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गाजियाबाद के पांची गांव में जलभराव पर विवाद: किसानों ने ग्राम प्रधान पर लगाए गंभीर आरोप, फसल बर्बाद होने से पलायन की आशंका!

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गाजियाबाद: जल निकासी की समस्या को लेकर पांची गांव में बढ़ा विवाद, किसानों ने लगाए गंभीर आरोप

AIN NEWS 1: गाजियाबाद जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां दिल्ली सीमा से सटे पांची गांव के कई किसानों ने ग्राम प्रधान पर लापरवाही और कथित साजिश के आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि वर्षों से गांव में जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण उनकी खेती लगातार प्रभावित हो रही है। उनका आरोप है कि समस्या का समाधान करने के बजाय इसे जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है, जिससे उनकी फसलें बर्बाद हो रही हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

पीड़ित किसानों के अनुसार गांव के जोहड़ (तालाब) का गंदा पानी निकासी के अभाव में सड़क पार करते हुए सीधे उनके खेतों में पहुंच जाता है। इससे खेतों में जलभराव की स्थिति बनी रहती है और खड़ी फसलें खराब हो जाती हैं। किसानों का कहना है कि इस समस्या के चलते उनकी मेहनत पर पानी फिर रहा है और कई परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

किसानों का आरोप- नाला न बनने से बढ़ रही परेशानी

ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में समय रहते उचित नाले का निर्माण करा दिया जाता, तो जोहड़ का पानी खेतों तक नहीं पहुंचता। उनका आरोप है कि ग्राम प्रधान नासिर ने अब तक नाले के निर्माण को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे हर वर्ष बरसात के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं।

किसानों ने दावा किया कि जलभराव के कारण कई बीघा कृषि भूमि प्रभावित हो चुकी है। धान, गन्ना और अन्य फसलें पानी में डूबकर खराब हो रही हैं। उनका कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और लगातार हो रहे नुकसान के कारण परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

जोहड़ की जमीन पर अवैध कब्जे का भी आरोप

पीड़ित किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव के जोहड़ की आधे से अधिक हिस्से की जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है। उनका कहना है कि इसी भूमि पर एक मदरसा और एक दर्जन से अधिक दुकानें बनाई गई हैं।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। किसानों का दावा है कि इन दुकानों को केवल एक विशेष समुदाय के लोगों को किराए पर दिया जाता है। इस संबंध में प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

किसानों ने उत्पीड़न के लगाए आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें लगातार मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। उनका आरोप है कि ऐसी परिस्थितियां बनाई जा रही हैं, जिससे वे मजबूर होकर अपनी जमीन बेच दें और गांव छोड़ने पर विवश हो जाएं।

किसानों ने कहा कि यदि समय रहते जल निकासी की व्यवस्था नहीं हुई तो आने वाले समय में खेती करना लगभग असंभव हो जाएगा। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक समस्या जस की तस बनी हुई है।

ग्राम प्रधान ने आरोपों पर क्या कहा?

जब इस पूरे मामले में ग्राम प्रधान नासिर से बात की गई तो उन्होंने किसानों के आरोपों को पूरी तरह सही नहीं माना। प्रधान के अनुसार गांव में नाले के निर्माण के लिए टेंडर पहले ही स्वीकृत हो चुका था।

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित नाले के रास्ते में दो मकान आ रहे थे। संबंधित लोगों ने इसका विरोध किया, जिसके चलते निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका और बाद में टेंडर निरस्त करना पड़ा।

प्रधान का कहना है कि जब तक रास्ते से जुड़ा विवाद समाप्त नहीं होगा, तब तक नाले का निर्माण संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक स्तर पर समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।

किसानों ने मिलीभगत का लगाया आरोप

दूसरी ओर किसानों का आरोप है कि नाला निर्माण में जानबूझकर बाधाएं खड़ी की जाती हैं। उनका कहना है कि जब भी निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तभी विरोध शुरू हो जाता है।

ग्रामीणों का दावा है कि विरोध करने वाले और योजना को आगे बढ़ाने वाले लोगों के बीच आपसी मिलीभगत है, जिसके कारण वर्षों से यह परियोजना अधर में लटकी हुई है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच कराए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।

शासन-प्रशासन से कई बार लगा चुके हैं गुहार

पीड़ित किसानों का कहना है कि वे इस मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन से लेकर लखनऊ तक शिकायत भेज चुके हैं। उन्होंने संबंधित विभागों में आवेदन देकर जल निकासी, जोहड़ की स्थिति और कथित अवैध कब्जों की जांच की मांग की है।

किसानों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण उन्होंने अपनी समस्या मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक की है ताकि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले पर ध्यान दें।

डीएम को सौंपा ज्ञापन

किसानों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर पूरे मामले की जांच कराने, जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने और जोहड़ की भूमि से जुड़े आरोपों की जांच की मांग की है।

किसानों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो उनका खेती करना मुश्किल हो जाएगा और उन्हें अपने परिवार के साथ बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र कार्रवाई की जाए।

प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल इस मामले में किसानों और ग्राम प्रधान के दावे एक-दूसरे से अलग हैं। जहां किसान ग्राम प्रधान पर लापरवाही और मिलीभगत के आरोप लगा रहे हैं, वहीं ग्राम प्रधान निर्माण कार्य रुकने की वजह रास्ते में आने वाले मकानों के विरोध को बता रहे हैं।

ऐसी स्थिति में पूरे मामले की निष्पक्ष प्रशासनिक जांच ही यह स्पष्ट कर सकेगी कि जल निकासी की समस्या क्यों बनी हुई है, नाले का निर्माण अब तक क्यों नहीं हो पाया और किसानों द्वारा लगाए गए अन्य आरोपों में कितनी सच्चाई है।

Farmers in Panchi Village, Ghaziabad, have alleged that the lack of a proper drainage system has caused severe waterlogging, leading to extensive crop damage. The dispute involves allegations against the village head, claims of illegal encroachment on johad land, and demands for administrative action. The village head has denied the allegations, stating that the drain construction project was halted due to objections over the proposed route. The case has drawn attention as farmers seek justice and a permanent solution to the ongoing drainage problem in Uttar Pradesh.

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