गोरखपुर में युवती से बीच सड़क मारपीट: पुलिस की लापरवाही पर बड़ा एक्शन, 3 पुलिसकर्मी सस्पेंड, SHO और चौकी प्रभारी हटाए गए
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक युवती के साथ बीच सड़क हुई मारपीट का मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। इस घटना ने केवल कानून-व्यवस्था पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस विभाग हरकत में आया और वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। इसके अलावा शाहपुर थाना प्रभारी और संबंधित चौकी प्रभारी को भी लाइन हाजिर कर दिया गया है।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि युवती के साथ खुलेआम मारपीट होती रही, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी उसे बचाने के बजाय तमाशबीन बने रहे। इतना ही नहीं, कुछ पुलिसकर्मी आरोपियों को रोकने की जगह घटना का वीडियो बनाते दिखाई दिए। इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. कौस्तुभ ने देर रात सख्त कार्रवाई की।

वायरल वीडियो के बाद पुलिस विभाग में मचा हड़कंप
घटना का वीडियो सामने आने के बाद पूरे पुलिस महकमे में हलचल मच गई। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा था कि युवती पर कई युवक हमला कर रहे हैं, जबकि आसपास मौजूद पुलिसकर्मी प्रभावी हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद आम लोगों ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल जांच के आदेश दिए।
रविवार देर रात करीब 12 बजे एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने शाहपुर थाना प्रभारी राकेश रोशन सिंह और कौवाबाग चौकी प्रभारी दुर्गेश नंदिनी को लाइन हाजिर कर दिया। वहीं पीआरवी में तैनात दो सिपाही राज मंगल सिंह और अविनाश यादव के साथ उपनिरीक्षक अभिषेक कुमार सिंह को निलंबित कर दिया गया। ड्यूटी पर मौजूद होमगार्ड हरिचरन राय के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पुलिसकर्मियों पर क्या लगे आरोप?
1. थाना प्रभारी राकेश रोशन सिंह
जांच में पाया गया कि उन्होंने मामले की गंभीरता को नजरअंदाज किया। युवती की शिकायत के बावजूद पहले हल्की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। वीडियो सामने आने के बाद ही गंभीर धाराएं जोड़ी गईं। इस लापरवाही के चलते उन्हें लाइन हाजिर कर दिया गया।
2. चौकी प्रभारी दुर्गेश नंदिनी
कौवाबाग चौकी क्षेत्र में करीब एक घंटे तक हंगामा चलता रहा, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं मिली। बाद में भी उन्होंने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया।
3. सिपाही राज मंगल सिंह और अविनाश यादव
दोनों पुलिसकर्मी घटनास्थल पर मौजूद थे। आरोप है कि उन्होंने युवती को बचाने के बजाय पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया। आरोपियों को रोकने या पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने का कोई प्रयास नहीं किया गया।
4. उपनिरीक्षक अभिषेक कुमार सिंह
घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचे, लेकिन आरोपियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने और औपचारिकता पूरी करने की कोशिश की। इस कारण उन्हें भी निलंबित कर दिया गया।
5. होमगार्ड हरिचरन राय
जांच में सामने आया कि घटना के समय उनकी ड्यूटी घटनास्थल पर थी, लेकिन वे मौके पर मौजूद नहीं थे। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी गई है।
कैसे हुई पूरी घटना?
यह घटना शाहपुर थाना क्षेत्र में 9 जुलाई की शाम लगभग 6:30 बजे हुई। 24 वर्षीय युवती अपने बीमार पिता को इलाज के लिए रेलवे अस्पताल लेकर जा रही थी। रास्ते में उसकी कार की एक बाइक से हल्की टक्कर हो गई। इस मामूली दुर्घटना के बाद दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई।
आरोप है कि बाइक सवार युवक ने अपने साथियों को फोन कर बुला लिया। कुछ ही देर बाद काली स्कॉर्पियो में सवार कई युवक मौके पर पहुंचे और युवती पर हमला कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आरोपियों ने युवती को कार से बाहर निकालकर बाल पकड़कर सड़क पर घसीटा। उसके साथ लात-घूंसों और बेल्ट से मारपीट की गई। आरोप है कि उसके कपड़े फाड़ने की कोशिश की गई और उसके साथ अभद्र व्यवहार भी किया गया। इस दौरान युवती लगातार मदद की गुहार लगाती रही, लेकिन कोई उसे बचाने आगे नहीं आया।
पीड़िता ने सुनाई आपबीती
घटना के बाद पीड़िता ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि वह अपने पिता को अस्पताल लेकर जा रही थी, तभी मामूली सड़क दुर्घटना के बाद कुछ युवकों ने उसे घेर लिया।
पीड़िता का आरोप है कि आरोपियों ने उसके बाल पकड़कर सड़क पर गिराया, बेल्ट और मुक्कों से पीटा और गलत तरीके से छूने की कोशिश की। उसने रोते हुए बताया कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से जब उसने मदद मांगी तो उन्होंने कार्रवाई करने के बजाय कहा कि “सब रिकॉर्ड हो रहा है।”
यह बयान सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर और भी गंभीर सवाल उठने लगे।
वायरल वीडियो में क्या दिखा?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कई युवक युवती की कार के शीशे तोड़ते दिखाई देते हैं। वीडियो में यह भी नजर आता है कि युवती के सिर पर किसी भारी वस्तु से हमला किया गया।
घटनास्थल पर चार से पांच पुलिसकर्मी भी दिखाई दे रहे हैं, लेकिन वे किसी प्रभावी हस्तक्षेप की कोशिश करते नजर नहीं आते। आसपास बड़ी संख्या में लोग भी मौजूद थे, जबकि युवती के बीमार पिता कुछ दूरी पर बेबस खड़े दिखाई दे रहे थे।
वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने पुलिस की निष्क्रियता पर कड़ी नाराजगी जताई।
एक आरोपी गिरफ्तार, बाकी की तलाश जारी
पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, छेड़छाड़, मारपीट, धमकी और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
इसके अलावा पुलिस ने आठ अन्य संदिग्ध युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की तीन विशेष टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
एसपी सिटी ने क्या कहा?
एसपी सिटी निमिष पाटिल ने बताया कि युवती की शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। अन्य आरोपियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं। पुलिस सभी उपलब्ध वीडियो और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच कर रही है ताकि घटना में शामिल किसी भी आरोपी को बचने का मौका न मिले।
पुलिस विभाग के लिए बड़ी चुनौती
यह मामला केवल सड़क पर हुई हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस की जिम्मेदारी और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि ड्यूटी के दौरान लापरवाही या निष्क्रियता किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
अब इस मामले में लोगों की नजरें आगे की जांच, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और विभागीय कार्रवाई के अंतिम परिणाम पर टिकी हुई हैं।
The Gorakhpur girl assault case has sparked widespread outrage after a viral road rage video allegedly showed police officers failing to intervene while a 24-year-old woman was brutally assaulted in Uttar Pradesh. Following public criticism, three policemen were suspended, the SHO and outpost in-charge were removed, and the main accused was arrested. The incident has intensified concerns over police negligence, women’s safety, law and order in Uttar Pradesh, and the accountability of law enforcement agencies. Authorities have formed special teams to arrest the remaining suspects as the investigation continues.


















