AIN NEWS 1 | अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी मामले की जांच लगातार तेज होती जा रही है। मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुट गए हैं। जांच एजेंसियां केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि चढ़ावे की गिनती, रखरखाव और बैंक तक रकम पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया से जुड़े हर व्यक्ति की भूमिका की जांच कर रही हैं।
इसी क्रम में गणना कक्ष से जुड़े सभी कर्मचारियों से उनकी आय, खर्च और आर्थिक स्थिति का विस्तृत ब्योरा मांगा गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं किसी कर्मचारी की आय से अधिक संपत्ति या खर्च तो नहीं बढ़ा है।
सभी कर्मचारियों से मांगा गया आय और खर्च का विवरण
मंगलवार को गणना कक्ष से जुड़े कई कर्मचारी सीओ कार्यालय पहुंचे और पुलिस को लिखित रूप से अपनी आय और खर्च का ब्योरा सौंपना शुरू कर दिया।
जांच एजेंसियां कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति का पिछले रिकॉर्ड से मिलान कर रही हैं। यदि किसी कर्मचारी की जीवनशैली या संपत्ति में असामान्य वृद्धि पाई जाती है तो उससे संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।
बैंक तक रकम पहुंचाने वाले कर्मचारी भी रडार पर
पुलिस अब केवल नोट गिनने वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। जांच का दायरा बढ़ाते हुए उन कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों को भी शामिल किया गया है जो गणना कक्ष से नोटों के बक्से बैंक तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाते थे।
एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की जांच करने की सिफारिश की है। इसी आधार पर अब सभी संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है।
निजी सुरक्षा गार्डों से भी हो रही पूछताछ
गणना कक्ष के बाहर तैनात निजी सुरक्षा गार्ड भी जांच के दायरे में आ गए हैं। पुलिस उनसे यह जानकारी जुटा रही है कि चढ़ावे की रकम की आवाजाही के दौरान क्या व्यवस्था रहती थी और किन-किन लोगों का आना-जाना होता था।
इसके अलावा जून में मामला सामने आने के बाद बैंक में कितनी बार रकम जमा की गई और लेनदेन की प्रक्रिया कैसे हुई, इसकी भी विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।
आर्थिक स्थिति में बदलाव की हो रही जांच
सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में बदलाव की जानकारी सामने आई है। पुलिस को मिली सूचना के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में कुछ कर्मचारियों के खर्च, रहन-सहन और जीवनशैली में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा गया है।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन बदलावों का संबंध कहीं चढ़ावा हेराफेरी से तो नहीं है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
44 कर्मचारी करते थे चढ़ावे की गिनती
जानकारी के अनुसार, श्रद्धालुओं द्वारा दान में दिए गए नकद रुपये और धातुओं की गिनती का कार्य कुल 44 कर्मचारी करते थे।
इनमें से सात मुख्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अब पुलिस बाकी कर्मचारियों की भूमिका और उनकी आर्थिक गतिविधियों की भी जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं इस पूरे मामले में अन्य लोग भी शामिल तो नहीं थे।
बैंक खाते और संपत्तियों की भी जांच
पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि पिछले दो वर्षों के दौरान आरोपियों ने कहां-कहां संपत्तियां खरीदीं या निवेश किया।
जांच एजेंसियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित तौर पर हेराफेरी की गई राशि का इस्तेमाल किन माध्यमों से किया गया और उसकी वास्तविक मात्रा कितनी थी।
ट्रस्ट की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संबंधित पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों और निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं किसी स्तर पर लापरवाही या निगरानी में कमी तो नहीं रही, जिससे कथित हेराफेरी संभव हो सकी।
हालांकि अब तक किसी ट्रस्ट पदाधिकारी के खिलाफ कोई आधिकारिक आरोप नहीं लगाया गया है।
राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी मामले की जांच अब व्यापक स्तर पर पहुंच चुकी है। पुलिस और एसआईटी पूरी प्रक्रिया से जुड़े प्रत्येक कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी और वित्तीय लेनदेन की बारीकी से जांच कर रही हैं। कर्मचारियों की आय-व्यय का मिलान, बैंक खातों की पड़ताल और संपत्तियों की जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस कथित हेराफेरी में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
फिलहाल जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि सभी साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।


















