्क नहीं है।
पुलिस इस बयान को भी जांच का हिस्सा मानकर अन्य डिजिटल साक्ष्यों के साथ मिलान कर रही है।
केतन ने जताई थी चिंता
पुलिस जांच में केतन के पिता विशाल अग्रवाल का बयान भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, उन्होंने बताया कि शादी तय होने के बाद केतन ने कई बार सिया के व्यवहार को लेकर चिंता जताई थी। उसने परिवार से पूछा था कि क्या सिया के बारे में पूरी जानकारी लेने के बाद ही रिश्ता तय किया गया है।
जांच के मुताबिक, केतन ने यह भी कहा था कि कई बार जब वह सिया को फोन करता था तो उसका मोबाइल व्यस्त मिलता था। उसने यह भी बताया था कि बातचीत के दौरान सिया अक्सर चेतन चौधरी का जिक्र करती थी, जिससे उसके मन में संदेह पैदा हुआ।
हालांकि परिवार ने उसे समझाया कि दोनों परिवार पहले से परिचित हैं और चिंता की कोई जरूरत नहीं है।
बाली प्री-वेडिंग ट्रिप रद्द होने के बाद बढ़ी चिंता
पुलिस जांच के अनुसार, 6 जून को प्रस्तावित बाली प्री-वेडिंग ट्रिप रद्द होने के बाद केतन ने अपने पिता से शिकायत की थी कि सिया छोटी-छोटी बातों पर विवाद करने लगी है।
परिवार ने उस समय इसे सामान्य मतभेद मानते हुए केतन को समझाया कि शादी से पहले ऐसे विवाद होना असामान्य नहीं है और उसे रिश्ता आगे बढ़ाने की सलाह दी गई।
14 जून की घटना भी जांच के दायरे में
जांच एजेंसी का दावा है कि 18 जून की घटना से चार दिन पहले यानी 14 जून को केतन और सिया लोहागढ़ किले गए थे।
पुलिस के अनुसार, उस दिन भी एक ऐसी घटना हुई थी जिसमें केतन कथित तौर पर खाई की ओर गिरते-गिरते बच गया था।
फिलहाल पुलिस इस घटना की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसका 18 जून की घटना से कोई संबंध है या नहीं।
18 जून को हुई केतन की मौत
18 जून को लोहागढ़ किले से गिरने के बाद केतन अग्रवाल की मौत हो गई।
पुलिस का आरोप है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने मिलकर हत्या की साजिश रची और घटना को अंजाम दिया। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और मामले की जांच जारी है।
हालांकि दोनों आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
पुलिस किन सबूतों के आधार पर कर रही है जांच?
इस मामले की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि घटनास्थल पर कोई प्रत्यक्षदर्शी सामने नहीं आया है। जिस स्थान पर केतन के खाई में गिरने की बात कही जा रही है, वहां कोई सीसीटीवी कैमरा भी मौजूद नहीं था।
ऐसी स्थिति में पुलिस की जांच मुख्य रूप से डिजिटल और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है।
अब तक जांच एजेंसियां जिन प्रमुख बिंदुओं पर काम कर रही हैं, उनमें शामिल हैं—
- सिया गोयल और चेतन चौधरी से विस्तृत पूछताछ
- दोनों के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच
- कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का विश्लेषण
- कथित रूप से डिलीट किए गए मैसेज की रिकवरी
- मोबाइल लोकेशन डेटा
- आसपास उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज
- क्राइम सीन रीक्रिएशन
- परिवार, दोस्तों और अन्य संबंधित लोगों के बयान
पुलिस का कहना है कि इन सभी साक्ष्यों को जोड़कर पूरे घटनाक्रम की सटीक तस्वीर तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
क्या कुंडली मिलान सफल वैवाहिक जीवन की गारंटी है?
इस मामले के सामने आने के बाद कुंडली मिलान को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुंडली मिलान भारतीय विवाह परंपरा का एक हिस्सा है, लेकिन किसी भी वैवाहिक संबंध की सफलता केवल ज्योतिषीय गणना पर निर्भर नहीं करती।
आपसी विश्वास, पारदर्शिता, संवाद और समझदारी किसी भी रिश्ते की मजबूत नींव मानी जाती है। वहीं, इस मामले में पुलिस फिलहाल केवल उपलब्ध साक्ष्यों और वैज्ञानिक जांच के आधार पर आगे बढ़ रही है।
केतन अग्रवाल और सिया गोयल का रिश्ता 27 गुणों के मिलान और परिवारों की सहमति के बाद तय हुआ था। परिवार के ज्योतिषी ने इसे अनुकूल और सफल विवाह का संकेत बताया था। लेकिन कुछ ही महीनों बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं और अब यह मामला देश के चर्चित हत्या मामलों में शामिल हो गया है।
फिलहाल जांच जारी है और पुलिस डिजिटल, फॉरेंसिक तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना की हर कड़ी को जोड़ने का प्रयास कर रही है। मामले की वास्तविक तस्वीर अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।


















